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बीस लाख खर्च कर चमकाया हसनपुर लुहारी का प्राथमिक स्कूल
Updated Sun, 02 Sep 2018 11:00 PM IST
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हसनपुर लुहारी के प्राथमिक स्कूल की बदली तस्वीर
थानाभवन। एक साल पहले तक जर्जर भवन, सूखे हुए पौधे, स्टाफ की कमी, टाट पट्टी पर पढ़ाई जैसी परेशानियों से जूझ रहा हसनपुर लुहारी गांव का प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक की आज कायापलट हो चुकी है। खूबसूरत इमारत, ड्रेस कोड, आइकार्ड समेत आज यहां बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। यह कार्य माध्यमिक शिक्षा विभाग नहीं, बल्कि खुद ग्राम पंचायत ने पहल करते हुए अपने पैसे से पूरा कराया।
क्षेत्र के गांव हसनपुर लुहारी का प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक का नाम बदलकर अब पीएस हसनपुर लुहारी रख दिया गया है। एक साल पहले तक स्कूल की हालत को देखते हुए ही यहां बच्चों की संख्या भी 70 से 80 तक सिमट गई थी। इसके बाद ग्राम पंचायत ने स्कूल के पुनर्निर्माण की ठानी। सबसे पहले सात लाख रुपये की लागत से स्कूल में इंटरलॉकिंग कराई गई। इसके बाद करीब 13 लाख रुपये की लागत से जर्जर इमारत को ठीक करने के साथ कमरों में टाईल्स, पौधे, बैडमिंटन कोर्ट व वाल पेंटिंग्स व पूरे स्कूल में नया पेंट कराया गया। इतना ही नहीं, टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए फर्नीचर की सुविधा कराई गई। यही नहीं, बच्चों को आईकार्ड जारी किए गए, जिसमें उनके डाटा के साथ परिजनों के मोबाइल नंबर भी लिखा गया है। आज विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा के साथ, वाटर कूलर, आरओ की सुविधा मौजूद है। साथ ही ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव बनाया है कि अगले वर्ष तक स्कूल में ई-क्लासेस शुरू कराई जा सके। अब स्थिति ये है कि स्कूल में छह शिक्षकों का स्टाफ है और 80 के स्थान पर आज यहां 246 बच्चों का नामांकन हो चुका है। यही वजह है कि जब छह माह पूर्व डिप्टी डायरेक्टर यहां निरीक्षण के लिए आए थे, तो उन्होंने स्कूल की स्थिति की जमकर तारीफ की। क्षेत्र के आठ प्रधान व जनप्रतिनिधि हसनपुर लुहारी के इस विद्यालय को देखने आ चुके हैं। उनका कहना है कि वह भी इसी तर्ज पर अपने गांव के स्कूल विकसित करेंगे।
-वर्जन--
वर्ष 1949 में स्कूल की स्थापना हुई थी। रखरखाव न होने के कारण स्कूल की हालत बद से बदतर होती जा रही थी। हमने ग्राम पंचायत का प्रस्ताव बनाकर 20 लाख रूपये में पुनर्निर्माण किया है।--सतीष सैनी, ग्राम प्रधान के पति
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----हमने ग्राम पंचायत की मदद से प्राथमिक स्कूल को कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर विकसित किया है। आने वाले दिनों में स्कूल में ई-क्लासेस शुरू की जाएंगी। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की तमाम सुविधाओं का ख्याल रखा है।-जुल्फिकार त्यागी, प्रधानाचार्य
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थानाभवन। एक साल पहले तक जर्जर भवन, सूखे हुए पौधे, स्टाफ की कमी, टाट पट्टी पर पढ़ाई जैसी परेशानियों से जूझ रहा हसनपुर लुहारी गांव का प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक की आज कायापलट हो चुकी है। खूबसूरत इमारत, ड्रेस कोड, आइकार्ड समेत आज यहां बच्चों को कान्वेंट स्कूल की तमाम सुविधाएं मुहैया कराई जा रही है। यह कार्य माध्यमिक शिक्षा विभाग नहीं, बल्कि खुद ग्राम पंचायत ने पहल करते हुए अपने पैसे से पूरा कराया।
क्षेत्र के गांव हसनपुर लुहारी का प्राथमिक विद्यालय नंबर-एक का नाम बदलकर अब पीएस हसनपुर लुहारी रख दिया गया है। एक साल पहले तक स्कूल की हालत को देखते हुए ही यहां बच्चों की संख्या भी 70 से 80 तक सिमट गई थी। इसके बाद ग्राम पंचायत ने स्कूल के पुनर्निर्माण की ठानी। सबसे पहले सात लाख रुपये की लागत से स्कूल में इंटरलॉकिंग कराई गई। इसके बाद करीब 13 लाख रुपये की लागत से जर्जर इमारत को ठीक करने के साथ कमरों में टाईल्स, पौधे, बैडमिंटन कोर्ट व वाल पेंटिंग्स व पूरे स्कूल में नया पेंट कराया गया। इतना ही नहीं, टाट पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए फर्नीचर की सुविधा कराई गई। यही नहीं, बच्चों को आईकार्ड जारी किए गए, जिसमें उनके डाटा के साथ परिजनों के मोबाइल नंबर भी लिखा गया है। आज विद्यालय में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा के साथ, वाटर कूलर, आरओ की सुविधा मौजूद है। साथ ही ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव बनाया है कि अगले वर्ष तक स्कूल में ई-क्लासेस शुरू कराई जा सके। अब स्थिति ये है कि स्कूल में छह शिक्षकों का स्टाफ है और 80 के स्थान पर आज यहां 246 बच्चों का नामांकन हो चुका है। यही वजह है कि जब छह माह पूर्व डिप्टी डायरेक्टर यहां निरीक्षण के लिए आए थे, तो उन्होंने स्कूल की स्थिति की जमकर तारीफ की। क्षेत्र के आठ प्रधान व जनप्रतिनिधि हसनपुर लुहारी के इस विद्यालय को देखने आ चुके हैं। उनका कहना है कि वह भी इसी तर्ज पर अपने गांव के स्कूल विकसित करेंगे।
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वर्ष 1949 में स्कूल की स्थापना हुई थी। रखरखाव न होने के कारण स्कूल की हालत बद से बदतर होती जा रही थी। हमने ग्राम पंचायत का प्रस्ताव बनाकर 20 लाख रूपये में पुनर्निर्माण किया है।--सतीष सैनी, ग्राम प्रधान के पति
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----हमने ग्राम पंचायत की मदद से प्राथमिक स्कूल को कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर विकसित किया है। आने वाले दिनों में स्कूल में ई-क्लासेस शुरू की जाएंगी। स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की तमाम सुविधाओं का ख्याल रखा है।-जुल्फिकार त्यागी, प्रधानाचार्य