{"_id":"5a19b8414f1c1b78548bf3e2","slug":"21511635009-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व सांसद अख्तर हसन का इंतकाल, कैराना में शोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व सांसद अख्तर हसन का इंतकाल, कैराना में शोक
Updated Sun, 26 Nov 2017 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना (शामली)।
जिले की राजनीति में अलग ही मुकाम हासिल करने वाले हसन परिवार के मुखिया पूर्व सांसद चौधरी अख्तर हसन का शनिवार सुबह दिल्ली स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 87 वर्ष के थे। उनके निधन से कैराना में शोक व्याप्त हो गया।
गौरतलब है कि गत अक्तूबर माह में पैर फिसलकर गिरने के कारण चौधरी अख्तर हसन के कूल्हे की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। इसके बाद निमोनिया और फेफड़ों में इंफेक्शन की शिकायत पर उन्हें दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार पूर्वाह्न करीब साढे़ 11 बजे दिल्ली स्थित अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी सूचना मिलने पर कैराना कस्बे में शोक व्याप्त हो गया। मोहल्ला आलदरम्यान स्थित उनके आवास पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। दोपहर बाद उनका शव दिल्ली से कैराना लाया गया, जिसके बाद जनाजे की नमाज में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
अख्तर हसन का जीवन सफर
1930 में कैराना क्षेत्र के गांव जंधेडी में किसान फैयाज हसन उर्फ बुंदु के घर में जन्मे चौधरी अख्तर हसन ने क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया।
विज्ञापन
वे अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके दो बहनें भी थीं। कुछ साल बाद फैयाज हसन का परिवार कैराना के मोहल्ला आलदरम्यान में आकर रहने लगा था। उनकी पहली पत्नी वहीदन के कोई संतान नही होने के कारण उनका दूसरा निकाह मकसूदी हसन के साथ हुआ। जिससे उनको पांच पुत्र व तीन पुत्रियां थीं। 1969 में उन्होंने राजनीति में पहला कदम रखा और कैराना नगर पालिका के सभासद बने। 1970 में पिता फैयाज हसन की मौत के बाद 84 मुसलिम गुर्जर खाप के चौधरी बने।
इसके बाद 1971 और 1973 में दो बार चेयरमैन पद पर रहे। उन्होंने 1975 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की आजीवन सदस्यता ग्रहण की। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में कैराना लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने रिकार्ड एक लाख 27 हजार मतों से जीत हासिल की। फिर 1988 में अख्तर हसन ने अपनी राजनीतिक विरासत बडे़ पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन को सौंप दी थी।
परिवार का राजनीतिक सफरनामा
अख्तर हसन के सबसे बडे़ पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन ने राजनीतिक में इतिहास रचते हुए सबसे कम उम्र में चारों सदन के सदस्य बने थे। वह विधानसभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य, राज्यसभा सदस्य और लोकसभा सदस्य रहे। नौ दिसंबर 2008 में आगरा के पास सड़क हादसे में चौधरी मुनव्वर हसन की मौत हो गई थी। उस हादसे की वजह से अख्तर हसन को गहरा सदमा लगा था। 2009 में कैराना सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन सांसद चुनी गईं। इसके बाद 2014 के कैराना विधानसभा सीट के उपचुनाव में अख्तर हसन के पौत्र चौधरी नाहिद हसन विधायक बने तथा 2017 में विधानसभा चुनाव में भी कैराना सीट से वह विधायक चुने गए। वहीं, अख्तर हसन के पुत्र हाजी अनवर हसन इस बार नगर पालिका परिषद कैराना से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं।
हिरन पालने के शौकीन थे अख्तर
