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पेयजल स्वच्छ नहीं, शौचालय में गंदगी, यह है थानाभवन सीएचसी
Updated Wed, 09 May 2018 11:16 PM IST
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अस्पताल में मिली खामियां ही खामियां
थानाभवन। शासन के निर्देश के बाद कस्बे के सामुदायिक चिकित्सालय का निरीक्षण करनी पहुंची राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम को अस्पताल में अव्यवस्थाएं मिली। चिकित्सालय में ना तो मरीजों के स्वच्छ पेयजल मिला और ना ही डिलीवरी रूम में शौचालय। इस पर अफसरों ने संबंधित स्टाफ को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
बुधवार सुबह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्टेट आशा कोआर्डिनेटर बलराम तिवारी, एनएचएम के सलाहकार अरविंद त्रिपाठी, डीसीपीएम शामली फहीम अहमद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सबसे पहले टीम अस्पताल के लेबर रूम में पहुंची, जहां तमाम अव्यवस्थाएं मिली। गर्भवती महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं मिली। महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। साथ ही 102 सेवा से चिकित्सालय लाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं और उन्हें घर छोड़ने का कोई रिकार्ड मेंटेन नहीं किया गया। गर्भवती महिलाओं के लिए तैयार की गई कैंटीन का भी कोई शेड्यूल नहीं मिला। यहां न ही महिलाओं को समय से नाश्ता कराया जा रहा और न खाना। निरीक्षण में तीन चिकित्सक लंबे समय से नदारद मिले। महिला वार्ड की पड़ताल करने के बाद टीम ने चिकित्सकों व स्टॉफ की हाजिरी के रजिस्टर की जांच की। अनुपस्थित चिकित्सकों को नोटिस भेजने व उक्त मामले को आला अफसरों तक पहुंचाने की बात कही।
286 महिलाओं को नहीं मिला लाभ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को बतौर प्रोत्साहन 1400 रुपये दिए जाते हैं। अस्पताल की ओर से पिछले साल की 250 महिलाओं को अब तक लाभान्वित नहीं किया गया है, जबकि इस साल की भी अभी 36 महिलाएं सरकारी अस्पताल के चक्कर काट रही हैं। इस पर टीम ने सभी लाभार्थियों को लाभ देने के निर्देश दिए।
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पैसे खर्च, पार्क की जगह खड़ी झाड़ियां
निरीक्षण के दौरान टीम को पता चला कि ओडीएफ के तहत चिकित्सालय में विभिन्न कार्यों के साथ पार्क का निर्माण व शुद्ध पानी के लिए आरओ लगाया जाना था। चिकित्सालय प्रशासन ने कागजों में पार्क बनना दिखाया है, जबकि मौके पर पार्क की जगह सिर्फ झाड़ियां खड़ी हैं और गंदगी फैली है। यही नहीं, शुद्ध पानी की भी अब तक व्यवस्था नहीं की गई।
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थानाभवन। शासन के निर्देश के बाद कस्बे के सामुदायिक चिकित्सालय का निरीक्षण करनी पहुंची राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीम को अस्पताल में अव्यवस्थाएं मिली। चिकित्सालय में ना तो मरीजों के स्वच्छ पेयजल मिला और ना ही डिलीवरी रूम में शौचालय। इस पर अफसरों ने संबंधित स्टाफ को फटकार लगाते हुए व्यवस्थाओं को तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
बुधवार सुबह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के स्टेट आशा कोआर्डिनेटर बलराम तिवारी, एनएचएम के सलाहकार अरविंद त्रिपाठी, डीसीपीएम शामली फहीम अहमद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सबसे पहले टीम अस्पताल के लेबर रूम में पहुंची, जहां तमाम अव्यवस्थाएं मिली। गर्भवती महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं मिली। महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। साथ ही 102 सेवा से चिकित्सालय लाई जाने वाली गर्भवती महिलाओं और उन्हें घर छोड़ने का कोई रिकार्ड मेंटेन नहीं किया गया। गर्भवती महिलाओं के लिए तैयार की गई कैंटीन का भी कोई शेड्यूल नहीं मिला। यहां न ही महिलाओं को समय से नाश्ता कराया जा रहा और न खाना। निरीक्षण में तीन चिकित्सक लंबे समय से नदारद मिले। महिला वार्ड की पड़ताल करने के बाद टीम ने चिकित्सकों व स्टॉफ की हाजिरी के रजिस्टर की जांच की। अनुपस्थित चिकित्सकों को नोटिस भेजने व उक्त मामले को आला अफसरों तक पहुंचाने की बात कही।
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286 महिलाओं को नहीं मिला लाभ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को बतौर प्रोत्साहन 1400 रुपये दिए जाते हैं। अस्पताल की ओर से पिछले साल की 250 महिलाओं को अब तक लाभान्वित नहीं किया गया है, जबकि इस साल की भी अभी 36 महिलाएं सरकारी अस्पताल के चक्कर काट रही हैं। इस पर टीम ने सभी लाभार्थियों को लाभ देने के निर्देश दिए।
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पैसे खर्च, पार्क की जगह खड़ी झाड़ियां
निरीक्षण के दौरान टीम को पता चला कि ओडीएफ के तहत चिकित्सालय में विभिन्न कार्यों के साथ पार्क का निर्माण व शुद्ध पानी के लिए आरओ लगाया जाना था। चिकित्सालय प्रशासन ने कागजों में पार्क बनना दिखाया है, जबकि मौके पर पार्क की जगह सिर्फ झाड़ियां खड़ी हैं और गंदगी फैली है। यही नहीं, शुद्ध पानी की भी अब तक व्यवस्था नहीं की गई।