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रोडवेज बस स्टैंड के इंतजार में निकल गए 42
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रोडवेज बस स्टैंड के इंतजार में निकल गए 42 साल
शामली। पिछले 42 साल बाद भी शामली में रोडवेज डिपो नहीं बन सका है। पांच साल पूर्व उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए मुजफ्फरनगर रोड पर फतेहपुर गांव के पास नौ बीघा भूमि 47 लाख रुपये में जमीन खरीदी जा चुकी है। लेकिन अभी तक शासन से शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए बजट अवमुक्त नहीं हो पाया है। जिससे जिले के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शामली में लंबे समय से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की स्थापना की मांग चली आ रही है। शामली में डिपो की मांग को नजरअंदाज करते हुए 1978 में लोनी, 1988 में बड़ौत को डिपो का दर्जा दिया गया। शामली में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के डिपो की स्थापना न होने के पीछे पहले भूमि उपलब्ध न होना सबसे बड़ा कारण था। भूमि उपलब्ध होनेेे के बाद इसका प्रस्ताव उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लखनऊ की बोर्ड बैठक में पारित नहीं हो सका। शामली में रोडवेज डिपो के लिए भूमि खरीदने के पांच साल बाद बजट अवमुक्त नहीं हो पाया है। जिला मुख्यालय का दर्जा मिलने के बाद शासन ने शामली को अनुबंधित बसों का डिपो तो घोषित कर दिया, लेकिन निगम की बसों का डिपो घोषित नहीं किया।
जिले की व्यापार बंधु की बैठकों में शामली को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों का डिपो घोषित किए जाने की मांग उठती रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रयास से मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर गांव में नौ बीघा भूमि का प्रस्ताव दिया गया। प्रस्ताव मिलने के बाद शासन से भूमि खरीदने के लिए 47 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। फरवरी 2016 में तत्कालीन डीएम ने रोडवेज डिपो की नौ बीघा भूमि पर परिवहन निगम को कब्जा दिलाया था। बीस जुलाई 2018 को फतेहपुर गांव की नौ बीघा भूमि को शामली रोडवेज डिपो के नाम दर्ज कर दिया गया। व्यापारियों की मांग के बावजूद शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए शासन से बजट अवमुक्त नहीं किया गया। शामली में रोडवेज डिपो की स्थापना नहीं होने से निगम की बसें हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और वेस्ट यूपी के जिलों में संचालित नहीं हो रही है, यही वजह है कि शाम के समय मुख्य मार्गों पर यात्री बसों के इंतजार में भटकते रहते हैं।
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शामली में 23 अनुबंधित और जलालाबाद में 33 निगम की बसें
2019 में जलालाबाद बस अड्डे में शामली डिपो की अस्थायी कार्यशाला का निर्माण कराया गया। अब जलालाबाद डिपो के नाम से निगम की 33 रोडवेज बसों का संचालन हो रहा है। शामली अनुबंधित डिपो से मात्र 23 बसों का संचालन हो रहा है। फिलहाल शामली मेें आधुनिक बस अड्डे के नाम पर निगम को अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। यूपी रोडवेज का बस अड्डा दिल्ली रोड पर नगर पालिका परिषद के भवन में किराए में चल रहा है। भूमि के अभाव में पूूूरी तरह रोडवेज की बसें रात्रि में खड़ी होने में परेशानी होती है। पर्याप्त भूमि के अभाव में सड़कों पर निगम की बसें खड़ी रहती हैं।
परिवहन निगम बोर्ड की बैठक में पास नहीं हो सका प्रस्ताव
शामली में अभी तक अनुबंधित बसों का डिपो संचालित हो रहा है। निगम की बसों का शामली डिपो का उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव नहीं हो पाया है। निगम की डिपो की कार्यशाला के लिए दो बार इंजीनियरों ने भूमि का निरीक्षण करके रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय को भेज चुके हैं। शासन से अभी तक शामली में निगम के बसों के डिपो को बजट नही मिल पाया है- मनोज वाजपेयी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक शामली।
दो-दो एमडी और परिवहन राज्यमंत्री से मिलकर दे चुके ज्ञापन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्यो व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग का कहना है कि शामली में रोडवेज डिपो के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई। पिछले छह साल से जिला व्यापार बंधु रोडवेज डिपो के लिए लड़ाई ले रहे हैं। दोबार लखनऊ में जाकर निगम के प्रबंध निदेशक, प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर शामली डिपो का बजट अवमुक्त कराने और शामली में रोडवेज की 40 बसों के लिए मांग कर चुके हैं। जल्द ही परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर डिपो का बजट अवमुक्त कराने की मांग करेंगे।
