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24 सितंबर को लखनऊ में गरजेंगे ईंट भट्ठा मालिक
Updated Tue, 18 Sep 2018 12:30 AM IST
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शामली। ईंट भट्ठा निर्माता सरकार के खिलाफ आंदोलन करने जा रहे हैं। 24 सितंबर को लखनऊ में प्रदेश भर के ईंट भट्ठा निर्माता इकट्ठा होंगे और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसी सिलसिले में सोमवार को शामली ईंट निर्माता समिति के पदाधिकारियों ने बैठक कर धरना प्रदर्शन की रणनीति बनाई।
शामली में हनुमान धाम के पास हुई बैठक के दौरान शामली ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा ईंट भट्टों पर काला कानून थोपा जा रहा है, जिससे ईंट भट्ठा उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच रहा है। सरकारी निर्माणों में फ्लाई ऐश ईंट व ब्लाबस का प्रयोग पूर्णत: बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें रेडियो एक्टिविटी होने के कारण दमा, कैंसर व चर्म रोग जैसी बीमारियां फैलने का खतरा है। उत्तर प्रदेश सरकार का एक वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान ईंट के लिए मिट्टी पर रायल्टी समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन अब तक रायल्टी समाप्त नहीं हुई। ईंट मिट्टी खनन से पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (ईसी) को समाप्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा ईंट भट्ठों को जिग जैग तकनीक में परिवर्तित करने की बाध्यता को भी समाप्त किया जाए, क्योंकि एक ईंट भट्ठे को इस तकनीक में परिवर्तित करने पर करीब 40 लाख रुपये का खर्चा होता है, जिसे उठाने में फिलहाल ईंट भट्ठा निर्माता असमर्थ हैं। 24 सितंबर को लखनऊ में कांशीराम ईको गार्डन वीआईपी रोड पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें प्रदेश के सभी जनपदों के करीब 30 हजार ईंट भट्ठा निर्माता पहुंचेंगे। इस दौरान समिति के महामंत्री सुनील गोयल, कोषाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार शर्मा, संजय कुमार, सतीश कुमार, महिपाल, नीरज बालियान, सुधीर, वीरेन्द्र फौजी, मांगेराम, गुलजार, महेंद्र, अजय, रामकुमार किवाना, सतेंद्र और संदीप आदि मौजूद रहे।
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शामली में हनुमान धाम के पास हुई बैठक के दौरान शामली ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा ईंट भट्टों पर काला कानून थोपा जा रहा है, जिससे ईंट भट्ठा उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच रहा है। सरकारी निर्माणों में फ्लाई ऐश ईंट व ब्लाबस का प्रयोग पूर्णत: बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें रेडियो एक्टिविटी होने के कारण दमा, कैंसर व चर्म रोग जैसी बीमारियां फैलने का खतरा है। उत्तर प्रदेश सरकार का एक वर्ष पूर्ण होने पर मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान ईंट के लिए मिट्टी पर रायल्टी समाप्त करने की बात कही थी, लेकिन अब तक रायल्टी समाप्त नहीं हुई। ईंट मिट्टी खनन से पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र (ईसी) को समाप्त किया जाना चाहिए। इसके अलावा ईंट भट्ठों को जिग जैग तकनीक में परिवर्तित करने की बाध्यता को भी समाप्त किया जाए, क्योंकि एक ईंट भट्ठे को इस तकनीक में परिवर्तित करने पर करीब 40 लाख रुपये का खर्चा होता है, जिसे उठाने में फिलहाल ईंट भट्ठा निर्माता असमर्थ हैं। 24 सितंबर को लखनऊ में कांशीराम ईको गार्डन वीआईपी रोड पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें प्रदेश के सभी जनपदों के करीब 30 हजार ईंट भट्ठा निर्माता पहुंचेंगे। इस दौरान समिति के महामंत्री सुनील गोयल, कोषाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार शर्मा, संजय कुमार, सतीश कुमार, महिपाल, नीरज बालियान, सुधीर, वीरेन्द्र फौजी, मांगेराम, गुलजार, महेंद्र, अजय, रामकुमार किवाना, सतेंद्र और संदीप आदि मौजूद रहे।
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