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शिक्षा से जीवन में उजियारा, उसके बगैर जीना बेकार- मसूद अजीजी
Updated Sat, 14 Apr 2018 12:48 AM IST
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कैराना (शामली)। सहारनपुर से हजरत मौलाना मुफ्ती मसूद अजीजी नदवी ने कहा कि शिक्षा से जीवन में उजियारा है, इसके बगैर जीवन बेकार है।
क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राई स्थित मदरसा इस्लामिया मरकजुल इमाम रहमतुल्लाह अल कैरानवी की ओर से शुक्रवार को कस्बा कैराना के मोहल्ला अफगानान स्थित बारातघर में जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें बुखारी शरीफ और हाफिज की उपाधि देकर छात्र छात्राओं की दस्तारबंदी की गई। मुख्य अतिथि हजरत मौलाना मुफ्ती मसूद अजीजी नदवी ने कहा कि जीवन की सफलता के लिए आधुनिक युग में अपने बच्चों को शिक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कयामत के दिन आमाल तोले जाएंगे, जिसमें अच्छाई और बुराइयों का हिसाब होगा। वहीं, हाफिज फुरकान ने कहा कि अंग्रेजों ने पवित्र कुरान को मिटाने का प्रयास किया तो उलमा खड़े हो गए तथा उन्होंने दारुल उलूम देवबंद कायम किया। इसके बाद पूरे देश में मदरसों का एक जाल फैल गया। मौलाना नूरुल हसन और राशिद कांधलवी ने कहा कि एक समय था, जब स्पेन में चारों और रोशनी थी और लंदन जैसे शहरों में अंधेरा था। स्पेन में उस समय लाखों किताबें मौजूद थीं, जिनमें हरफन की हजारों किताबें थी, परंतु उन लोगों का अमल बिगड़ा और रोजे-नमाज से दूर होने पर उन पर जवाल आ गया। इससे पूूर्व मुफ्ती हबीबुर्रहमान ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार बुखारी शरीफ की आखिरी हदीस पढ़ाई। मौके पर दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती हबीबुर्रहमान, मौलाना साजिद, मौलाना अतहर, महबूब नदवी, मौलाना आबिद, मौलाना साजिद, मौलाना इफ्तिखार, अधिवक्ता हाजी मुस्तफा और हाजी नसीम आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर राई स्थित मदरसा इस्लामिया मरकजुल इमाम रहमतुल्लाह अल कैरानवी की ओर से शुक्रवार को कस्बा कैराना के मोहल्ला अफगानान स्थित बारातघर में जलसे का आयोजन किया गया। जिसमें बुखारी शरीफ और हाफिज की उपाधि देकर छात्र छात्राओं की दस्तारबंदी की गई। मुख्य अतिथि हजरत मौलाना मुफ्ती मसूद अजीजी नदवी ने कहा कि जीवन की सफलता के लिए आधुनिक युग में अपने बच्चों को शिक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कयामत के दिन आमाल तोले जाएंगे, जिसमें अच्छाई और बुराइयों का हिसाब होगा। वहीं, हाफिज फुरकान ने कहा कि अंग्रेजों ने पवित्र कुरान को मिटाने का प्रयास किया तो उलमा खड़े हो गए तथा उन्होंने दारुल उलूम देवबंद कायम किया। इसके बाद पूरे देश में मदरसों का एक जाल फैल गया। मौलाना नूरुल हसन और राशिद कांधलवी ने कहा कि एक समय था, जब स्पेन में चारों और रोशनी थी और लंदन जैसे शहरों में अंधेरा था। स्पेन में उस समय लाखों किताबें मौजूद थीं, जिनमें हरफन की हजारों किताबें थी, परंतु उन लोगों का अमल बिगड़ा और रोजे-नमाज से दूर होने पर उन पर जवाल आ गया। इससे पूूर्व मुफ्ती हबीबुर्रहमान ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार बुखारी शरीफ की आखिरी हदीस पढ़ाई। मौके पर दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती हबीबुर्रहमान, मौलाना साजिद, मौलाना अतहर, महबूब नदवी, मौलाना आबिद, मौलाना साजिद, मौलाना इफ्तिखार, अधिवक्ता हाजी मुस्तफा और हाजी नसीम आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।