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सांसों पर संकट: एक्यूआई लगातार 350 के पार

Sun, 14 Nov 2021 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 14 Nov 2021 12:33 AM IST
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Breathing crisis: AQI consistently crosses 350
शामली में छाया कोहरा - फोटो : SHAMLI
शामली। सर्दी बढ़ने के साथ ही जिले की आबोहवा बुरी तरह बिगड़ गई है। पिछले करीब एक सप्ताह से एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लगातार हवा का बहुत बुरा स्तर दर्शा रहा है। शनिवार को भी जिले का एक्यूआई 367 दर्ज किया गया। सुबह और शाम के समय धुंध के साथ प्रदूषण के कण मिलने से लोगों की सांस फूलने लगी है। सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। जिले में कोई सरकारी सांस व छाती रोग विशेषज्ञ न होने की वजह से निजी चिकित्सकों के यहां मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
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निजी चिकित्सकों के पास पहुंच रहे 600 मरीज
सर्दियों में सांस रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में कोई सांस और छाती रोग विशेषज्ञ नहीं है। जिससे गरीब लोगों को निजी चिकित्सकों के यहां उपचार कराना पड़ता है। इससे उनकी जेब पर अतिरिक्त खर्च पड़ रहा है। स्मॉग में नेत्र संबंधी बीमारियां भी बढ़ने लगती हैं। ऐसे में निजी चिकित्सकों के यहां मरीजों की संख्या बढ़ गई है। प्रतिदिन करीब 600 मरीज निजी चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं।
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इसलिए बढ़ रहा हवा में प्रदूषण
जिले में कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी हैं। हवा के साथ मिट्टी उड़ने से इसके कण वातावरण में घुल जाते हैं। उद्योगों और वाहनों के धुएं और फसलों का वेस्ट जलाने के कारण पार्टीकुलेट मेटर निकलते हैं, जो हवा में मिल जाते हैं। अमूमन हवा चलने और मौसम में कम नमी होने के कारण यह कण बह जाते हैं। इन दिनों हवा की गति पांच किमी प्रति घंटा है। धूल के कणों के साथ मिलकर इसकी एक लेयर वातावरण में बन जाती हैै। इस कारण सूरज की रोशनी भी पूरी नहीं आ पाती। ओस के साथ इसके कण नीचे आते हैं। इसलिए सुबह-सुबह बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है।
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दिल के मरीजों के लिए है खतरनाक
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज गर्ग ने बताया कि इन दिनों स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर बुखार भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह होते हैं। दिल के मरीजों के लिए भी यह काफी खतरनाक है।
ये सावधानियां बरतें
- सुबह- शाम टहलने से बचें, घरों की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें।
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें।
- बाहर से आने पर गुनगुने पानी से मुंह-आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें।
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और नियमित रूप से लें।
- दमा रोगी इन्हेलर का प्रयोग करें।
- अपने घर के आसपास पानी का छिड़काव करें।
इस माह जिले का एक्यूआई
1 नवंबर 210
2 नवंबर 212
3 नवंबर 221
4 नवंबर 235
5 नवंबर 275
6 नवंबर 308
7 नवंबर 278
8 नवंबर 365
9 नवंबर 380
10 नवंबर 350
11 नवंबर 352
12 नवंबर 360
13 नवंबर 367
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