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यूपीएससी में अर्पित ने पाई 239वीं रैंक, परिवार में छाई खुशी
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शामली सैंट आर सी कॉन्वेंट स्कूल में आईएएस में 239वीं रैंक प्राप्त करने वाले अर्पित संगल को सम्मान?
- फोटो : SHAMLI
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शामली। शहर के मोहल्ला तालाब रोड निवासी मूंगफली व्यापारी सुशील संगल के बेटे अर्पित संगल ने यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा-2020 के घोषित परिणाम में 239वीं रैंक पाई है। बेटे की कामयाबी पर परिवार में जश्न का माहौल है। माता-पिता समेत पूरे परिवार का कहना है कि उन्हें अर्पित पर गर्व है, जिसने परिवार के साथ अपने शहर और जिले का नाम रोशन किया है।
यूपीएससी-2020 की परीक्षा का परिणाम शुक्रवार शाम घोषित हुआ। इस परीक्षा परिणाम में शामली निवासी अर्पित संगल ने 239वीं रैंक प्राप्त कर परिवार व जिले का मान बढ़ाया है। पिता सुशील संगल का नई मंडी में मूंगफली का कारोबार है और मां कुमकुम गृहणी है। भाई शशांक बिजनेस करते हैं और पिता के कारोबार में सहयोग करते रहते हैं। छोटी बहन खुशी कक्षा नौ में पढ़ती है। अपने लाड़ले की कामयाबी पर परिवार में जश्न का माहौल है। अर्पित ने 2014 में इंटर की परीक्षा पास की थी। इसी साल उन्होंने आईआईटी एडवांस में 283वीं रैंक पाई और दिल्ली में चार साल तक बीटेक किया। बीटेक करते हुए तीसरे साल में उनका सैमसंग कंपनी में बैंगलोर में 22 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी मिली, लेकिन उन्होंने ज्वाइन न करते सिविल सर्विस की तैैयारी शुरू कर दी।
कुछ विषयों की कोचिंग ली और वेबसाइट की मदद ली। अधिकतर समय उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी की। अर्पित का कहना है कि तीसरे प्रयास में उन्हें यह सेफलता मिली है। इस कामयाबी में उन्हें माता-पिता व भाई का भरपूर सहयोग मिला। पिता सुशील का कहना है कि उन्हें बेटे की कामयाबी पर बड़ा अच्छा लग रहा है। मां कुमकुम खुशी से फूले नहीं समा रही है। शनिवार को उनके घर पर अर्पित को बधाई देने व मिठाई खिलाने वालों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
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हौसला और मेहनत के दम पर मिलती है कामयाबी
शामली। अर्पित संगल का युवाओं के लिए संदेश है कि अगर हौसला, आत्मविश्वास मजबूत हो और कुछ करने की सच्ची लगन हो तो सफलता अवश्य मिलती है। लक्ष्य निर्धारित कर उस पर डटे रहे। अगर कभी फेलियर का भी सामना करना पड़े तो निराश नहीं होना है और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डटे रहो। तैयारी करने से पहले यह समझे कि यूपीएससी उनसे क्या चाहती है। उन्होंने जब पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी तो उन्होंने यही देखा। दूसरी बार में उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और लगन के साथ पढ़ाई की। तीसरी बार में सफलता मिली। वह पहले दो प्रयास में असफल रहने के बाद भी निराश नहीं हुए। पहले प्री, फिर मेन्स और फिर इंटरव्यू तीनों परीक्षा पास की। इंटरव्यू को उन्होंने पर्सनली टेस्ट बताते हुए कहा कि इसमें आत्मविश्वास व ईमानदारी का अहम रोल होता है। उन्हें बैडमिंटन खेलना और शायरी सुनना पसंद है।
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आमजन और अधिकारियों के बीच की दूरी करेंगे खत्म
शामली। अर्पित संगल का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि आईपीएस कैडर मिलेगा। 22 लाख रुपये के सालाना पैकेज को छोड़ सिविल सर्विस की तरफ कदम बढ़ाने के बारे में उन्होंने कहा कि वहां पर काम करने का एक ही क्षेत्र होता। यहां पर गरीब, आम आदमी से लेकर वीआईपी, वीवीआईपी, सीएम, पीएम तक के संपर्क में रहने से सोच बदलेगी और आगे बढ़कर कुछ करने की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही लोगों की समस्याओं को दूर करने का मौका मिलेगा। आम जनता, गरीब लोग अधिकारियों से मिलने में झिझकते है। वह आम जनता और अधिकारियों के बीच का जो गैप है, उसे खत्म करेंगे।
