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Shamli News: बर्न यूनिट का भवन पर तैयार, कब खत्म होगा स्टाफ की नियुक्ति का इंतजार
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शामली जिला अस्पताल में बर्न यूनिट का भवन
- शासन से संसाधन व उपकरण मिले, सर्जन समेत चिकित्सक व स्टाफ की नहीं हुई नियुक्ति
- जिला अस्पताल में अलग से बने भवन के मुख्य द्वार पर लटका ताला
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संयुक्त चिकित्सालय में करीब ढ़ाई साल से अधिक समय से बर्न यूनिट का भवन बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ की नियुक्ति न होने से भवन के मुख्य द्वार पर ताला लटका है। शासन से उपकरण व संसाधन करीब एक साल पहले उपलब्ध हो चुके हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। बर्न यूनिट चालू न होने से मरीजों को मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है या फिर उन्हें प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर उपचार कराना पड़ता है।
पूर्वी यमुना नहर पर गांव मुंडेट के निकट जिला संयुक्त चिकित्सालय में अलग से छह बैड का बर्न यूनिट का भवन बना हुआ है। इस भवन के बनने के बाद करीब एक साल पहले शासन स्तर से मरीजों के उपचार के लिए स्किन ग्राफ मैसर, मल्टी पैरा मीटर, ईसीजी मशीन, सभी छह बैड पर आक्सीजन की सीधी आपूर्ति समेत लगभग सभी उपकरण व संसाधन उपलब्ध हो चुके हैं, लेकिन जले हुए मरीजों को उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी। इसकी वजह ये है कि शासन स्तर से सर्जन व चिकित्सकों समेत स्टाफ की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी। इस कारण से बर्न यूनिट का भवन बंद पड़ा हुआ है और उसके मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है।
बर्न यूनिट चालू न होने के कारण जले हुए मरीजों को मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है। या फिर मरीजों को प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर उपचार कराना पड़ता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बर्न युनिट के लिए सर्जन व अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए छह बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है।
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बर्न यूनिट में ये होती है सुविधाएं
बर्न यूनिट में जले हुए मरीजों के आइसोलेटेड बैड, स्पेशल टाॅयलेट, बाथरूम, किचन आदि की व्यवस्था होती है। पूरा वार्ड वातानुकूलित होता है। उपचार के लिए अलग से चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ होता है। पूरी बर्न यूनिट को आईसीयू की तरह बनाया जाता है। बर्न यूनिट का भवन इस तरह से तैयार होता है कि उसमें भर्ती मरीज को किसी तरह के संक्रमण न हो सके। यहां तक कि धूल मिट्टी भी मरीज तक न पहुंच सके।
कोट
बर्न यूनिट का भवन तैयार है और उपकरण भी उपलब्ध है। शासन स्तर से सर्जन व नर्सिंग स्टाफ की अभी नियुक्ति नहीं हुई है। स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्राचार किया गया है। - डॉ. अंजू जोधा, सीएमएस जिला अस्पताल।
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- जिला अस्पताल में अलग से बने भवन के मुख्य द्वार पर लटका ताला
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संयुक्त चिकित्सालय में करीब ढ़ाई साल से अधिक समय से बर्न यूनिट का भवन बनकर तैयार है, लेकिन स्टाफ की नियुक्ति न होने से भवन के मुख्य द्वार पर ताला लटका है। शासन से उपकरण व संसाधन करीब एक साल पहले उपलब्ध हो चुके हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला कोई नहीं है। बर्न यूनिट चालू न होने से मरीजों को मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है या फिर उन्हें प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर उपचार कराना पड़ता है।
पूर्वी यमुना नहर पर गांव मुंडेट के निकट जिला संयुक्त चिकित्सालय में अलग से छह बैड का बर्न यूनिट का भवन बना हुआ है। इस भवन के बनने के बाद करीब एक साल पहले शासन स्तर से मरीजों के उपचार के लिए स्किन ग्राफ मैसर, मल्टी पैरा मीटर, ईसीजी मशीन, सभी छह बैड पर आक्सीजन की सीधी आपूर्ति समेत लगभग सभी उपकरण व संसाधन उपलब्ध हो चुके हैं, लेकिन जले हुए मरीजों को उपचार की सुविधा शुरू नहीं हो सकी। इसकी वजह ये है कि शासन स्तर से सर्जन व चिकित्सकों समेत स्टाफ की नियुक्ति अभी तक नहीं हो सकी। इस कारण से बर्न यूनिट का भवन बंद पड़ा हुआ है और उसके मुख्य द्वार पर ताला लटका हुआ है।
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बर्न यूनिट चालू न होने के कारण जले हुए मरीजों को मेरठ या दिल्ली रेफर किया जाता है। या फिर मरीजों को प्राइवेट में महंगा शुल्क देकर उपचार कराना पड़ता है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि बर्न युनिट के लिए सर्जन व अन्य स्टाफ की नियुक्ति के लिए छह बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है।
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बर्न यूनिट में ये होती है सुविधाएं
बर्न यूनिट में जले हुए मरीजों के आइसोलेटेड बैड, स्पेशल टाॅयलेट, बाथरूम, किचन आदि की व्यवस्था होती है। पूरा वार्ड वातानुकूलित होता है। उपचार के लिए अलग से चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ होता है। पूरी बर्न यूनिट को आईसीयू की तरह बनाया जाता है। बर्न यूनिट का भवन इस तरह से तैयार होता है कि उसमें भर्ती मरीज को किसी तरह के संक्रमण न हो सके। यहां तक कि धूल मिट्टी भी मरीज तक न पहुंच सके।
कोट
बर्न यूनिट का भवन तैयार है और उपकरण भी उपलब्ध है। शासन स्तर से सर्जन व नर्सिंग स्टाफ की अभी नियुक्ति नहीं हुई है। स्टाफ की नियुक्ति के लिए शासन को कई बार पत्राचार किया गया है। - डॉ. अंजू जोधा, सीएमएस जिला अस्पताल।