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Shamli News: ई-कूड़ा वाहन खरीद पर सीडीओ ने लगाई रोक
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- बाजार रेट पता करने के लिए बनाई चार सदस्यीय टीममामले में राज्यसभा सांसद का नाम भी आ रहा सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ई-कूड़ा वाहन खरीदने पर सीडीओ ने रोक लगा दी है। वाहन का बाजार में क्या रेट है, इसके लिए चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया है। इस मामले में एक राज्यसभा सांसद का नाम भी प्रकाश में आ रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के 51 गांवों में कूड़ा उठाने के लिए ई-कूड़ा वाहन खरीदे जाने थे। सिक्का, बहावड़ी, करमूखेड़ी समेत 12 गांवों में यह वाहन जैम पोर्टल के माध्यम से करीब 2.40 लाख रुपये में खरीद लिए गए। जबकि इसका बाजार भाव 1.40 लाख बताया जा रहा है। इस पर कुछ प्रधानों ने सीडीओ से शिकायत की थी। जिस पर सीडीओ ने ई-कूड़ा वाहन की खरीद और भुगतान पर रोक लगा दी। साथ इनका बाजार भाव पता करने के लिए चार सदस्यीय टीम बना दी है। जिसमें एआरटीओ, डीपीआरओ, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक और जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को शामिल किया गया है।
यह भी जानकारी करने के लिए कहा गया कि ई-कूड़ा वाहन बेचने वाली फर्म खुद इसका निर्माण करती है या फिर किसी कंपनी की अधिकृत विक्रेता है। इस मामले में यह भी प्रकाश में आया कि एक राज्यसभा सांसद ने अधिकारियों से फर्म के मालिक की सिफारिश की है।
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निदेशालय से मांगा गया मार्गदर्शन
सरकारी विभागों में खरीदारी के लिए सरकार ने जैम पोर्टल विकसित किया था, लेकिन जैम पोर्टल पर इन कूड़ा वाहनों का दाम बाजार भाव से ज्यादा है। ऐसे में सीडीओ ने डीपीआरओ को निदेशालय से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगने के निर्देश दिए हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ई-कूड़ा वाहन खरीदने पर सीडीओ ने रोक लगा दी है। वाहन का बाजार में क्या रेट है, इसके लिए चार सदस्यीय टीम का गठन कर दिया है। इस मामले में एक राज्यसभा सांसद का नाम भी प्रकाश में आ रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के 51 गांवों में कूड़ा उठाने के लिए ई-कूड़ा वाहन खरीदे जाने थे। सिक्का, बहावड़ी, करमूखेड़ी समेत 12 गांवों में यह वाहन जैम पोर्टल के माध्यम से करीब 2.40 लाख रुपये में खरीद लिए गए। जबकि इसका बाजार भाव 1.40 लाख बताया जा रहा है। इस पर कुछ प्रधानों ने सीडीओ से शिकायत की थी। जिस पर सीडीओ ने ई-कूड़ा वाहन की खरीद और भुगतान पर रोक लगा दी। साथ इनका बाजार भाव पता करने के लिए चार सदस्यीय टीम बना दी है। जिसमें एआरटीओ, डीपीआरओ, जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक और जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी को शामिल किया गया है।
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यह भी जानकारी करने के लिए कहा गया कि ई-कूड़ा वाहन बेचने वाली फर्म खुद इसका निर्माण करती है या फिर किसी कंपनी की अधिकृत विक्रेता है। इस मामले में यह भी प्रकाश में आया कि एक राज्यसभा सांसद ने अधिकारियों से फर्म के मालिक की सिफारिश की है।
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निदेशालय से मांगा गया मार्गदर्शन
सरकारी विभागों में खरीदारी के लिए सरकार ने जैम पोर्टल विकसित किया था, लेकिन जैम पोर्टल पर इन कूड़ा वाहनों का दाम बाजार भाव से ज्यादा है। ऐसे में सीडीओ ने डीपीआरओ को निदेशालय से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगने के निर्देश दिए हैं।