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Shamli News: वीआईपी नंबर के बाद अब बीएच सीरीज के नंबरों का जनपद में बढ़ा क्रेज
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शामली। वाहनों के लिए वीआईपी नंबरों के बाद अब बीएच यानी भारत सीरीज के नंबर का चलन बढ़ने लगा है। इस सीरीज का नंबर लेने में लोग दिलचस्पी ले रहे हैं। परिवहन विभाग में लगातार लोग इसके लिए पंजीकरण करा रहे हैं।
परिवहन विभाग ने वीआईपी नंबरों को चार श्रेणियों में रखा है। पहली श्रेणी में एक लाख रुपये, दूसरी श्रेणी में 50 हजार रुपये, तीसरी श्रेणी में 25 हजार रुपये और चौथी श्रेणी में वीआईपी नंबर लेने के लिए कम से कम 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने होते हैं। इसमें ज्यादातर लोग लग्जरी कारें और महंगी बाइकों के नंबर फैशन में आकर्षक लेते हैं, जिसको लेकर काफी ज्यादा क्रेज लोगों में रहता है। अब धीरे-धीरे लोगों का रुझान बीएच सीरीज के नंबरों की और बढ़ रहा है। बीएच सीरीज के नंबर ज्यादा आकर्षक होने के साथ पूरे भारत में कहीं भी वाहन चलाने की छूट होती है। इस वजह से लोग इन नंबरों को अपना रहे हैं। 2021 की अगर बात की जाए तो केवल दो व्यक्तियों ने इस सीरीज के लिए पंजीकरण कराया था। इसके बाद धीरे-धीरे संख्या बढ़ रही है। 2022 में दस लोगों ने बीएच सीरीज नंबर लिया, उसके बाद तो जनपद में इसका बहुत ही ज्यादा क्रेज बढ़ गया। सितंबर 2024 तक जनपद के 129 लोग अपने वाहनों के बीएच सीरीज वाले नंबर के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।
-बीएच श्रेणी में पंजीकरण के क्या हैं फायदे
अगर किसी वाहन का पंजीकरण राज्य स्तर की श्रेणी में कराया जाता है तो वाहन स्वामी को एक मुश्त वाहन की कुल कीमत का 10 प्रतिशत वन टाइम टैक्स पड़ता है। इसी वाहन को अगर दूसरे राज्य मेंं ट्रांसफर कराया जाता है तो वहां भी वन टाइम टैक्स फिर से अदा करना होता है। दूसरी ओर बीएच सीरीज में पंजीकरण पर सिर्फ एक बार वन टाइम टैक्स देना होता है, अगर किसी दूसरे राज्य में वाहन का पंजीकरण ट्रांसफर कराया जाता है तो फिर से टैक्स नहीं देना होता है।
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-अधिकतर आर्मी वाले और अधिकारी ले रहे हैं बीएच की सीरीज
शामली के रहने वाले रोहित ने बताया कि उसका भाई आर्मी में है और कुड़ाना के रहने वाले देशपाल ने बताया कि उसका बेटा नेवी में है, उनके हर तीन वर्ष बाद तबादले होते रहते है, जिस कारण उन्होंने गाड़ी का बीएच सीरीज का नंबर लिया है। उन्होंने बताया कि इसके कई फायदे हैं। अगर नई गाड़ी का नंबर जनपद का लें तो उसमें लाखों रुपये जाते है, जिसमें 10 प्रतिशत टैक्स देना होता है, लेकिन बीएच सीरीज में टैक्स तो 12 प्रतिशत देना पड़ता है, पर नंबर लेते समय केवल 25 हजार रुपये देने पड़ते है और उसके बाद हर दो साल बाद टैक्स के रुप में 20-20 हजार रुपये देने होते हैं। जिससे भार कम पड़ता है और आगे ट्रांसफर कराने में बार-बार टैक्स नहीं देना पड़ता है।
-इन्होंने कहा
