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मन से मन्नत मांगने पर त्रिलोकपुरी देवी करती है इच्छा पूरी
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:47 AM IST
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बाला सुंदरी मंदिर की महिमा अपरंपार
शामली। मोहल्ला राजोवाला स्थित प्राचीन माता त्रिलोकपुरी देवी बाला सुंदरी मंदिर की महिमा निराली है। भक्तों की मन की मुरादें यहां पूरी होती हैं। नवरात्र में इस मंदिर में पूजन का विशेष महत्व है। वहीं, नवरात्र में चतुर्दशी पर यहां भव्य मेला भी लगाया जाता है।
इस प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर की स्थापना लगभग 81 वर्ष पूर्व लाला उग्रसेन द्वारा कराई गई थी। मंदिर समिति के प्रबंधक जितेंद्र पुत्र धनप्रकाश है। उन्होंने बताया कि पहले यह मोहल्ला कायस्थवाड़ा मोहल्ले के नाम से विख्यात था, तब यहां कायस्थ बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में रहते थे। वहीं मां बाला सुंदरी की प्रतिमा यहां स्थापित कराने के लिए लाए थे। बाद में बाबा अर्जुन दास के कहने पर मूर्ति स्थापित की गई और मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर में करीब 40 साल से लिलौन गांव निवासी रामकिशोर पुजारी हैं। उन्होंने बताया कि त्रिलोकपुरी माता के प्रति भक्तों की अलग ही आस्था है। सच्चे मन से मन्नत मांगने वाले व्यक्ति की इच्छा पूरी होती है। उन्होंने बताया कि शारदीय और चैत्र शुक्ल नवरात्र में चतुर्दशी पर यहां मेला लगता है। शामली शहर के साथ ही दूरदराज से श्रद्धालु यहां प्रसाद चढ़ाने आते हैं और मन्नत मांगते हैं। रोजाना ही मंदिर में पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। वहीं, नवरात्र में यहां पूजन करके श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
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शामली। मोहल्ला राजोवाला स्थित प्राचीन माता त्रिलोकपुरी देवी बाला सुंदरी मंदिर की महिमा निराली है। भक्तों की मन की मुरादें यहां पूरी होती हैं। नवरात्र में इस मंदिर में पूजन का विशेष महत्व है। वहीं, नवरात्र में चतुर्दशी पर यहां भव्य मेला भी लगाया जाता है।
इस प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर की स्थापना लगभग 81 वर्ष पूर्व लाला उग्रसेन द्वारा कराई गई थी। मंदिर समिति के प्रबंधक जितेंद्र पुत्र धनप्रकाश है। उन्होंने बताया कि पहले यह मोहल्ला कायस्थवाड़ा मोहल्ले के नाम से विख्यात था, तब यहां कायस्थ बिरादरी के लोग बड़ी संख्या में रहते थे। वहीं मां बाला सुंदरी की प्रतिमा यहां स्थापित कराने के लिए लाए थे। बाद में बाबा अर्जुन दास के कहने पर मूर्ति स्थापित की गई और मंदिर का निर्माण किया गया। मंदिर में करीब 40 साल से लिलौन गांव निवासी रामकिशोर पुजारी हैं। उन्होंने बताया कि त्रिलोकपुरी माता के प्रति भक्तों की अलग ही आस्था है। सच्चे मन से मन्नत मांगने वाले व्यक्ति की इच्छा पूरी होती है। उन्होंने बताया कि शारदीय और चैत्र शुक्ल नवरात्र में चतुर्दशी पर यहां मेला लगता है। शामली शहर के साथ ही दूरदराज से श्रद्धालु यहां प्रसाद चढ़ाने आते हैं और मन्नत मांगते हैं। रोजाना ही मंदिर में पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। वहीं, नवरात्र में यहां पूजन करके श्रद्धालु पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
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