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चीनी मिलें दबाए बैठी हैं 342 करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Thu, 26 May 2016 12:30 AM IST
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चीनी मिल
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शामली में किसानों के पसीने की गाढ़ी कमाई लेकर भी चीनी मिल मालिक भुगतान करने में मनमानी बरत रहे हैं। जिले की तीनों चीनी मिलों पर इस सीजन का 342 करोड़ 63 लाख बकाया है।
गौरतलब है कि शामली जिले की ऊन, थानाभवन और शामली शुगर मिल पर 230 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 247 करोड़ 24 लाख रुपये तथा 280 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से 342 करोड़ 63 लाख रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान बकाया है।
राष्ट्रीय लोकदल ने किसानों की इसी पीड़ा को मुद्दा बनाते हुए शामली शुगर मिल पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का मन बनाया। इससे पूर्व भी रालोद के साथ ही भाकियू, भाजपा, कांग्रेस भी गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए अधिकारियों का घेराव कर चुके हैं।
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इतना ही नहीं जिलाधिकारी सुजीत कुमार के आदेश पर तीनों ही चीनी मिल मालिकों और प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। बावजूद इसके चीनी मिलों ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने में गंभीरता नहीं दिखाई। हालत यह है कि किसान को अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी के दौरान भी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है।
गांव फुगाना निवासी ओमेंद्र सिंह का कहना है कि इस सीजन में वह करीब साढ़े चार लाख रुपये का गन्ना शुगर मिल को दे चुके हैं, मगर उन्हें अब तक सिर्फ 26 हजार रुपये ही भुगतान प्राप्त हआ।
इसकी वजह से उनकी बीमा की पॉलिसी तक जमा नहीं हो पाई। इनके अलावा गांव लांक निवासी कैलाश, बहावड़ी निवासी सुरेश, भैंसवाल निवासी महेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार मिल अधिकारियों और गन्ना विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर गन्ना मूल्य भुगतान कराने की मांग की। उन्हें पारिवारिक कार्यों से पैसे की जरूरत है, लेकिन मिल ने भुगतान नहीं किया।
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गौरतलब है कि शामली जिले की ऊन, थानाभवन और शामली शुगर मिल पर 230 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से 247 करोड़ 24 लाख रुपये तथा 280 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से 342 करोड़ 63 लाख रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान बकाया है।
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राष्ट्रीय लोकदल ने किसानों की इसी पीड़ा को मुद्दा बनाते हुए शामली शुगर मिल पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का मन बनाया। इससे पूर्व भी रालोद के साथ ही भाकियू, भाजपा, कांग्रेस भी गन्ना मूल्य भुगतान कराने के लिए अधिकारियों का घेराव कर चुके हैं।
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इतना ही नहीं जिलाधिकारी सुजीत कुमार के आदेश पर तीनों ही चीनी मिल मालिकों और प्रबंधकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। बावजूद इसके चीनी मिलों ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने में गंभीरता नहीं दिखाई। हालत यह है कि किसान को अपने बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी के दौरान भी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है।
गांव फुगाना निवासी ओमेंद्र सिंह का कहना है कि इस सीजन में वह करीब साढ़े चार लाख रुपये का गन्ना शुगर मिल को दे चुके हैं, मगर उन्हें अब तक सिर्फ 26 हजार रुपये ही भुगतान प्राप्त हआ।
इसकी वजह से उनकी बीमा की पॉलिसी तक जमा नहीं हो पाई। इनके अलावा गांव लांक निवासी कैलाश, बहावड़ी निवासी सुरेश, भैंसवाल निवासी महेंद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार मिल अधिकारियों और गन्ना विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर गन्ना मूल्य भुगतान कराने की मांग की। उन्हें पारिवारिक कार्यों से पैसे की जरूरत है, लेकिन मिल ने भुगतान नहीं किया।