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इतिहास एवं कल्पना के आईने में पद्मावती
Updated Tue, 19 Dec 2017 11:34 PM IST
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कैराना (शामली)। विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्यिक परिषद के तत्वावधान में हिंदी विभाग द्वारा वाद-विवाद संवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
समकालीन एवं चर्चित ‘‘इतिहास एवं कल्पना के आइने में पद्मावती’’ विषय पर परिचर्चा की शुरूआत करते हुए डाक्टर चमन लाल ने कहा कि हमारा समाज इतिहास एवं कल्पना का ही सम्मिलित रूप है, हमारी परंपरा, मूल्य एवं संस्कृति के विकास एवं परिमार्जन में दोनो की भूमिका महत्वपूर्ण है। महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक डॉक्टर हरेंद्र सिंह ने कहा कि आज हमारे समाज में इतिहास को कला की स्वतंत्रता के नाम पर तत्कालीन फायदे के लिए विखंडित करने का प्रयास हो रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि कल्पना एवं इतिहास को एक-दूसरे से अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि कोई भी इतिहास कल्पनारहित नहीं हो सकता। मुख्यशास्ता डाक्टर अजय बाबू शर्मा ने बताया कि सौंदर्य वास्तव में एक प्राकृतिक अनुशासन है और यही जीवन की सुंदरता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर रमेश यादव ने कहा कि हमारा इतिहास ही एकपक्षीय है, जिस इतिहास पर हम गर्व करते है उसमें बहुत से नकारात्मक बातें है, जिनका उद्घाटन जरूरी है।
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कैराना (शामली)। विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में साहित्यिक परिषद के तत्वावधान में हिंदी विभाग द्वारा वाद-विवाद संवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
समकालीन एवं चर्चित ‘‘इतिहास एवं कल्पना के आइने में पद्मावती’’ विषय पर परिचर्चा की शुरूआत करते हुए डाक्टर चमन लाल ने कहा कि हमारा समाज इतिहास एवं कल्पना का ही सम्मिलित रूप है, हमारी परंपरा, मूल्य एवं संस्कृति के विकास एवं परिमार्जन में दोनो की भूमिका महत्वपूर्ण है। महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक डॉक्टर हरेंद्र सिंह ने कहा कि आज हमारे समाज में इतिहास को कला की स्वतंत्रता के नाम पर तत्कालीन फायदे के लिए विखंडित करने का प्रयास हो रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि कल्पना एवं इतिहास को एक-दूसरे से अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि कोई भी इतिहास कल्पनारहित नहीं हो सकता। मुख्यशास्ता डाक्टर अजय बाबू शर्मा ने बताया कि सौंदर्य वास्तव में एक प्राकृतिक अनुशासन है और यही जीवन की सुंदरता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉक्टर रमेश यादव ने कहा कि हमारा इतिहास ही एकपक्षीय है, जिस इतिहास पर हम गर्व करते है उसमें बहुत से नकारात्मक बातें है, जिनका उद्घाटन जरूरी है।
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