वीआईपी नंबर और बीएच सीरीज का अपना अलग महत्व है। अब धीरे-धीरे बीएच सीरीज के नंबरों के पंजीकरण भी जनपद में बढ़ रहे हैं। यह नंबर ऐसे लोगों के लिए होते हैं, जिनका ट्रांसफर पूरे भारत में होता है ताकि उनको असुविधा न हो सकें।- रोहित राजपूत, एआरटीओ शामली
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परिवहन विभाग ने वीआईपी नंबरों को चार श्रेणियों में रखा है। पहली श्रेणी में एक लाख रुपये, दूसरी श्रेणी में 50 हजार रुपये, तीसरी श्रेणी में 25 हजार रुपये और चौथी श्रेणी में वीआईपी नंबर लेने के लिए कम से कम 15 हजार रुपये अतिरिक्त देने होते हैं। इसमें ज्यादातर लोग लग्जरी कारें और महंगी बाइकों के नंबर फैशन में आकर्षक लेते हैं, जिसको लेकर काफी ज्यादा क्रेज लोगों में रहता है। अब धीरे-धीरे लोगों का रुझान बीएच सीरीज के नंबरों की और बढ़ रहा है। बीएच सीरीज के नंबर ज्यादा आकर्षक होने के साथ पूरे भारत में कहीं भी वाहन चलाने की छूट होती है। इस वजह से लोग इन नंबरों को अपना रहे हैं। 2021 की अगर बात की जाए तो केवल दो व्यक्तियों ने इस सीरीज के लिए पंजीकरण कराया था। इसके बाद धीरे-धीरे संख्या बढ़ रही है। 2022 में दस लोगों ने बीएच सीरीज नंबर लिया, उसके बाद तो जनपद में इसका बहुत ही ज्यादा क्रेज बढ़ गया। सितंबर 2024 तक जनपद के 129 लोग अपने वाहनों के बीएच सीरीज वाले नंबर के लिए पंजीकरण करा चुके हैं।
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-बीएच श्रेणी में पंजीकरण के क्या हैं फायदे
अगर किसी वाहन का पंजीकरण राज्य स्तर की श्रेणी में कराया जाता है तो वाहन स्वामी को एक मुश्त वाहन की कुल कीमत का 10 प्रतिशत वन टाइम टैक्स पड़ता है। इसी वाहन को अगर दूसरे राज्य मेंं ट्रांसफर कराया जाता है तो वहां भी वन टाइम टैक्स फिर से अदा करना होता है। दूसरी ओर बीएच सीरीज में पंजीकरण पर सिर्फ एक बार वन टाइम टैक्स देना होता है, अगर किसी दूसरे राज्य में वाहन का पंजीकरण ट्रांसफर कराया जाता है तो फिर से टैक्स नहीं देना होता है।
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-अधिकतर आर्मी वाले और अधिकारी ले रहे हैं बीएच की सीरीज
शामली के रहने वाले रोहित ने बताया कि उसका भाई आर्मी में है और कुड़ाना के रहने वाले देशपाल ने बताया कि उसका बेटा नेवी में है, उनके हर तीन वर्ष बाद तबादले होते रहते है, जिस कारण उन्होंने गाड़ी का बीएच सीरीज का नंबर लिया है। उन्होंने बताया कि इसके कई फायदे हैं। अगर नई गाड़ी का नंबर जनपद का लें तो उसमें लाखों रुपये जाते है, जिसमें 10 प्रतिशत टैक्स देना होता है, लेकिन बीएच सीरीज में टैक्स तो 12 प्रतिशत देना पड़ता है, पर नंबर लेते समय केवल 25 हजार रुपये देने पड़ते है और उसके बाद हर दो साल बाद टैक्स के रुप में 20-20 हजार रुपये देने होते हैं। जिससे भार कम पड़ता है और आगे ट्रांसफर कराने में बार-बार टैक्स नहीं देना पड़ता है।
-इन्होंने कहा
वीआईपी नंबर और बीएच सीरीज का अपना अलग महत्व है। अब धीरे-धीरे बीएच सीरीज के नंबरों के पंजीकरण भी जनपद में बढ़ रहे हैं। यह नंबर ऐसे लोगों के लिए होते हैं, जिनका ट्रांसफर पूरे भारत में होता है ताकि उनको असुविधा न हो सकें।- रोहित राजपूत, एआरटीओ शामली