{"_id":"5acd09774f1c1b5f3e8b46d4","slug":"31523386743-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है: विनित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है: विनित
Updated Wed, 11 Apr 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलालाबाद।
कस्बे में पाल धर्मशाला के प्रांगण में महाशय श्यामलाल आर्य की स्मृति में चल रहे वेद प्रचार सत्संग में आर्य विद्वानों ने मानव को उसके द्वारा किए गए कर्मों के फल के विषय में विस्तार से बताया।
वेद प्रचार सत्संग में मंगलवार प्रात: सामूहिक रुप से हवन हुआ। हवन सहदेव आर्य व विश्वमित्र आर्य ने सामूहिक रुप से कराया। जिसमें आर्य बहिन व बंधुओं ने वेद मंत्रों के साथ आहुति देकर हवन संपन्न कराया। बिजनौर गुरुकुल के आचार्य विनीत आर्य ने बताया कि मनुष्य चाहे कितना भी उच्च स्थान प्राप्त कर ले, परंतु उसके द्वारा किए गए अच्छे व बुरे कर्म ही उसको फलीभूत करते हैं। यानी मनुष्य को अपने कर्मों का फल जरूर भोगना पड़ता है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम का बनवास व उनके पिता राजा दशरथ का पुत्र वियोग के कारण हुई मृत्यु का प्रसंग सुनाया। दशरथ ने अपने बाण से श्रवण कुमार जैसे पितृ भक्त को मार दिया था और पुत्र वियोग में श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता भी मर गए थे। जिसका राजा दशरथ को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा। आर्य समाज जगत के भजन सम्राट कुलदीप आर्य ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की स्तुति व महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डाला। आचार्य जयप्रकाश व पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा ने अध्यक्षता, डॉ. सुभाष चंद आर्य ने संचालन किया। इस दौरान डॉ. देवेंद्र आर्य, सतीश आर्य, डॉ. रणजीत सिंह, बाबूराम नायक, छवीनाथ यादव, सहदेव आर्य मुकेश आर्य, कुलदीप आर्य, रतन सिंह, प्रदीप, अनुराधा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कस्बे में पाल धर्मशाला के प्रांगण में महाशय श्यामलाल आर्य की स्मृति में चल रहे वेद प्रचार सत्संग में आर्य विद्वानों ने मानव को उसके द्वारा किए गए कर्मों के फल के विषय में विस्तार से बताया।
वेद प्रचार सत्संग में मंगलवार प्रात: सामूहिक रुप से हवन हुआ। हवन सहदेव आर्य व विश्वमित्र आर्य ने सामूहिक रुप से कराया। जिसमें आर्य बहिन व बंधुओं ने वेद मंत्रों के साथ आहुति देकर हवन संपन्न कराया। बिजनौर गुरुकुल के आचार्य विनीत आर्य ने बताया कि मनुष्य चाहे कितना भी उच्च स्थान प्राप्त कर ले, परंतु उसके द्वारा किए गए अच्छे व बुरे कर्म ही उसको फलीभूत करते हैं। यानी मनुष्य को अपने कर्मों का फल जरूर भोगना पड़ता है। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम राम का बनवास व उनके पिता राजा दशरथ का पुत्र वियोग के कारण हुई मृत्यु का प्रसंग सुनाया। दशरथ ने अपने बाण से श्रवण कुमार जैसे पितृ भक्त को मार दिया था और पुत्र वियोग में श्रवण कुमार के अंधे माता-पिता भी मर गए थे। जिसका राजा दशरथ को अपने कर्मों का फल भोगना पड़ा। आर्य समाज जगत के भजन सम्राट कुलदीप आर्य ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की स्तुति व महर्षि दयानंद सरस्वती के जीवन पर प्रकाश डाला। आचार्य जयप्रकाश व पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा ने अध्यक्षता, डॉ. सुभाष चंद आर्य ने संचालन किया। इस दौरान डॉ. देवेंद्र आर्य, सतीश आर्य, डॉ. रणजीत सिंह, बाबूराम नायक, छवीनाथ यादव, सहदेव आर्य मुकेश आर्य, कुलदीप आर्य, रतन सिंह, प्रदीप, अनुराधा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन