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Shamli News: आठ साल से कर रहे पैरवी...फिर भी शासन से मिले सिर्फ तीन करोड़र
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शामली में पूर्वी यमुाना नहर किनारस्थित विकास भवन। संवाद
शामली। विकास भवन के दूसरी मंजिल के भवन निर्माण के लिए आठ साल से लगातार बजट मांगा जा रहा है। कई बार प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया। आठ साल की पैरवी के बाद अब शासन से नाममात्र का बजट जारी किया है। शासन ने 23.40 करोड़ के प्रस्ताव से केवल तीन करोड़ रुपये जारी किए हैं। राजकीय निर्माण निगम जल्दी विकास भवन का निर्माण शुरु करेगी।
वर्ष 2015 में विकास भवन निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 10 करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। धनराशि जारी होने पर दो साल में राजकीय निर्माण निगम ने वर्ष 2017 में एक मंजिला विकास भवन का निर्माण कार्य पूरा कर दिया था। नवीन विकास भवन की दूसरी मंजिल के निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम आठ साल से लगातार अवशेष धनराशि की मांग कर रहा है। इसके लिए री-एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जा रहा था।
धनराशि जारी न होने से विकास भवन की दूसरी मंजिल की लागत बढ़ती गई, लेकिन शासन से धनराशि अवमुक्त नहीं हो रही थी। डेढ़ साल पहले सीडीओ विनय तिवारी ने विकास भवन की पत्रावली निकलवाकर पूरे मामले का अध्ययन करते हुए शासन में पैरवी शुरु की थी। ग्राम विकास आयुक्त और शासन ने आपत्तियों का निस्तारण करते हुए री एस्टीमेट की मांग की थी।
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सोमवार को शासन से विकास भवन की दूसरी मंंजिल के निर्माण की कुल लागत 23 करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि में से तीन करोड़ रुपये की धनराशि राजकीय निर्माण निगम के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। सीडीओ विनय तिवारी ने बताया कि तीन करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है। जल्दी ही विकास भवन की दूसरी मंजिल का निर्माण शुरु हो जाएगा।
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वर्ष 2015 में विकास भवन निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश शासन से 10 करोड़ 95 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। धनराशि जारी होने पर दो साल में राजकीय निर्माण निगम ने वर्ष 2017 में एक मंजिला विकास भवन का निर्माण कार्य पूरा कर दिया था। नवीन विकास भवन की दूसरी मंजिल के निर्माण के लिए राजकीय निर्माण निगम आठ साल से लगातार अवशेष धनराशि की मांग कर रहा है। इसके लिए री-एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जा रहा था।
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धनराशि जारी न होने से विकास भवन की दूसरी मंजिल की लागत बढ़ती गई, लेकिन शासन से धनराशि अवमुक्त नहीं हो रही थी। डेढ़ साल पहले सीडीओ विनय तिवारी ने विकास भवन की पत्रावली निकलवाकर पूरे मामले का अध्ययन करते हुए शासन में पैरवी शुरु की थी। ग्राम विकास आयुक्त और शासन ने आपत्तियों का निस्तारण करते हुए री एस्टीमेट की मांग की थी।
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सोमवार को शासन से विकास भवन की दूसरी मंंजिल के निर्माण की कुल लागत 23 करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि में से तीन करोड़ रुपये की धनराशि राजकीय निर्माण निगम के खाते में हस्तांतरित कर दी गई है। सीडीओ विनय तिवारी ने बताया कि तीन करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है। जल्दी ही विकास भवन की दूसरी मंजिल का निर्माण शुरु हो जाएगा।