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Shamli News: घायलों को लगाए एंटी रैबीज के टीके
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फोटो
थानाभवन। पागल कुत्ते के हमले में घायल और टीकाकरण से छूटे लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नगर में पहुंचकर एंटी रैबीज के टीके लगाए। इस दौरान उन्होंने घायलों को दवा भी वितरित की।
नगर में शुक्रवार को एक पागल कुत्ते ने लगभग 15 से ज्यादा लोगों को काट लिया था, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। घायलों में से करीब पांच लोगों ने ही स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंच कर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लिए थे। चार लोगों ने शनिवार को सीएचसी पहुंचकर इंजेक्शन लगवाए। बाकी लोग सीएचसी नहीं पहुंच सके थे, जिस पर सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक नवजीत बेदी ने नगर के बालाजी धाम मंदिर में टीम के साथ पहुंचकर घायलों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि सामान्य तौर पर कुत्ते के काटने पर स्वास्थ्य विभाग टिटनेस व एआरवी का इंजेक्शन लगाता है। अगर कुत्ता पागल हों या मर गया हो तो उस स्थिति में घायल को रैबीज इमूनो ग्लोबिन इंजेक्शन काटे हुए स्थान पर लगाया जाता है। यह इंजेक्शन न लगवाने की दशा में घायल को रैबीज बीमारी होने से उसकी जान को खतरा बन जाता है। यह इंजेक्शन स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध नहीं है, इंजेक्शन को मेडिकल स्टोर से खरीद कर ही लगवाया जा सकता है। जो एक सप्ताह के भीतर लगवाना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने पर सबसे पहले चलते पानी में 10 से 15 मिनट घाव को धोना चाहिए। इससे कुत्ते के काटने का असर बहुत हद तक कम हो जाता है। घाव को साबुन आदि से धोया जा सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगभग आठ लोगों को टिटनेस व एआरवी का इंजेक्शन लगाए। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डाॅ. विक्रम सिंह, फार्मासिस्ट रजनीश कुमार, कमल सैनी आदि मौजूद रहे।
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थानाभवन। पागल कुत्ते के हमले में घायल और टीकाकरण से छूटे लोगों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नगर में पहुंचकर एंटी रैबीज के टीके लगाए। इस दौरान उन्होंने घायलों को दवा भी वितरित की।
नगर में शुक्रवार को एक पागल कुत्ते ने लगभग 15 से ज्यादा लोगों को काट लिया था, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। घायलों में से करीब पांच लोगों ने ही स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंच कर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लिए थे। चार लोगों ने शनिवार को सीएचसी पहुंचकर इंजेक्शन लगवाए। बाकी लोग सीएचसी नहीं पहुंच सके थे, जिस पर सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक नवजीत बेदी ने नगर के बालाजी धाम मंदिर में टीम के साथ पहुंचकर घायलों को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए। चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि सामान्य तौर पर कुत्ते के काटने पर स्वास्थ्य विभाग टिटनेस व एआरवी का इंजेक्शन लगाता है। अगर कुत्ता पागल हों या मर गया हो तो उस स्थिति में घायल को रैबीज इमूनो ग्लोबिन इंजेक्शन काटे हुए स्थान पर लगाया जाता है। यह इंजेक्शन न लगवाने की दशा में घायल को रैबीज बीमारी होने से उसकी जान को खतरा बन जाता है। यह इंजेक्शन स्वास्थ्य केंद्र पर उपलब्ध नहीं है, इंजेक्शन को मेडिकल स्टोर से खरीद कर ही लगवाया जा सकता है। जो एक सप्ताह के भीतर लगवाना अति आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने पर सबसे पहले चलते पानी में 10 से 15 मिनट घाव को धोना चाहिए। इससे कुत्ते के काटने का असर बहुत हद तक कम हो जाता है। घाव को साबुन आदि से धोया जा सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगभग आठ लोगों को टिटनेस व एआरवी का इंजेक्शन लगाए। स्वास्थ्य विभाग की टीम में डाॅ. विक्रम सिंह, फार्मासिस्ट रजनीश कुमार, कमल सैनी आदि मौजूद रहे।
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