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मजबूर महिला और बच्चों का सहारा बनी दिव्यांग पायल

Sat, 24 Nov 2018 11:30 PM IST
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:30 PM IST
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मजबूर महिला और बच्चों का सहारा बनी दिव्यांग पायल
जरूरतमंदों की कामयाब बनाने के लिए जीजान से जुटी है पायल
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली/थानाभवन। घर की माली हालत और दिव्यांगता की वजह से पायल की पढ़ाई छूट गई। लतीफगढ़ निवासी पायल बेसहारा लोगों के लिए अब सहारा बनकर खड़ी है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे बच्चों और घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए प्रेरणा का काम कर रही है पायल। उसकी जीतोड़ मेहनत और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना रखने की वजह से उसे सम्मानित भी किया जा चुका है।
जरूरतमंद लोगों के लिए संघर्ष करने वाली लड़की पायल कश्यप दिव्यांग है। पायल के माता-पिता का देहांत हो चुका है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है और उसके कंधों पर तीन अन्य भाई-बहनों की जिम्मेदारी भी है। इन सबके बावजूद पायल ने वर्ष 2014 में युवा एकता उत्थान समिति का गठन किया। इसके जरिये पायल जहां पैसे के अभाव में स्कूल से दूर बच्चों को शिक्षित करने का काम करती है, वहीं उत्पीड़न का शिकार महिलाओं को जागरूक करने का भी। इसी कार्य के चलते 27 अगस्त 2015 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव ने उसे महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास के कार्यों को लेकर सम्मानित भी किया था।
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घर के आसपास ही बच्चों को पढ़ाती है
आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण पायल के घर में बच्चों को पढ़ाने की बेहतर व्यवस्था नहीं है। इसलिए वह आसपास के घर व घेर में बच्चों की क्लास चलाकर उन्हें पढ़ाती है।
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जनवरी में हुआ था पिता का निधन
पायल की मां का निधन 2011 में हो गया था। इसी साल 14 जनवरी को उनके पिता श्यामलाल का भी निधन हो गया। ऐसे में पायल के परिवार की स्थिति और लड़खड़ा गई। मगर, पायल ने इस कमजोरी को भी अपना हथियार बनाया और अपने मिशन में बढ़ती चली गई।

बीच में छूट गई पढ़ाई
परिवार की आर्थिक स्थिति का आलम ये है कि पैसे न होने के कारण उन्हें देहरादून में मास्टर्स ऑफ जर्नलिज्म की पढ़ाई बीच में ही छोड़ देनी पड़ी। बावजूद इसके भी पायल ने हार नहीं मानी। पायल के पिता के कुल आठ संतान हैं। इनमें से बडे़ चार भाइयों की शादी हो चुकी है, जो अपने परिवार के साथ रहते हैं। हालांकि, वह पायल की परिवार चलाने में थोड़ी बहुत मदद कर देते हैं, लेकिन उनकी स्वयं की भी हालत ठीक न होने के कारण ज्यादा मदद नहीं दे पाते।
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