पूर्व सांसद चौधरी अख्तर हसन उर्दू भाषा से इंटर पास थे। उनको हिरन और कबूतर पालने का बहुत शौक था। अक्सर वह हिरन को साथ लेकर सुबह के समय टहलने निकल जाते थे। वह शाकाहारी भोजन ही पसंद करते थे। 1991 में अयोध्या मामले के बाद उनको हार्ट अटैक भी हुआ था। जिस कारण दिल्ली में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी।
विज्ञापन
जिले की राजनीति में अलग ही मुकाम हासिल करने वाले हसन परिवार के मुखिया पूर्व सांसद चौधरी अख्तर हसन का शनिवार सुबह दिल्ली स्थित अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह करीब 87 वर्ष के थे। उनके निधन से कैराना में शोक व्याप्त हो गया।
गौरतलब है कि गत अक्तूबर माह में पैर फिसलकर गिरने के कारण चौधरी अख्तर हसन के कूल्हे की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया था। इसके बाद निमोनिया और फेफड़ों में इंफेक्शन की शिकायत पर उन्हें दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार पूर्वाह्न करीब साढे़ 11 बजे दिल्ली स्थित अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। इसकी सूचना मिलने पर कैराना कस्बे में शोक व्याप्त हो गया। मोहल्ला आलदरम्यान स्थित उनके आवास पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए। दोपहर बाद उनका शव दिल्ली से कैराना लाया गया, जिसके बाद जनाजे की नमाज में लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
विज्ञापन
अख्तर हसन का जीवन सफर
1930 में कैराना क्षेत्र के गांव जंधेडी में किसान फैयाज हसन उर्फ बुंदु के घर में जन्मे चौधरी अख्तर हसन ने क्षेत्र की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल किया।
विज्ञापन
वे अपने पिता के इकलौते पुत्र थे। उनके दो बहनें भी थीं। कुछ साल बाद फैयाज हसन का परिवार कैराना के मोहल्ला आलदरम्यान में आकर रहने लगा था। उनकी पहली पत्नी वहीदन के कोई संतान नही होने के कारण उनका दूसरा निकाह मकसूदी हसन के साथ हुआ। जिससे उनको पांच पुत्र व तीन पुत्रियां थीं। 1969 में उन्होंने राजनीति में पहला कदम रखा और कैराना नगर पालिका के सभासद बने। 1970 में पिता फैयाज हसन की मौत के बाद 84 मुसलिम गुर्जर खाप के चौधरी बने।
इसके बाद 1971 और 1973 में दो बार चेयरमैन पद पर रहे। उन्होंने 1975 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की आजीवन सदस्यता ग्रहण की। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में कैराना लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए उन्होंने रिकार्ड एक लाख 27 हजार मतों से जीत हासिल की। फिर 1988 में अख्तर हसन ने अपनी राजनीतिक विरासत बडे़ पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन को सौंप दी थी।
परिवार का राजनीतिक सफरनामा
अख्तर हसन के सबसे बडे़ पुत्र चौधरी मुनव्वर हसन ने राजनीतिक में इतिहास रचते हुए सबसे कम उम्र में चारों सदन के सदस्य बने थे। वह विधानसभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य, राज्यसभा सदस्य और लोकसभा सदस्य रहे। नौ दिसंबर 2008 में आगरा के पास सड़क हादसे में चौधरी मुनव्वर हसन की मौत हो गई थी। उस हादसे की वजह से अख्तर हसन को गहरा सदमा लगा था। 2009 में कैराना सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन सांसद चुनी गईं। इसके बाद 2014 के कैराना विधानसभा सीट के उपचुनाव में अख्तर हसन के पौत्र चौधरी नाहिद हसन विधायक बने तथा 2017 में विधानसभा चुनाव में भी कैराना सीट से वह विधायक चुने गए। वहीं, अख्तर हसन के पुत्र हाजी अनवर हसन इस बार नगर पालिका परिषद कैराना से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ रहे हैं।
हिरन पालने के शौकीन थे अख्तर
पूर्व सांसद चौधरी अख्तर हसन उर्दू भाषा से इंटर पास थे। उनको हिरन और कबूतर पालने का बहुत शौक था। अक्सर वह हिरन को साथ लेकर सुबह के समय टहलने निकल जाते थे। वह शाकाहारी भोजन ही पसंद करते थे। 1991 में अयोध्या मामले के बाद उनको हार्ट अटैक भी हुआ था। जिस कारण दिल्ली में उनकी बाईपास सर्जरी हुई थी।