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आज होगी पार्टियों के बूथ प्रबंधन की परीक्षा
Updated Sun, 27 May 2018 11:48 PM IST
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पार्टियों के बूथ प्रबंधन की परीक्षा आज
शामली। पिछले करीब एक महीने से राजनीतिक दल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने की कवायद में लगे थे। किस पार्टी का बूथ प्रबंधन मजबूत रहा, उसकी परीक्षा आज (सोमवार) को मतदान के रूप में सामने आ जाएगी।
कैराना लोकसभा उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए ही भारतीय जनता पार्टी ने संगठन की पूरी ताकत चुनाव अभियान में लगाकर रखी। पन्ना प्रमुख भी बनाए गए, ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पकड़ बनाकर मतदान के लिए प्रेरित किया जा सके। इसके अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत सहित कई जिलों से संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को भी बुलाया गया था। भाजपा का पूरा फोकस बूथ प्रबंधन पर ही रहा, ताकि मतदान प्रतिशत बढाने में कामयाबी मिल सके। उधर, विपक्षी गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी, रालोद और कांग्रेस नेताओं ने भी बूथ प्रबंधन की मजबूती के लिए खूब प्रयास किया। बैठकों के दौरान कार्यकर्ताओं को यही पाठ पढ़ाया गया कि बूथ स्तर पर मतदाताओं में पकड़ बनाई जाए। इसी तरह गांव स्तर पर भी कार्यकर्ताओं की टीमें इसी कार्य के लिए लगाई गईं। राजनीतिक दलों द्वारा की गई इस कवायद ने कितना असर दिखाया, उसकी असली परीक्षा सोमवार को मतदान के रूप में सामने आएगी। किस मतदेय बूथ पर कितना प्रतिशत मतदान हुआ, उसकी समीक्षा से पता चलेगा कि कौन अपनी रणनीति में सफल रहा।
मतदान का प्रतिशत तय करेगा हार जीत
शामली। कैराना लोकसभा सीट के लिए 2014 में जब चुनाव हुआ था, तो मतदान प्रतिशत 73.08 प्रतिशत रहा था। उसमें से भाजपा प्रत्याशी को 50.54 प्रतिशत, सपा प्रत्याशी को 29.49 प्रतिशत, बसपा प्रत्याशी को 14.33 प्रतिशत और रालोद प्रत्याशी को 3.81 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी मतदान प्रतिशत पर ही चुनाव परिणाम टिका हुआ है। यदि मतदान प्रतिशत कम होता है, तो हार जीत का अंतर भी कम हो जाएगा। मतदान का कम प्रतिशत होने की दशा में हार जीत का अनुमान लगाना भी मुश्किल है।
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परेशान कर सकता है मौसम का मिजाज
शामली। मौसम का मिजाज लगातार गरम बना हुआ है। रविवार को भी अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बीते चार दिन में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। यदि मतदान के दौरान भी मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा, तो मतदाताओं के सामने मुश्किल भी हो जाएगी। क्योंकि अधिकांश मतदान केंद्र स्कूलों में बनाए गए हैं। वहां मतदेय स्थल तो कमरे में हैं, लेकिन मतदाताओं को कमरे के बाहर तक लाइन में लगना पड़ता है। ऐसे में भीषण गर्मी के बीच मतदाताओं को मतदान के लिए लाइन में लगना काफी भारी होगा। इससे मतदान का प्रतिशत कम भी रह सकता है।
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शामली। पिछले करीब एक महीने से राजनीतिक दल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने की कवायद में लगे थे। किस पार्टी का बूथ प्रबंधन मजबूत रहा, उसकी परीक्षा आज (सोमवार) को मतदान के रूप में सामने आ जाएगी।
कैराना लोकसभा उपचुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए ही भारतीय जनता पार्टी ने संगठन की पूरी ताकत चुनाव अभियान में लगाकर रखी। पन्ना प्रमुख भी बनाए गए, ताकि ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पकड़ बनाकर मतदान के लिए प्रेरित किया जा सके। इसके अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत सहित कई जिलों से संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को भी बुलाया गया था। भाजपा का पूरा फोकस बूथ प्रबंधन पर ही रहा, ताकि मतदान प्रतिशत बढाने में कामयाबी मिल सके। उधर, विपक्षी गठबंधन की तरफ से समाजवादी पार्टी, रालोद और कांग्रेस नेताओं ने भी बूथ प्रबंधन की मजबूती के लिए खूब प्रयास किया। बैठकों के दौरान कार्यकर्ताओं को यही पाठ पढ़ाया गया कि बूथ स्तर पर मतदाताओं में पकड़ बनाई जाए। इसी तरह गांव स्तर पर भी कार्यकर्ताओं की टीमें इसी कार्य के लिए लगाई गईं। राजनीतिक दलों द्वारा की गई इस कवायद ने कितना असर दिखाया, उसकी असली परीक्षा सोमवार को मतदान के रूप में सामने आएगी। किस मतदेय बूथ पर कितना प्रतिशत मतदान हुआ, उसकी समीक्षा से पता चलेगा कि कौन अपनी रणनीति में सफल रहा।
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मतदान का प्रतिशत तय करेगा हार जीत
शामली। कैराना लोकसभा सीट के लिए 2014 में जब चुनाव हुआ था, तो मतदान प्रतिशत 73.08 प्रतिशत रहा था। उसमें से भाजपा प्रत्याशी को 50.54 प्रतिशत, सपा प्रत्याशी को 29.49 प्रतिशत, बसपा प्रत्याशी को 14.33 प्रतिशत और रालोद प्रत्याशी को 3.81 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे। अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी मतदान प्रतिशत पर ही चुनाव परिणाम टिका हुआ है। यदि मतदान प्रतिशत कम होता है, तो हार जीत का अंतर भी कम हो जाएगा। मतदान का कम प्रतिशत होने की दशा में हार जीत का अनुमान लगाना भी मुश्किल है।
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परेशान कर सकता है मौसम का मिजाज
शामली। मौसम का मिजाज लगातार गरम बना हुआ है। रविवार को भी अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बीते चार दिन में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। यदि मतदान के दौरान भी मौसम का मिजाज ऐसा ही रहा, तो मतदाताओं के सामने मुश्किल भी हो जाएगी। क्योंकि अधिकांश मतदान केंद्र स्कूलों में बनाए गए हैं। वहां मतदेय स्थल तो कमरे में हैं, लेकिन मतदाताओं को कमरे के बाहर तक लाइन में लगना पड़ता है। ऐसे में भीषण गर्मी के बीच मतदाताओं को मतदान के लिए लाइन में लगना काफी भारी होगा। इससे मतदान का प्रतिशत कम भी रह सकता है।