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चले गए जो वीर, लौटकर वो आएंगे नहीं
Updated Mon, 21 Aug 2017 02:11 AM IST
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चले गए जो वीर, लौटकर वो आएंगे नहीं...
शामली। साहित्यिक संस्था कारवां की ओर से एक शाम वतन के नाम विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवि और शायरों ने एक से बढ़कर एक रचना पेश करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शनिवार रात टंकी रोड स्थित बैंक्वेट हाल में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अजय संगल ने की। मुख्य अतिथि विजय कौशिक , विशिष्ठ अतिथि रजनीश नामदेव और विपिन चंदेलिया ने शुभारंभ किया। गीतकार राजेंद्र राजन ने पढ़ा- आने वाले हैं शिकारी मेरे गांव में, ये जनता है दुखानों की मारी मेरे गांव में। देवबंद से आए शायर जावेद आसी ने पढ़ा- मैं हिंदू और मुसलिम सिख ईसाई का सैदाई, यहीं पर आंख खोली हैं यहीं पर प रवरिश पाई, मैं चिश्ती, नानकों, गौतम की पाकीजा निशानी हूं, मैं इक हिंदुस्तानी हूं, मैं इक हिंदुस्तानी हूं। शायर प्रदीप मायूस ने पढ़ा- मेरा होकर मेरा सर काटता है वो मेरी बात अक्सर काटता है, कई दिन से मेरेे बच्चे हैं भूखे, अगर घर जाऊं तो घर काटता है। गजलकार अरशद जिया मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा- मुद्दत के बाद भाई की कुरबत हुई नसीब, अच्छा हुआ कि सहन की दीवार गिर गई। मेरठ से आई कवियत्री डाक्टर शुभम त्यागी ने पढ़ा- चले गए जो वीर लौटकर वो आएंगे नहीं, बसा लो अपनी यादों में, यादों से जाएंगे नहीं।
दिल्ली से आए गीतकार डॉक्टर जय सिंह आर्य ने पढ़ा- भारत मां का दिल जो दुखाए वो शिक्षा स्वीकार नहीं, जो दुश्मन के गुण गाए वो शिक्षा स्वीकार नहीं। कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने पढ़ा- मुझसे मेरी लाडली पूछे एक सवाल, पापा मेरा क्यूं भला इतना करे ख्याल। सहारनपुर से आए शायर जसवीर तन्हा ने पढ़ा- शादी होते ही बेटा अलग हो गया, बूढ़ी मां रोटियां सेंकती रह गई। गीतकार पवन कुमार पवन और देहरादून से आए ओजस्वी कवि श्रीकांत श्री ने देश की स्थिति पर उत्कृष्ट काव्य पाठ कर देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
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कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप मायूस की तरफ से कवियों और शायरों को तहसीलदार राकेश त्यागी ने सम्मानित किया। संचालन गाजियाबाद से आए युवा कवि कुशल कुशवाहा ने किया। इस दौरान पंडित अजय पाठक, डॉक्टर विपिन कौशिक, वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, पंडित दिनेश पाठक, घनश्याम पारचा, सरदार मनजीत सिंह, सरदार राजेंद्र सिंह, प्रवीण कुमार, देवेंद्र धींगान, श्रवण कुमार, देवराज, कपिल पाठक, नवीन जैन, कुबेरदत्त शर्मा, रोबिन गर्ग, डॉक्टर अनुराग शर्मा, जाकिर, आरिफ हवारी, मोहन सारस्वत और वासू आदि मौजूद रहे।
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शामली। साहित्यिक संस्था कारवां की ओर से एक शाम वतन के नाम विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवि और शायरों ने एक से बढ़कर एक रचना पेश करके श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शनिवार रात टंकी रोड स्थित बैंक्वेट हाल में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता अजय संगल ने की। मुख्य अतिथि विजय कौशिक , विशिष्ठ अतिथि रजनीश नामदेव और विपिन चंदेलिया ने शुभारंभ किया। गीतकार राजेंद्र राजन ने पढ़ा- आने वाले हैं शिकारी मेरे गांव में, ये जनता है दुखानों की मारी मेरे गांव में। देवबंद से आए शायर जावेद आसी ने पढ़ा- मैं हिंदू और मुसलिम सिख ईसाई का सैदाई, यहीं पर आंख खोली हैं यहीं पर प रवरिश पाई, मैं चिश्ती, नानकों, गौतम की पाकीजा निशानी हूं, मैं इक हिंदुस्तानी हूं, मैं इक हिंदुस्तानी हूं। शायर प्रदीप मायूस ने पढ़ा- मेरा होकर मेरा सर काटता है वो मेरी बात अक्सर काटता है, कई दिन से मेरेे बच्चे हैं भूखे, अगर घर जाऊं तो घर काटता है। गजलकार अरशद जिया मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा- मुद्दत के बाद भाई की कुरबत हुई नसीब, अच्छा हुआ कि सहन की दीवार गिर गई। मेरठ से आई कवियत्री डाक्टर शुभम त्यागी ने पढ़ा- चले गए जो वीर लौटकर वो आएंगे नहीं, बसा लो अपनी यादों में, यादों से जाएंगे नहीं।
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दिल्ली से आए गीतकार डॉक्टर जय सिंह आर्य ने पढ़ा- भारत मां का दिल जो दुखाए वो शिक्षा स्वीकार नहीं, जो दुश्मन के गुण गाए वो शिक्षा स्वीकार नहीं। कवि योगेंद्र सुंदरियाल ने पढ़ा- मुझसे मेरी लाडली पूछे एक सवाल, पापा मेरा क्यूं भला इतना करे ख्याल। सहारनपुर से आए शायर जसवीर तन्हा ने पढ़ा- शादी होते ही बेटा अलग हो गया, बूढ़ी मां रोटियां सेंकती रह गई। गीतकार पवन कुमार पवन और देहरादून से आए ओजस्वी कवि श्रीकांत श्री ने देश की स्थिति पर उत्कृष्ट काव्य पाठ कर देर रात तक श्रोताओं को बांधे रखा।
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कार्यक्रम के संयोजक प्रदीप मायूस की तरफ से कवियों और शायरों को तहसीलदार राकेश त्यागी ने सम्मानित किया। संचालन गाजियाबाद से आए युवा कवि कुशल कुशवाहा ने किया। इस दौरान पंडित अजय पाठक, डॉक्टर विपिन कौशिक, वैद्य उपेंद्र द्विवेदी, पंडित दिनेश पाठक, घनश्याम पारचा, सरदार मनजीत सिंह, सरदार राजेंद्र सिंह, प्रवीण कुमार, देवेंद्र धींगान, श्रवण कुमार, देवराज, कपिल पाठक, नवीन जैन, कुबेरदत्त शर्मा, रोबिन गर्ग, डॉक्टर अनुराग शर्मा, जाकिर, आरिफ हवारी, मोहन सारस्वत और वासू आदि मौजूद रहे।