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कस्तूरबा विद्यालयों में नहीं है महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:04 AM IST
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शामली।
आज के समय में गणित और अंग्रेजी विषय की अहम भूमिका है। मगर जनपद के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की छात्राएं ऐसे विषयों की तामील हासिल करने से महरूम हैं।
जनपद के चारों आवासीय विद्यालयों में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषय के शिक्षक ही नहीं हैं। हालात यह है कि दोनों ही विषय अन्य विषय के शिक्षकों से पढ़वाएं जा रहे हैं। जिस कारण ऐसे महत्वपूर्ण विषयों में ही छात्राएं कमजोर हो रही है। जिससे आगे चलकर इनको काफी दिक्कतें आती हैं और ऐसे विषयों को वह कठिन मानने लगती है। जिसके बाद उनका गणित, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों में रुचि खत्म हो जाती है।
कहां कितने शिक्षकों के पद हैं खाली
शामली बनत स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में गणित का पद पिछले चार साल से खाली हैं। कांधला क्षेत्र के गांव भभीसा स्थित विद्यालय में गणित और ऊन क्षेत्र के विद्यालय में अंग्रेजी का शिक्षक का पद खाली चल रहा है। कैैैराना कस्तूरबा विद्यालय में तीन पद खाली है। जिसमें विज्ञान, कंप्यूटर और आर्ट एंड क्राफ्ट के पार्ट टाइम पद खाली चल रहे हैं।
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कैसे चलाया जा है काम
कस्तूरबा गांधी बनत वार्डन रश्मि, कांधला की वार्डन प्रतिभा व ऊन की वार्डन सुमन व कैैराना में रेनू गुप्ता ने बताया कि गणित और अंग्रेजी, विज्ञान, कंप्यूटर का शिक्षक न होने की समस्या तो काफी है। कई वर्षों से बच्चों को विज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाओं से काम चलाया जा रहा है। तीनों विद्यालयों में 250 छात्राएं पढ़ती हैं।
निरीक्षण के समय में खुलती है पोल
बिना विषय विशेषज्ञ शिक्षक के छात्राओं की पढ़ाई का स्तर कैसा हो सकता है इसकी पोल अधिकारियों के निरीक्षण में खुल जाती है। पूर्व में डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बनत स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने छात्राओं से ज्यादातर गणित के सूत्र व प्रश्न पूछे थे। जिसमें ज्यादातर सभी कक्षाओं की छात्राएं फेल नजर आई थी।
वर्जन
कई वर्षों से खाली पदों के लिए विज्ञापन निकलवा रहे हैं। इस वर्ष भी गणित और अंग्रेजी व विज्ञान विषय के लिए विज्ञापन निकलवाया गया था, जिसमें कांधला में विज्ञान का पद तो भर दिया गया है। लेकिन गणित में और अंग्रेजी में पद के लिए किसी ने आवेदन ही नहीं किया। जिस कारण पद खाली रह गए। पद पार्ट टाइम होने से भरने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि पार्ट टाइम में केवल पांच हजार रुपये ही मानदेय मिलता है।
- बीएसएस, चंद्रशेखर शामली
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आज के समय में गणित और अंग्रेजी विषय की अहम भूमिका है। मगर जनपद के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की छात्राएं ऐसे विषयों की तामील हासिल करने से महरूम हैं।
जनपद के चारों आवासीय विद्यालयों में गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषय के शिक्षक ही नहीं हैं। हालात यह है कि दोनों ही विषय अन्य विषय के शिक्षकों से पढ़वाएं जा रहे हैं। जिस कारण ऐसे महत्वपूर्ण विषयों में ही छात्राएं कमजोर हो रही है। जिससे आगे चलकर इनको काफी दिक्कतें आती हैं और ऐसे विषयों को वह कठिन मानने लगती है। जिसके बाद उनका गणित, अंग्रेजी, विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों में रुचि खत्म हो जाती है।
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कहां कितने शिक्षकों के पद हैं खाली
शामली बनत स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय में गणित का पद पिछले चार साल से खाली हैं। कांधला क्षेत्र के गांव भभीसा स्थित विद्यालय में गणित और ऊन क्षेत्र के विद्यालय में अंग्रेजी का शिक्षक का पद खाली चल रहा है। कैैैराना कस्तूरबा विद्यालय में तीन पद खाली है। जिसमें विज्ञान, कंप्यूटर और आर्ट एंड क्राफ्ट के पार्ट टाइम पद खाली चल रहे हैं।
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कैसे चलाया जा है काम
कस्तूरबा गांधी बनत वार्डन रश्मि, कांधला की वार्डन प्रतिभा व ऊन की वार्डन सुमन व कैैराना में रेनू गुप्ता ने बताया कि गणित और अंग्रेजी, विज्ञान, कंप्यूटर का शिक्षक न होने की समस्या तो काफी है। कई वर्षों से बच्चों को विज्ञान विषय पढ़ाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाओं से काम चलाया जा रहा है। तीनों विद्यालयों में 250 छात्राएं पढ़ती हैं।
निरीक्षण के समय में खुलती है पोल
बिना विषय विशेषज्ञ शिक्षक के छात्राओं की पढ़ाई का स्तर कैसा हो सकता है इसकी पोल अधिकारियों के निरीक्षण में खुल जाती है। पूर्व में डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने बनत स्थित कस्तूरबा गांधी विद्यालय का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने छात्राओं से ज्यादातर गणित के सूत्र व प्रश्न पूछे थे। जिसमें ज्यादातर सभी कक्षाओं की छात्राएं फेल नजर आई थी।
वर्जन
कई वर्षों से खाली पदों के लिए विज्ञापन निकलवा रहे हैं। इस वर्ष भी गणित और अंग्रेजी व विज्ञान विषय के लिए विज्ञापन निकलवाया गया था, जिसमें कांधला में विज्ञान का पद तो भर दिया गया है। लेकिन गणित में और अंग्रेजी में पद के लिए किसी ने आवेदन ही नहीं किया। जिस कारण पद खाली रह गए। पद पार्ट टाइम होने से भरने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि पार्ट टाइम में केवल पांच हजार रुपये ही मानदेय मिलता है।
- बीएसएस, चंद्रशेखर शामली