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विश्व कैंसर दिवस: जिले में कैंसर की जांच न उपचार की सुविधा
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जिले में कैंसर की जांच न उपचार की सुविधा
शामली। जिले के कई गांवों में कैंसर से लोग पीड़ित हैं, जबकि कई लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। मगर जिले में जांच और उपचार की कोई सुविधा नहीं है। पीड़ितों को बाहर दूसरे शहरों में प्राइवेट में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि समय रहते इसकी पहचान होने पर पहली स्टेज में ही उपचार शुरू किया जा सके। जिले में कृष्णा नदी किनारे के गांवों में रहने वाले लोगों में कैंसर की बीमारी ज्यादा पाई गई है। इनमें जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदेनामाल, हसनपुर लुहारी, शामली क्षेत्र के गांव बहावड़ी व काबड़ौत आदि में कैंसर के मरीज है, जिनका दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड व हरियाणा आदि राज्यों में प्राइवेट में महंगा इलाज चल रहा है। पूर्व में इन गांवों में कैंसर से कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
चंदेनामाल गांव में चार-पांच लोग कैंसर से पीड़ित हैं। हसनपुर में करीब आठ लोग, बहावड़ी में करीब 12 लोग कैैंसर से पीड़ित हैं। गांव बहावड़ी के प्रधान प्रतिनिधि बंटी चौधरी ने बताया कि उनके गांव में कई लोग कैंसर से पीड़ित है।
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चौसाना क्षेत्र के गांव खोड़समा में कई लोगों की पूर्व में कैंसर से मौत हो चुकी है। इसके अलावा अन्य गांवों में भी कैंसर के मरीज मिल रहे हैं। जिले में जांच की सुविधा न होने पर कैंसर का पता देर से चलता है, तब तक मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने के कारण यहां पर न जांच की सुविधा है और न ही उपचार की व्यवस्था है। सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में कैंसर की जांच और उपचार की सुविधा नहीं है। अगर कोई मरीज जानकारी में आता है तो उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
लक्षण:
शरीर के किसी भी हिस्से पर ऊतकों में असामान्य रूप से गांठ बनना या उभार होना।
कोशिकाओं का असामान्य तौर पर वृद्धि करना।
---
रोकथाम के तरीके:
सिगरेट, शराब का सेवन कम करें।
ज्यादा तला भुना व चिकनाई युक्त भोजन का सेवन कम करें।
रोजाना व्यायाम करें ।
समय-समय पर जांच कराएं।
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शामली। जिले के कई गांवों में कैंसर से लोग पीड़ित हैं, जबकि कई लोगों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। मगर जिले में जांच और उपचार की कोई सुविधा नहीं है। पीड़ितों को बाहर दूसरे शहरों में प्राइवेट में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है, ताकि समय रहते इसकी पहचान होने पर पहली स्टेज में ही उपचार शुरू किया जा सके। जिले में कृष्णा नदी किनारे के गांवों में रहने वाले लोगों में कैंसर की बीमारी ज्यादा पाई गई है। इनमें जलालाबाद क्षेत्र के गांव चंदेनामाल, हसनपुर लुहारी, शामली क्षेत्र के गांव बहावड़ी व काबड़ौत आदि में कैंसर के मरीज है, जिनका दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड व हरियाणा आदि राज्यों में प्राइवेट में महंगा इलाज चल रहा है। पूर्व में इन गांवों में कैंसर से कई लोगों की मौत भी हो चुकी है।
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चंदेनामाल गांव में चार-पांच लोग कैंसर से पीड़ित हैं। हसनपुर में करीब आठ लोग, बहावड़ी में करीब 12 लोग कैैंसर से पीड़ित हैं। गांव बहावड़ी के प्रधान प्रतिनिधि बंटी चौधरी ने बताया कि उनके गांव में कई लोग कैंसर से पीड़ित है।
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चौसाना क्षेत्र के गांव खोड़समा में कई लोगों की पूर्व में कैंसर से मौत हो चुकी है। इसके अलावा अन्य गांवों में भी कैंसर के मरीज मिल रहे हैं। जिले में जांच की सुविधा न होने पर कैंसर का पता देर से चलता है, तब तक मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है।
जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं होने के कारण यहां पर न जांच की सुविधा है और न ही उपचार की व्यवस्था है। सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि जिला अस्पताल में कैंसर की जांच और उपचार की सुविधा नहीं है। अगर कोई मरीज जानकारी में आता है तो उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
लक्षण:
शरीर के किसी भी हिस्से पर ऊतकों में असामान्य रूप से गांठ बनना या उभार होना।
कोशिकाओं का असामान्य तौर पर वृद्धि करना।
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रोकथाम के तरीके:
सिगरेट, शराब का सेवन कम करें।
ज्यादा तला भुना व चिकनाई युक्त भोजन का सेवन कम करें।
रोजाना व्यायाम करें ।
समय-समय पर जांच कराएं।