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जहानपुरा में पैर पसार रहा हेपेटाईटिस सी, एक की मौत
Updated Tue, 12 Sep 2017 12:27 AM IST
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कैराना (शामली)।
अलीपुर, मन्नामाजरा के बाद अब गांव जहानपुरा में हेपेटाइटिस सी ने ग्रामीणों को जकड़ लिया है। गांव में करीब एक सौ से अधिक लोग इससे पीड़ित है। महंगा इलाज तथा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पीड़ित मरीज घुट-घुटकर जीने को मजबूर है। वहीं, सोमवार को एक ग्रामीण ने इस गंभीर बीमारी के चलते दम तोड़ दिया।
कैराना क्षेत्र के गांव जहानपुरा में हेपटाइटिस सी पांव पसार रहा है। गांव से कई महिलाएं तथा पुरुष इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। सभी अपना इलाज निजी चिकित्सालयों में करा रहे है। शेरजंग ( 50 ) पिछले कई माह से हेपटाइटिस सी का उपचार शामली के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में करा रहा था। उपचार के दौरान सोमवार सुबह छह बजे शेरजंग की मौत हो गई। शेरजंग की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। दोपहर बाद शेरजंग के शव को कब्रिस्तान में सपुर्द ए खाक कर दिया गया। शेरजंग की मौत की खबर मिलने पर गांव में पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब गांव के लोगों का हाल जाना, तो स्थिति गंभीर निकली। गांव निवासी महिला शकुंतला ने बताया कि उसे कई माह से हेपटाइटिस सी है। वह चंडीगढ़ पीजीआई अस्पताल से अपना उपचार करा रही हैं। प्राइवेट डाक्टर नें इंजेक्शन का खर्चा 36 हजार रुपये बताया था।
प्रेम सिंह की पत्नी शिक्षा ने बताया कि गांव में तीन माह पहले करनाल से एनजीओ के डॉक्टरों ने गांव में आकर जांच की थी, इसमें उसे हेपटाइटिस सी की पुष्टि हुई थी, लेकिन महंगा उपचार कराने की उनकी हैसियत नहीं हैं।
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गांव की रहीसा ने बताया कि उसे भी तीन माह पहले एनजीओ के डाक्टरों ने हेपटाइटिस सी बताया था। उसने भी पैसों की कमी के चलते कोई दवाई नहीं ली। ग्रामीण पंठी की पत्नी बिमला ने बताया कि एनजीओ ने जांच में हेपटाइटिस सी की पुष्टि की थी, लेकिन उपचार महंगा है, जिसके चलते वह अपना उपचार नहीं करा सकी।
मदरसे के अध्यापक मौलाना कासिम ने 15 दिन पहले शामली स्थित एक लैब में जांच कराई, तो उसमें भी हेपटाइटिस सी का पता चला। वह गंगोह में एक डाक्टर से अपना उपचार करा रहे है। मदरसे के दूसरे अध्यापक मौलाना फरमान ने बताया कि उसने 20 दिन पहले हाथ का आपरेशन कराया था। आप्रेशन से पहले हुई ब्लड की जांच में हेपटाइटिस सी की पुष्टि हुई थी। अब वो हाथ ठीक होने के बाद हेपटाइटिस सी का उपचार कराएंगे। उधर, पूर्व राज्यमंत्री रियासत राणा को भी हेपटाइटिस सी है, जिसका उपचार वे हरियाणा के सोनीपत जिले में करा रहे है। साथ ही गांव के सलीम मास्टर, वासिल, नौशाद, आरिफ आदि दर्जनो लोग हेपटाइटिस सी से ग्रसित है।
दूषित पानी को कारण बताते हैं ग्रामीण
गांव में दर्जनों लोग इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके कारण का कुछ पता नहीं है। जहां एक ओर डाक्टर पानी को इस बीमारी का कारण नहीं मानते है, वहीं हेपेटाइटिस सी का कारण प्रधान पुत्र इंतजार अली व जाबिर हसन का कहना गांव में पीने का पानी विषैला होने को इसका कारण मानते हैं।
