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तन्मय सागर महाराज ने किए प्रवचन
Updated Mon, 14 Aug 2017 01:28 AM IST
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कैराना।
श्री दिगंबर जैन सरस्वती भवन में चल रहे वर्षा योग में परम श्रद्धेय तत्वज्ञानी श्री 108 आचार्य तन्मय सागर महाराज ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओं को श्री रत्न करड़ श्रावकाचार ग्रंथ से सम्यक दर्शन के विषय में बताया। कहा कि हर मनुष्य को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। आज के समय को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारी वस्तु हमेशा झुकती है। हमें समाज में, नगर में, देश में अपनी भावना पर काबू रख कर हमेशा त्याग के लिए तैयार रहना चाहिए। तभी स्वस्थ समाज व स्वस्थ देश का निर्माण संभव है। आचार्य ने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत प्राणी मात्र की रक्षा करना ही नहीं हैं। बल्कि परस्पर प्रेम व विश्वास के साथ प्राणी मात्र का सहयोग भी करना भी है। सभागार में डॉ. निर्मल जैन, प्रवीण जैन, भूषण जैन, रामरतन वर्मा, विपुल जैन, राजीव जैन, मनोज जैन आदि जैन बंधुओं की उपस्थिति रही।
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श्री दिगंबर जैन सरस्वती भवन में चल रहे वर्षा योग में परम श्रद्धेय तत्वज्ञानी श्री 108 आचार्य तन्मय सागर महाराज ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओं को श्री रत्न करड़ श्रावकाचार ग्रंथ से सम्यक दर्शन के विषय में बताया। कहा कि हर मनुष्य को अपनी शक्ति के अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। आज के समय को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारी वस्तु हमेशा झुकती है। हमें समाज में, नगर में, देश में अपनी भावना पर काबू रख कर हमेशा त्याग के लिए तैयार रहना चाहिए। तभी स्वस्थ समाज व स्वस्थ देश का निर्माण संभव है। आचार्य ने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत प्राणी मात्र की रक्षा करना ही नहीं हैं। बल्कि परस्पर प्रेम व विश्वास के साथ प्राणी मात्र का सहयोग भी करना भी है। सभागार में डॉ. निर्मल जैन, प्रवीण जैन, भूषण जैन, रामरतन वर्मा, विपुल जैन, राजीव जैन, मनोज जैन आदि जैन बंधुओं की उपस्थिति रही।