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नमक की बोरी में मिली थी मां शाकुंभरी की प्रतिमा
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:20 AM IST
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शामली।
शहर की पुरानी सब्जी मंडी में मां शाकुंभरी देवी का मंदिर 200 साल पुराना है। यहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रत्येक माह की अष्टमी और नवरात्रों में यहां मेला लगता है।
शहर की पुरानी सब्जी मंडी में मां शाकंभरी देवी मंदिर की स्थापना 200 साल पूर्व पंडित हरिप्रसाद शर्मा ने कराई थी। मंदिर कमेटी के सदस्य अश्वनी कांबोज बताते हैं कि पुरानी सब्जी मंडी में एक नमक की बोरी रखी थी। पंडित हरिप्रसाद को मां भगवती ने स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि वह नमक की बोरी में हैं। इस पर उनके मंदिर की स्थापना कराई जाए। इसके बाद नमक की बोरी से प्रतिमा निकलवाकर सब्जी मंडी में मां शाकंभरी देवी, शताक्षी और भीमा देवी की प्रतिमा स्थापित करा मंदिर की स्थापना कराई गई।।
पंडित हरिप्रसाद शर्मा के बाद उनके पुत्र लालू पंडित की पीढ़ी मंदिर में पुजारी का काम देख रही है। मंदिर के वर्तमान में पुजारी कुलदीप ने बताया कि इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। मंदिर परिसर में पीपल का पेड़ है, श्रद्धालु पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर माता से मन्नत मांगते हैं।
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शहर की पुरानी सब्जी मंडी में मां शाकुंभरी देवी का मंदिर 200 साल पुराना है। यहां श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। प्रत्येक माह की अष्टमी और नवरात्रों में यहां मेला लगता है।
शहर की पुरानी सब्जी मंडी में मां शाकंभरी देवी मंदिर की स्थापना 200 साल पूर्व पंडित हरिप्रसाद शर्मा ने कराई थी। मंदिर कमेटी के सदस्य अश्वनी कांबोज बताते हैं कि पुरानी सब्जी मंडी में एक नमक की बोरी रखी थी। पंडित हरिप्रसाद को मां भगवती ने स्वप्न में दर्शन दिए और कहा कि वह नमक की बोरी में हैं। इस पर उनके मंदिर की स्थापना कराई जाए। इसके बाद नमक की बोरी से प्रतिमा निकलवाकर सब्जी मंडी में मां शाकंभरी देवी, शताक्षी और भीमा देवी की प्रतिमा स्थापित करा मंदिर की स्थापना कराई गई।।
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पंडित हरिप्रसाद शर्मा के बाद उनके पुत्र लालू पंडित की पीढ़ी मंदिर में पुजारी का काम देख रही है। मंदिर के वर्तमान में पुजारी कुलदीप ने बताया कि इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक है। मंदिर परिसर में पीपल का पेड़ है, श्रद्धालु पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर माता से मन्नत मांगते हैं।
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