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ऊन ब्लाक में अश्व प्रजाति के तीन पशुओ को दी दर्द रहित मौत
Updated Mon, 27 Nov 2017 12:02 AM IST
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ऊन ब्लाक में अश्व प्रजाति के तीन पशुओं को दी दर्द रहित मौत
शामली। ऊन ब्लाक के अश्व प्रजातियों के ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त तीन पशुओं को पशुपालन विभाग की टीम की मौजूदगी में दर्द रहित मौत दी गई।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर राजेश कुमार ने बताया कि ऊन ब्लाक के ग्राम डेरा लालसिंह में दो टट्टूओं व चौसाना में एक घोड़ी ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त पाए गए थे। पशुपालन विभाग के निदेशक से अनुमति लिए जाने के बाद रविवार को डॉक्टरों की टीम ने डेरा लाल सिंह गांव में पहुंचकर दो ट्टुओं व चौसाना में एक घोड़ी को यूथिनेसिया दर्द रहित मौत दिया गया। डॉक्टर हिमांशु शर्मा, डॉक्टर नेमपाल, सत्यपाल आदि की उपस्थिति में इन पशुओं को यूथिनेसिया दिया गया। सीबीओ ने ग्लैंडर एक जीवाणु बर्कहोल्डेरिया मेलियाइ जनित अश्व प्रजाति के पशुओं जैसे घोड़ा, गधा, खच्चर आदि में बीमारी पाई जाती है, जिसका इलाज संभव नहीं है। इसलिए बीमार पशुओं को एनिमल्स एक्ट, 2009 के तहत यूथिनेसिया दिया जाता है। यह बीमारी सांसर्गिक रोग है तथा जूनोटिक प्रकृति का है, जो कि मनुष्यों में भी फ़ैल सकता है। यह रोग पशुओं में दूषित चारा व पानी ग्रहण करने से होता है। बीमार पशु के संपर्क में आने पर त्वचा की खरोंच या साँस के द्वारा यह जीवाणु स्वस्थ पशु या मनुष्य में प्रवेश करता है। इस बीमारी में पशु को तेज बुखार का आना, नाक से पानी आना जिसका बाद में गाढ़ा पीला हो जाना तथा त्वचा पर गांठें पड़ जाना व सांस का तेज चलना शुरू हो जाता है। ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त अश्वों को मौत दी जाती है। इस बीमारी का कोई उपचार न होने के कारण केवल रोकथाम की जा सकती है। इन पशुओं के ब्लड सैंपल प्रदेश सरकार के निर्देशन में मासिक तौर पर राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे जाते हैं। इस केंद्र के द्वारा इन पशुओं को ग्लैंडर घनात्मक बीमारी घोषित किए जाता है। बाद में प्रदेश पशु पालन विभाग के निदेशक की अनुमति लेने के संबंधी पशुओं को मौत दी जाती है।
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शामली। ऊन ब्लाक के अश्व प्रजातियों के ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त तीन पशुओं को पशुपालन विभाग की टीम की मौजूदगी में दर्द रहित मौत दी गई।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर राजेश कुमार ने बताया कि ऊन ब्लाक के ग्राम डेरा लालसिंह में दो टट्टूओं व चौसाना में एक घोड़ी ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त पाए गए थे। पशुपालन विभाग के निदेशक से अनुमति लिए जाने के बाद रविवार को डॉक्टरों की टीम ने डेरा लाल सिंह गांव में पहुंचकर दो ट्टुओं व चौसाना में एक घोड़ी को यूथिनेसिया दर्द रहित मौत दिया गया। डॉक्टर हिमांशु शर्मा, डॉक्टर नेमपाल, सत्यपाल आदि की उपस्थिति में इन पशुओं को यूथिनेसिया दिया गया। सीबीओ ने ग्लैंडर एक जीवाणु बर्कहोल्डेरिया मेलियाइ जनित अश्व प्रजाति के पशुओं जैसे घोड़ा, गधा, खच्चर आदि में बीमारी पाई जाती है, जिसका इलाज संभव नहीं है। इसलिए बीमार पशुओं को एनिमल्स एक्ट, 2009 के तहत यूथिनेसिया दिया जाता है। यह बीमारी सांसर्गिक रोग है तथा जूनोटिक प्रकृति का है, जो कि मनुष्यों में भी फ़ैल सकता है। यह रोग पशुओं में दूषित चारा व पानी ग्रहण करने से होता है। बीमार पशु के संपर्क में आने पर त्वचा की खरोंच या साँस के द्वारा यह जीवाणु स्वस्थ पशु या मनुष्य में प्रवेश करता है। इस बीमारी में पशु को तेज बुखार का आना, नाक से पानी आना जिसका बाद में गाढ़ा पीला हो जाना तथा त्वचा पर गांठें पड़ जाना व सांस का तेज चलना शुरू हो जाता है। ग्लैंडर बीमारी से ग्रस्त अश्वों को मौत दी जाती है। इस बीमारी का कोई उपचार न होने के कारण केवल रोकथाम की जा सकती है। इन पशुओं के ब्लड सैंपल प्रदेश सरकार के निर्देशन में मासिक तौर पर राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे जाते हैं। इस केंद्र के द्वारा इन पशुओं को ग्लैंडर घनात्मक बीमारी घोषित किए जाता है। बाद में प्रदेश पशु पालन विभाग के निदेशक की अनुमति लेने के संबंधी पशुओं को मौत दी जाती है।