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अलीपुर, मन्नामाजरा के बाद अब गांव जहानपुरा में हेपेटाइटिस सी ने ग्रामीणों को जकड़ लिया है। गांव में करीब एक सौ से अधिक लोग इससे पीड़ित है। महंगा इलाज तथा आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण पीड़ित मरीज घुट-घुटकर जीने को मजबूर है। वहीं, सोमवार को एक ग्रामीण ने इस गंभीर बीमारी के चलते दम तोड़ दिया।
कैराना क्षेत्र के गांव जहानपुरा में हेपटाइटिस सी पांव पसार रहा है। गांव से कई महिलाएं तथा पुरुष इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। सभी अपना इलाज निजी चिकित्सालयों में करा रहे है। शेरजंग ( 50 ) पिछले कई माह से हेपटाइटिस सी का उपचार शामली के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में करा रहा था। उपचार के दौरान सोमवार सुबह छह बजे शेरजंग की मौत हो गई। शेरजंग की मौत पर परिजनों में कोहराम मच गया। दोपहर बाद शेरजंग के शव को कब्रिस्तान में सपुर्द ए खाक कर दिया गया। शेरजंग की मौत की खबर मिलने पर गांव में पहुंची अमर उजाला की टीम ने जब गांव के लोगों का हाल जाना, तो स्थिति गंभीर निकली। गांव निवासी महिला शकुंतला ने बताया कि उसे कई माह से हेपटाइटिस सी है। वह चंडीगढ़ पीजीआई अस्पताल से अपना उपचार करा रही हैं। प्राइवेट डाक्टर नें इंजेक्शन का खर्चा 36 हजार रुपये बताया था।
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प्रेम सिंह की पत्नी शिक्षा ने बताया कि गांव में तीन माह पहले करनाल से एनजीओ के डॉक्टरों ने गांव में आकर जांच की थी, इसमें उसे हेपटाइटिस सी की पुष्टि हुई थी, लेकिन महंगा उपचार कराने की उनकी हैसियत नहीं हैं।
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गांव की रहीसा ने बताया कि उसे भी तीन माह पहले एनजीओ के डाक्टरों ने हेपटाइटिस सी बताया था। उसने भी पैसों की कमी के चलते कोई दवाई नहीं ली। ग्रामीण पंठी की पत्नी बिमला ने बताया कि एनजीओ ने जांच में हेपटाइटिस सी की पुष्टि की थी, लेकिन उपचार महंगा है, जिसके चलते वह अपना उपचार नहीं करा सकी।
मदरसे के अध्यापक मौलाना कासिम ने 15 दिन पहले शामली स्थित एक लैब में जांच कराई, तो उसमें भी हेपटाइटिस सी का पता चला। वह गंगोह में एक डाक्टर से अपना उपचार करा रहे है। मदरसे के दूसरे अध्यापक मौलाना फरमान ने बताया कि उसने 20 दिन पहले हाथ का आपरेशन कराया था। आप्रेशन से पहले हुई ब्लड की जांच में हेपटाइटिस सी की पुष्टि हुई थी। अब वो हाथ ठीक होने के बाद हेपटाइटिस सी का उपचार कराएंगे। उधर, पूर्व राज्यमंत्री रियासत राणा को भी हेपटाइटिस सी है, जिसका उपचार वे हरियाणा के सोनीपत जिले में करा रहे है। साथ ही गांव के सलीम मास्टर, वासिल, नौशाद, आरिफ आदि दर्जनो लोग हेपटाइटिस सी से ग्रसित है।
दूषित पानी को कारण बताते हैं ग्रामीण
गांव में दर्जनों लोग इस खतरनाक बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन इसके कारण का कुछ पता नहीं है। जहां एक ओर डाक्टर पानी को इस बीमारी का कारण नहीं मानते है, वहीं हेपेटाइटिस सी का कारण प्रधान पुत्र इंतजार अली व जाबिर हसन का कहना गांव में पीने का पानी विषैला होने को इसका कारण मानते हैं।