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...और आंखों से आंसू छलक पडे़
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 05 Nov 2015 12:44 AM IST
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शामली। जिला मुख्यालय की भूमि में रास्ता बनता देख गोहरनी-रामगढ़ गांव की महिलाओं और लोगों की आंखों से आंसू छलक उठे। महिलाओं ने रोते हुए कहा कि साहब जमीन से पेट पल रहा है, अब हम कहां जाएंगे।
जिला मुख्यालय की भूमि पर खेती करने वाली गोहरनी-रामगढ की रेखा, रामकली के सामने ही ईख की फसल को काटते हुए ट्रैक्टर चलाकर रास्ता बनाया जा रहा था। उनकी आंखों के आंसू रुक नही पाए, वह बोली साहब, हम तो उजड़ गए।
जमीन के साथ ही हमारा तो रोजगार भी चला गया। जमीन के बदले में रोजगार मिल जाए तो हमारी रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाएगा। प्रेमवती, रामवती, केला, बधेव की मुनेश देवी को मलाल था कि प्रशासन ने उन्हें रास्ता खुलवाने के लिए नोटिस तक नहीं दिया।
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ग्रामीण शंकर, रामप्रसाद, जीतराम, सतेंद्र, आनंद, गीता का कहना है कि वह मुआवजा, नौकरी के लिए डीएम कैंप में समस्याएं उठाते रहे हैं। हर बार जिला प्रशासन यह कहकर नकार देता है कि जमीन हमारी थी, हमने खाली कराली है। अब तुम्हारा कुछ भी नही है। प्रशासन अगर उन्हें बदले में नौकरी और थोड़ा सा मुआवजा दे तो उनकी जिंदगी संवर जाएगी।
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जिला मुख्यालय की भूमि पर खेती करने वाली गोहरनी-रामगढ की रेखा, रामकली के सामने ही ईख की फसल को काटते हुए ट्रैक्टर चलाकर रास्ता बनाया जा रहा था। उनकी आंखों के आंसू रुक नही पाए, वह बोली साहब, हम तो उजड़ गए।
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जमीन के साथ ही हमारा तो रोजगार भी चला गया। जमीन के बदले में रोजगार मिल जाए तो हमारी रोजी-रोटी का जुगाड़ हो जाएगा। प्रेमवती, रामवती, केला, बधेव की मुनेश देवी को मलाल था कि प्रशासन ने उन्हें रास्ता खुलवाने के लिए नोटिस तक नहीं दिया।
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ग्रामीण शंकर, रामप्रसाद, जीतराम, सतेंद्र, आनंद, गीता का कहना है कि वह मुआवजा, नौकरी के लिए डीएम कैंप में समस्याएं उठाते रहे हैं। हर बार जिला प्रशासन यह कहकर नकार देता है कि जमीन हमारी थी, हमने खाली कराली है। अब तुम्हारा कुछ भी नही है। प्रशासन अगर उन्हें बदले में नौकरी और थोड़ा सा मुआवजा दे तो उनकी जिंदगी संवर जाएगी।