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यूपीएससी-2020 की परीक्षा का परिणाम शुक्रवार शाम घोषित हुआ। इस परीक्षा परिणाम में शामली निवासी अर्पित संगल ने 239वीं रैंक प्राप्त कर परिवार व जिले का मान बढ़ाया है। पिता सुशील संगल का नई मंडी में मूंगफली का कारोबार है और मां कुमकुम गृहणी है। भाई शशांक बिजनेस करते हैं और पिता के कारोबार में सहयोग करते रहते हैं। छोटी बहन खुशी कक्षा नौ में पढ़ती है। अपने लाड़ले की कामयाबी पर परिवार में जश्न का माहौल है। अर्पित ने 2014 में इंटर की परीक्षा पास की थी। इसी साल उन्होंने आईआईटी एडवांस में 283वीं रैंक पाई और दिल्ली में चार साल तक बीटेक किया। बीटेक करते हुए तीसरे साल में उनका सैमसंग कंपनी में बैंगलोर में 22 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी मिली, लेकिन उन्होंने ज्वाइन न करते सिविल सर्विस की तैैयारी शुरू कर दी।
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कुछ विषयों की कोचिंग ली और वेबसाइट की मदद ली। अधिकतर समय उन्होंने घर पर रहकर सेल्फ स्टडी की। अर्पित का कहना है कि तीसरे प्रयास में उन्हें यह सेफलता मिली है। इस कामयाबी में उन्हें माता-पिता व भाई का भरपूर सहयोग मिला। पिता सुशील का कहना है कि उन्हें बेटे की कामयाबी पर बड़ा अच्छा लग रहा है। मां कुमकुम खुशी से फूले नहीं समा रही है। शनिवार को उनके घर पर अर्पित को बधाई देने व मिठाई खिलाने वालों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
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हौसला और मेहनत के दम पर मिलती है कामयाबी
शामली। अर्पित संगल का युवाओं के लिए संदेश है कि अगर हौसला, आत्मविश्वास मजबूत हो और कुछ करने की सच्ची लगन हो तो सफलता अवश्य मिलती है। लक्ष्य निर्धारित कर उस पर डटे रहे। अगर कभी फेलियर का भी सामना करना पड़े तो निराश नहीं होना है और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए डटे रहो। तैयारी करने से पहले यह समझे कि यूपीएससी उनसे क्या चाहती है। उन्होंने जब पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी तो उन्होंने यही देखा। दूसरी बार में उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और लगन के साथ पढ़ाई की। तीसरी बार में सफलता मिली। वह पहले दो प्रयास में असफल रहने के बाद भी निराश नहीं हुए। पहले प्री, फिर मेन्स और फिर इंटरव्यू तीनों परीक्षा पास की। इंटरव्यू को उन्होंने पर्सनली टेस्ट बताते हुए कहा कि इसमें आत्मविश्वास व ईमानदारी का अहम रोल होता है। उन्हें बैडमिंटन खेलना और शायरी सुनना पसंद है।
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आमजन और अधिकारियों के बीच की दूरी करेंगे खत्म
शामली। अर्पित संगल का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि आईपीएस कैडर मिलेगा। 22 लाख रुपये के सालाना पैकेज को छोड़ सिविल सर्विस की तरफ कदम बढ़ाने के बारे में उन्होंने कहा कि वहां पर काम करने का एक ही क्षेत्र होता। यहां पर गरीब, आम आदमी से लेकर वीआईपी, वीवीआईपी, सीएम, पीएम तक के संपर्क में रहने से सोच बदलेगी और आगे बढ़कर कुछ करने की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही लोगों की समस्याओं को दूर करने का मौका मिलेगा। आम जनता, गरीब लोग अधिकारियों से मिलने में झिझकते है। वह आम जनता और अधिकारियों के बीच का जो गैप है, उसे खत्म करेंगे।

शामली सैंट आर सी कॉन्वेंट स्कूल में आईएएस में 239वीं रैंक प्राप्त करने वाले अर्पित संगल को मिठाई ख- फोटो : SHAMLI