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शब ए बारात आज, इबादत से माफ होंगे गुनाह
Updated Tue, 01 May 2018 12:17 AM IST
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हजार रातों से बेहतर है शब-ए-बरात की रात
कैराना।
खुदा की बारगाह में खुद को समर्पित कर देने वाला महीना पवित्र रमजान-उल-मुबारक पंद्रह दिन बाद शुरू होने जा रहा है। मंगलवार को शब-ए-बरात की रात होगी।
पानीपत रोड स्थित मदरसा इशातुल इस्लाम के सदर मौलाना बरकतुल्ला अमीनी और मौलाना मुरसलीन अहमद खेडवी ने बताया कि मंगलवार को शब-ए-बरात है। इस दौरान इबादत करने वाले अकीदतमंदों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। नेकियां लिखी जाती हैं। कुछ लोग रोजा भी रखते हैं और नफिल नमाजें भी अदा की जाती है। इस रात लोग उन लोगों के लिए भी दुआ करते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके गुनाहों की मगफिरत के लिए भी कब्रिस्तान व मस्जिदों में जाकर दुआएं होती हैं। उन्होंने बताया कि इस्लाम में इस रात की बहुत अहमियत है। शब यानी रात, यह रात इबादत की रात है। जब अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है और दिन में रोजा रखा जाता है। बंदों के पास यह एक मौका होता है, अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगने का। इसीलिए पूरी रात जागकर लोग इबादत करते हैं और दुआएं मांगते हैं।
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कैराना।
खुदा की बारगाह में खुद को समर्पित कर देने वाला महीना पवित्र रमजान-उल-मुबारक पंद्रह दिन बाद शुरू होने जा रहा है। मंगलवार को शब-ए-बरात की रात होगी।
पानीपत रोड स्थित मदरसा इशातुल इस्लाम के सदर मौलाना बरकतुल्ला अमीनी और मौलाना मुरसलीन अहमद खेडवी ने बताया कि मंगलवार को शब-ए-बरात है। इस दौरान इबादत करने वाले अकीदतमंदों के गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। नेकियां लिखी जाती हैं। कुछ लोग रोजा भी रखते हैं और नफिल नमाजें भी अदा की जाती है। इस रात लोग उन लोगों के लिए भी दुआ करते हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके गुनाहों की मगफिरत के लिए भी कब्रिस्तान व मस्जिदों में जाकर दुआएं होती हैं। उन्होंने बताया कि इस्लाम में इस रात की बहुत अहमियत है। शब यानी रात, यह रात इबादत की रात है। जब अपने गुनाहों की माफी मांगी जाती है और दिन में रोजा रखा जाता है। बंदों के पास यह एक मौका होता है, अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगने का। इसीलिए पूरी रात जागकर लोग इबादत करते हैं और दुआएं मांगते हैं।