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वैष्णव भक्तों के संग रहकर अंतरण हो जाता है शुद्घ

Wed, 27 Apr 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Apr 2022 11:48 PM IST
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By staying with Vaishnava devotees, transfer becomes pure: Tejashwi Das
शामली। गीता भागवत प्रचार समिति की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा अमृत प्रथम स्कंध कथा के तीसरे दिन कथा वाचक तेजस्वी दास ने कहा कि जैसे गंगा मैं जाकर सब पवित्र हो जाते हैं, वैसे ही वैष्णव भक्तों के संग में रहकर अंतरण शुद्ध हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि भगवान की बहुत जल्दी प्राप्त होती है। हमारे जीवन पाप पुण्य के कर्मों से चल रहा है। दुख का कारण पाप है। पुण्य का अर्थ पवित्रता है। दोनों साथ साथ चलते हैं। हम अपने पूर्व जन्मों के कारण ही अनेक योनियों में रहना पड़ता है। जो हमने पाप और पुण्य किए हैं, उसका ही फल हमें मिलता है। श्रीराम लखन सेवा समिति ने कथा में प्रसाद का सहयोग किया। इस अवसर पर भूपेंद्र मलिक, प्रवीण, सविता, राजपाल, राज शरण, विशाल, गीता, करुणा, रीता, नीरज, डॉ हरि निवास, सरिता आदि मौजूद रहे।
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