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भाजपा को चुनौती देगी बसपा-सपा की दोस्ती
Updated Sun, 25 Mar 2018 12:48 AM IST
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भाजपा को चुनौती देगी बसपा-सपा की दोस्ती
शामली। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव से प्रारंभ हुई समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की दोस्ती आगे भी बरकरार रहेगी। बसपा अध्यक्ष ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। जाहिर है कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी दोस्ती कायम रहेगी, जो भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी के चलते कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दल गुणा-भाग करने में जुट गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बसपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और सपा उसका समर्थन करेगी। यह बात अलग है कि अभी तक दोनों में से किसी भी पार्टी ने यह तय नहीं किया है। हालांकि इस लोकसभा उपचुनाव को लेकर कयासबाजी प्रारंभ हो गई है। यदि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बसपा मैदान में आएगी, तो उसका प्रत्याशी कौन होगा। क्या किसी मुसलिम चेहरे को प्रत्याशी बनाया जाएगा या फिर जातीय समीकरण साधने के लिए दलित अथवा पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी उतारा जाएगा। दरअसल, कैराना लोकसभा सीट में शामली जिले की कैराना, थानाभवन और शामली तथा सहारनपुर जिले की नकुड़ और गंगोह विधानसभा सीट शामिल हैं। जातीय समीकरण की बात करें, तो गुर्जर, मुसलिम, जाट और दलित वोटर इस लोकसभा सीट के चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं। यदि बसपा का प्रत्याशी चुनाव लड़ता है और सपा उसका समर्थन करती है, तो दलित और मुसलिम वोटरों के भरोसे चुनावी नैया पार लगाने का प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह जीते थे। तीन फरवरी को ही हुकुम सिंह का निधन हुआ, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई। अब उपचुनाव में भाजपा इस सीट को अपने पास ही रखना चाहेगी। भाजपा का टिकट पाने के लिए अन्य नेता भी लाइन में लगे हैं, लेकिन सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद सहानुभूति के चलते मृगांका सिंह को टिकट मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही हैं। इसी के चलते मृगांका सिंह चुनावी तैयारी में जुटी हुई हैं। शामली जिले के साथ ही सहारनपुर जिले में भी कार्यक्रमों में पहुंच रही हैं तथा अन्य अवसरों पर उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
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रालोद की चाल से दिलचस्प होगा मुकाबला
कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद भी पूरे दमखम से उतरने की तैयारी में है। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष सहारनपुर के गंगोह में कार्यक्रम के दौरान कह चुके हैं कि कैराना लोकसभा उपचुनाव में किसी दल से गठबंधन हो या नहीं, रालोद प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी इस सीट पर प्रत्याशी हो सकते हैं। ऐसे में कैराना सीट का उपचुनाव बेहद दिलचस्प हो जाएगा। क्योंकि मुसलिम-जाट गठजोड़ के सहारे रालोद इस सीट को जीतने की पूरा प्रयास करेगी। इसके चलते रालोद अध्यक्ष अजित सिंह भी शामली आकर कई कार्यक्रम कर चुके हैं तथा पूर्व सांसद अमीर आलम खान, पूर्व चेयरमैन अशरफ अली खान सहित कई नेताओं को रालोद में शामिल किया गया है।
सपा-बसपा की स्थिति देख रही कांग्रेस
कैराना सीट के उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस इसी इंतजार में है कि सपा और बसपा की क्या स्थिति रहेगी। माना जा रहा है कि यदि बसपा और सपा का संयुक्त प्रत्याशी चुनाव में उतरता है, तो कांग्रेस समर्थन कर सकती है और अगर गठबंधन नहीं हुआ तो कांग्रेस भी अपना प्रत्याशी उतारेगी। इसका फैसला पार्टी हाईकमान को लेना है।
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शामली। फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव से प्रारंभ हुई समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की दोस्ती आगे भी बरकरार रहेगी। बसपा अध्यक्ष ने इसको लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। जाहिर है कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी दोस्ती कायम रहेगी, जो भाजपा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। इसी के चलते कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दल गुणा-भाग करने में जुट गए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बसपा अपना प्रत्याशी उतारेगी और सपा उसका समर्थन करेगी। यह बात अलग है कि अभी तक दोनों में से किसी भी पार्टी ने यह तय नहीं किया है। हालांकि इस लोकसभा उपचुनाव को लेकर कयासबाजी प्रारंभ हो गई है। यदि कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बसपा मैदान में आएगी, तो उसका प्रत्याशी कौन होगा। क्या किसी मुसलिम चेहरे को प्रत्याशी बनाया जाएगा या फिर जातीय समीकरण साधने के लिए दलित अथवा पिछड़ा वर्ग का प्रत्याशी उतारा जाएगा। दरअसल, कैराना लोकसभा सीट में शामली जिले की कैराना, थानाभवन और शामली तथा सहारनपुर जिले की नकुड़ और गंगोह विधानसभा सीट शामिल हैं। जातीय समीकरण की बात करें, तो गुर्जर, मुसलिम, जाट और दलित वोटर इस लोकसभा सीट के चुनाव परिणामों को प्रभावित करते हैं। यदि बसपा का प्रत्याशी चुनाव लड़ता है और सपा उसका समर्थन करती है, तो दलित और मुसलिम वोटरों के भरोसे चुनावी नैया पार लगाने का प्रयास किया जाएगा।
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गौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर भाजपा प्रत्याशी हुकुम सिंह जीते थे। तीन फरवरी को ही हुकुम सिंह का निधन हुआ, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई। अब उपचुनाव में भाजपा इस सीट को अपने पास ही रखना चाहेगी। भाजपा का टिकट पाने के लिए अन्य नेता भी लाइन में लगे हैं, लेकिन सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद सहानुभूति के चलते मृगांका सिंह को टिकट मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही हैं। इसी के चलते मृगांका सिंह चुनावी तैयारी में जुटी हुई हैं। शामली जिले के साथ ही सहारनपुर जिले में भी कार्यक्रमों में पहुंच रही हैं तथा अन्य अवसरों पर उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
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रालोद की चाल से दिलचस्प होगा मुकाबला
कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद भी पूरे दमखम से उतरने की तैयारी में है। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष सहारनपुर के गंगोह में कार्यक्रम के दौरान कह चुके हैं कि कैराना लोकसभा उपचुनाव में किसी दल से गठबंधन हो या नहीं, रालोद प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा। रालोद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी इस सीट पर प्रत्याशी हो सकते हैं। ऐसे में कैराना सीट का उपचुनाव बेहद दिलचस्प हो जाएगा। क्योंकि मुसलिम-जाट गठजोड़ के सहारे रालोद इस सीट को जीतने की पूरा प्रयास करेगी। इसके चलते रालोद अध्यक्ष अजित सिंह भी शामली आकर कई कार्यक्रम कर चुके हैं तथा पूर्व सांसद अमीर आलम खान, पूर्व चेयरमैन अशरफ अली खान सहित कई नेताओं को रालोद में शामिल किया गया है।
सपा-बसपा की स्थिति देख रही कांग्रेस
कैराना सीट के उपचुनाव को लेकर कांग्रेस ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कांग्रेस इसी इंतजार में है कि सपा और बसपा की क्या स्थिति रहेगी। माना जा रहा है कि यदि बसपा और सपा का संयुक्त प्रत्याशी चुनाव में उतरता है, तो कांग्रेस समर्थन कर सकती है और अगर गठबंधन नहीं हुआ तो कांग्रेस भी अपना प्रत्याशी उतारेगी। इसका फैसला पार्टी हाईकमान को लेना है।