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शामली। पिछले 42 साल बाद भी शामली में रोडवेज डिपो नहीं बन सका है। पांच साल पूर्व उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए मुजफ्फरनगर रोड पर फतेहपुर गांव के पास नौ बीघा भूमि 47 लाख रुपये में जमीन खरीदी जा चुकी है। लेकिन अभी तक शासन से शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए बजट अवमुक्त नहीं हो पाया है। जिससे जिले के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शामली में लंबे समय से उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की स्थापना की मांग चली आ रही है। शामली में डिपो की मांग को नजरअंदाज करते हुए 1978 में लोनी, 1988 में बड़ौत को डिपो का दर्जा दिया गया। शामली में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के डिपो की स्थापना न होने के पीछे पहले भूमि उपलब्ध न होना सबसे बड़ा कारण था। भूमि उपलब्ध होनेेे के बाद इसका प्रस्ताव उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लखनऊ की बोर्ड बैठक में पारित नहीं हो सका। शामली में रोडवेज डिपो के लिए भूमि खरीदने के पांच साल बाद बजट अवमुक्त नहीं हो पाया है। जिला मुख्यालय का दर्जा मिलने के बाद शासन ने शामली को अनुबंधित बसों का डिपो तो घोषित कर दिया, लेकिन निगम की बसों का डिपो घोषित नहीं किया।
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जिले की व्यापार बंधु की बैठकों में शामली को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों का डिपो घोषित किए जाने की मांग उठती रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रयास से मुजफ्फरनगर मार्ग पर फतेहपुर गांव में नौ बीघा भूमि का प्रस्ताव दिया गया। प्रस्ताव मिलने के बाद शासन से भूमि खरीदने के लिए 47 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई। फरवरी 2016 में तत्कालीन डीएम ने रोडवेज डिपो की नौ बीघा भूमि पर परिवहन निगम को कब्जा दिलाया था। बीस जुलाई 2018 को फतेहपुर गांव की नौ बीघा भूमि को शामली रोडवेज डिपो के नाम दर्ज कर दिया गया। व्यापारियों की मांग के बावजूद शामली रोडवेज डिपो की कार्यशाला के लिए शासन से बजट अवमुक्त नहीं किया गया। शामली में रोडवेज डिपो की स्थापना नहीं होने से निगम की बसें हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और वेस्ट यूपी के जिलों में संचालित नहीं हो रही है, यही वजह है कि शाम के समय मुख्य मार्गों पर यात्री बसों के इंतजार में भटकते रहते हैं।
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शामली में 23 अनुबंधित और जलालाबाद में 33 निगम की बसें
2019 में जलालाबाद बस अड्डे में शामली डिपो की अस्थायी कार्यशाला का निर्माण कराया गया। अब जलालाबाद डिपो के नाम से निगम की 33 रोडवेज बसों का संचालन हो रहा है। शामली अनुबंधित डिपो से मात्र 23 बसों का संचालन हो रहा है। फिलहाल शामली मेें आधुनिक बस अड्डे के नाम पर निगम को अभी तक भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। यूपी रोडवेज का बस अड्डा दिल्ली रोड पर नगर पालिका परिषद के भवन में किराए में चल रहा है। भूमि के अभाव में पूूूरी तरह रोडवेज की बसें रात्रि में खड़ी होने में परेशानी होती है। पर्याप्त भूमि के अभाव में सड़कों पर निगम की बसें खड़ी रहती हैं।
परिवहन निगम बोर्ड की बैठक में पास नहीं हो सका प्रस्ताव
शामली में अभी तक अनुबंधित बसों का डिपो संचालित हो रहा है। निगम की बसों का शामली डिपो का उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव नहीं हो पाया है। निगम की डिपो की कार्यशाला के लिए दो बार इंजीनियरों ने भूमि का निरीक्षण करके रिपोर्ट क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय को भेज चुके हैं। शासन से अभी तक शामली में निगम के बसों के डिपो को बजट नही मिल पाया है- मनोज वाजपेयी सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक शामली।
दो-दो एमडी और परिवहन राज्यमंत्री से मिलकर दे चुके ज्ञापन
पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्यो व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्यामदास गर्ग का कहना है कि शामली में रोडवेज डिपो के लिए भूमि उपलब्ध कराई गई। पिछले छह साल से जिला व्यापार बंधु रोडवेज डिपो के लिए लड़ाई ले रहे हैं। दोबार लखनऊ में जाकर निगम के प्रबंध निदेशक, प्रदेश के परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर शामली डिपो का बजट अवमुक्त कराने और शामली में रोडवेज की 40 बसों के लिए मांग कर चुके हैं। जल्द ही परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से मिलकर डिपो का बजट अवमुक्त कराने की मांग करेंगे।