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विधि विधान से पूजा करने से होते है दुख दूर
Updated Thu, 02 Nov 2017 01:07 AM IST
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जलालाबाद।
कस्बे के सनातन सत्संग भवन के प्रांगण में आयोजित कार्तिक मास कथा में कथा वाचक अवनीश भगत ने कार्तिक मास की चतुर्दशी पूजन का महत्व समझाया। बताया कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को भगवान नारायण का विधि विधान से पूजन करने से दुख दूर होते है।
कहा कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को ब्रह्म मुहूर्त में पोखर जलाशय या नदी आदि में ओम नम: भगवते मंत्र के साथ स्नान करने के पश्चात अपने घर पर कार्तिक मास व्रत की संपूर्णता के लिए घर में गाय के गोबर से लेपन कर चौका लगाएं। तुलसी के ऊपर मंडप बनाए, मिट्टी से चार द्वारपाल स्थापित कर उनका नाम पुण्यशील सुशील जप विजय रखें। कथा में श्रोताओं भक्तिमयी माताओं बहनों की भारी संख्या में उपस्थिति रही। इस दौरान राजकुमार, मदनलाल, पंडित राधेश्याम, पंडित सुभाष शर्मा, इंदू, योगेश, बबीता, कोमल, वंदना, राखी, शालिनी आदि का सहयोग रहा।
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कस्बे के सनातन सत्संग भवन के प्रांगण में आयोजित कार्तिक मास कथा में कथा वाचक अवनीश भगत ने कार्तिक मास की चतुर्दशी पूजन का महत्व समझाया। बताया कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को भगवान नारायण का विधि विधान से पूजन करने से दुख दूर होते है।
कहा कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को ब्रह्म मुहूर्त में पोखर जलाशय या नदी आदि में ओम नम: भगवते मंत्र के साथ स्नान करने के पश्चात अपने घर पर कार्तिक मास व्रत की संपूर्णता के लिए घर में गाय के गोबर से लेपन कर चौका लगाएं। तुलसी के ऊपर मंडप बनाए, मिट्टी से चार द्वारपाल स्थापित कर उनका नाम पुण्यशील सुशील जप विजय रखें। कथा में श्रोताओं भक्तिमयी माताओं बहनों की भारी संख्या में उपस्थिति रही। इस दौरान राजकुमार, मदनलाल, पंडित राधेश्याम, पंडित सुभाष शर्मा, इंदू, योगेश, बबीता, कोमल, वंदना, राखी, शालिनी आदि का सहयोग रहा।
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