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वाणिज्यकर अधिकारियों ने कर दिया कार्य बहिष्कार
Updated Tue, 11 Jul 2017 12:23 AM IST
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शामली।
जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद कार्य बढ़ने से वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आंदोलन पर आ गए हैं। उनकी मांग है कि जब एक राष्ट्र, एक टैक्स की व्यवस्था लागू कर दी गई है तो वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को भी सेंट्रल एक्साइज के समान वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके चलते सोमवार को वाणिज्यकर विभाग में कार्य बहिष्कार कर दिया गया। इसके विरोध में आज लखनऊ में धरना प्रदर्शन होगा।
संयुक्त संघर्ष समिति वाणिज्यकर के संयोजक मनोज त्रिपाठी ने समस्त जनपदों में संगठन से जुडे़ वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों को इस बारे में पत्र भेजा, जिसके बाद आंदोलन शुरू किया गया। डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने बताया कि यह निर्णय संयुक्त संघर्ष समिति वाणिज्यकर की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद लिया गया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी को सफलतापूर्ण लागू करने के उद्देश्य से केंद्रीय कर प्रशासन विभाग में मार्च 2017 में प्रशासनिक पुनर्गठन कर दिया गया, लेकिन राज्य स्तर पर वाणिज्यकर विभाग में अभी तक ऐसा नहीं किया गया है। समान कार्य के समान पद एवं सर्वमान्य सिद्धांत के अनुरूप संवर्ग पुनर्गठन हेतु प्रस्ताव पूर्व में दिए जा चुके हैं।
वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट की भावना के अनुरूप एसजीएसटी एवं सीजीएसटी अधिनियम में समान कार्य एवं दायित्वों के दृष्टिगत समान कैडर की व्यवस्था होनी चाहिए। यह व्यवस्था नहीं होने के कारण वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। वाणिज्यकर विभाग से जीआसटी लागू कराने में पूरा कार्य लिया गया, भविष्य में भी प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को सचल दस्ते के रूप में सड़क पर उतरना होगा, जबकि सेंट्रल एक्साइज के तृतीय श्रेणी का अधिकारी ही सचल दस्ते में होता है।
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वाणिज्यकर विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मांग है कि जब उनसे सेंट्रल एक्साइज के समान कार्य लिया जा रहा है, तो वेतन, भत्ते और सुविधा भी उनके समान मिलनी चाहिए। डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने बताया कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन के चलते ही कार्य बहिष्कार रखा गया और हेल्प डेस्क भी बंद रखी गई। विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्यकर अधिकारी एपी राय, पीडी गुप्ता, एसपी मलिक, संजय सिंह, दुर्गेश यादव आदि ने बताया कि आंदोलन में अधिकारियों के साथ ही कर्मचारी संघ ने भी समर्थन दे दिया है।
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जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) लागू होने के बाद कार्य बढ़ने से वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी आंदोलन पर आ गए हैं। उनकी मांग है कि जब एक राष्ट्र, एक टैक्स की व्यवस्था लागू कर दी गई है तो वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को भी सेंट्रल एक्साइज के समान वेतन, भत्ते और सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके चलते सोमवार को वाणिज्यकर विभाग में कार्य बहिष्कार कर दिया गया। इसके विरोध में आज लखनऊ में धरना प्रदर्शन होगा।
संयुक्त संघर्ष समिति वाणिज्यकर के संयोजक मनोज त्रिपाठी ने समस्त जनपदों में संगठन से जुडे़ वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों को इस बारे में पत्र भेजा, जिसके बाद आंदोलन शुरू किया गया। डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने बताया कि यह निर्णय संयुक्त संघर्ष समिति वाणिज्यकर की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद लिया गया है। उन्होंने बताया कि जीएसटी को सफलतापूर्ण लागू करने के उद्देश्य से केंद्रीय कर प्रशासन विभाग में मार्च 2017 में प्रशासनिक पुनर्गठन कर दिया गया, लेकिन राज्य स्तर पर वाणिज्यकर विभाग में अभी तक ऐसा नहीं किया गया है। समान कार्य के समान पद एवं सर्वमान्य सिद्धांत के अनुरूप संवर्ग पुनर्गठन हेतु प्रस्ताव पूर्व में दिए जा चुके हैं।
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वन नेशन, वन टैक्स, वन मार्केट की भावना के अनुरूप एसजीएसटी एवं सीजीएसटी अधिनियम में समान कार्य एवं दायित्वों के दृष्टिगत समान कैडर की व्यवस्था होनी चाहिए। यह व्यवस्था नहीं होने के कारण वाणिज्यकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। वाणिज्यकर विभाग से जीआसटी लागू कराने में पूरा कार्य लिया गया, भविष्य में भी प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को सचल दस्ते के रूप में सड़क पर उतरना होगा, जबकि सेंट्रल एक्साइज के तृतीय श्रेणी का अधिकारी ही सचल दस्ते में होता है।
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वाणिज्यकर विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों की मांग है कि जब उनसे सेंट्रल एक्साइज के समान कार्य लिया जा रहा है, तो वेतन, भत्ते और सुविधा भी उनके समान मिलनी चाहिए। डिप्टी कमिश्नर एके दोहरे ने बताया कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि आंदोलन के चलते ही कार्य बहिष्कार रखा गया और हेल्प डेस्क भी बंद रखी गई। विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्यकर अधिकारी एपी राय, पीडी गुप्ता, एसपी मलिक, संजय सिंह, दुर्गेश यादव आदि ने बताया कि आंदोलन में अधिकारियों के साथ ही कर्मचारी संघ ने भी समर्थन दे दिया है।