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कार का नंबर हथेली पर लिख लिया था

Tue, 29 Nov 2016 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली Updated Tue, 29 Nov 2016 12:14 AM IST
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Car number was written on the palm
police - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कैराना । पलविंदर उर्फ पिंदा की गिरफ्तारी कस्बे के बाजार में फिल्मी स्टाइल में हुई। फार्च्यूनर से उतरकर पलविंदर भरे बाजार में भाग रहा था, जबकि सिपाही शहजाद और दीपांशु त्यागी उसके पीछे दौड़ रहे थे। बाद में तीसरा कांस्टेबल राजपाल यादव भी वहां पहुंच गया और तीनों ने पलविंदर को दबोच लिया। इस घटनाक्रम पर सिपाही शहजाद और दीपांशु से बात की गई, तो उन्होंने पूरी कहानी सुनाई, जब वह पलविंदर से भिड़ रहे थे।
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पंजाब की नाभा जेल से छह कैदियों के भागने के बाद रविवार दोपहर फार्च्यूनर का हरियाणा नंबर वायरलेस पर जारी किया गया था। कैराना कोतवाली में तैनात कांस्टेबल शहजाद ने बताया कि कार का नंबर उसने अपनी हथेली पर लिख लिया था। शाम सवा पांच बजे कांस्टेबल शहजाद, दीपांशु त्यागी और कोतवाली प्रभारी उमेश रोरिया सरकारी गाड़ी से गश्त पर निकल रहे थे।
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गाड़ी को शहजाद चला रहा था। जैसे ही वह कोतवाली के गेट से बाहर आए तो पानीपत की ओर से सफेद फार्च्यूनर आती दिखाई। कांस्टेबल शहजाद ने अपनी हथेली पर लिखे नंबर से  मिलान किया, तो साथी सिपाही दीपांशु को फार्च्यूनर रुकवाने के लिए कहा। 
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कांस्टेबल दीपांशू फार्च्यूनर के पास गया और चालक के बराबर के शीशे पर हाथ मारते हुए गाड़ी रोकने को कहा, लेकिन पलविंदर ने गाड़ी नहीं रोकी। इसी दौरान कलस्यान चौपाल के पास जाम लगने के कारण फार्च्यूनर निकल नहीं सकी, उसमें से पलविंदर एक बैग लेकर उतरा और भागने लगा। दीपांशु ने उसे रोकने का प्रयास किया तो पलविंदर ने उसे धक्का दे दिया। दीपांशु ने उसका बैग छीन लिया और वह भी पीछे भागने लगा। इसी बीच कांस्टेबल शहजाद भी गाड़ी से उतरकर भागा।

पलविंदर बेगमपुरा बाजार से बेगमपुरा मोहल्ले की गली में घुस गया। गली सुनसान होने के कारण दीपांशु गली के बाहर ही रुक गया। पीछे से शहजाद के आने पर दोनों ने फिर से शोर मचाते हुए पलविंदर के पीछे भागने लगे। 


शोर मचाने से गली में भीड़ जमा हो गई और पलविंदर को घेर लिया। पलविंदर ने बार बार शहजाद की पिस्टल छीनने का प्रयास किया। इस दौरान पलविंदर और दोनों सिपाहियों के बीच धक्का मुक्की तक हुई। इसी दौरान बेगमपुरा बाजार में व्यापारी वरुण सिंघल की सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल अरविंद भी वहां पहुंच गया। शहजाद ने अपनी पिस्टल अरविंद को देकर कहा कि असलाह लेकर दूर चले जाओ। इसी दौरान तीसरा कांस्टेबल रामपाल यादव भी वहां आ गया और तीनों ने मिलकर पलविंदर को नीचे गिरा दिया। 
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