{"_id":"59cbf0324f1c1b6e548b4c26","slug":"161506537522-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मामौर झील की पैमाइश करने पहुंची टीम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मामौर झील की पैमाइश करने पहुंची टीम
Updated Thu, 28 Sep 2017 12:43 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैराना।
डीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने हलका लेखपालों की टीम के साथ मामौर झील का निरीक्षण किया। मामौर झील के रकबे की पैमाइश कराने के साथ ही झील की जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे की जांच की। साथ ही झील के पानी की निकासी के बिंदुओं पर भी गहराई से जांच की गई।
डीएम ने मंगलवार को ही कलक्ट्रेट में बैठक कर मामौर झील के सुंदरीकरण और जल प्रबंधन पर रिपोर्ट तैयार कराने का निर्देश दिया था। इसके चलते बुधवार को तहसीलदार अभय राज पांडेय ने चार लेखपालों की टीम के साथ मामौर झील पर पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम के पास मामौर झील का राजस्व रिकार्ड भी था। टीम ने मामौर झील की पैमाईश करने के साथ ही झील में पानी के ओवरफ्लो होने के समय प्रभावित होने वाले किसानों की जमीन भी देखी। तहसीलदार अभय राज पांडेय ने बताया कि मामौर झील की पैमाइश की गई। मामौर झील का राजस्व रिकार्ड में रकबा 40 हेक्टेयर है तथा बंजर जमीन का रकबा 10 हेक्टेयर दर्ज है। मौके पर जांच की गई कि झील व बंजर जमीन पर किसी ने अवैध कब्जा तो नहीं कर रखा है। झील के पानी को नाले द्वारा यमुना नदी में पहुंचाना, झील को नहर से जोड़ना, झील के पानी को सिंचाई के लिए प्रयोग करना आदि बिंदुओं पर जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि कई वर्षों से मवी, मामौर व सहपत के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल मामौर झील ओवरफ्लो होकर टूट जाने के कारण बर्बाद हो जाती है। जिस कारण किसानों को भारी नुकसान होता है।
विज्ञापन
डीएम के निर्देश पर तहसीलदार ने हलका लेखपालों की टीम के साथ मामौर झील का निरीक्षण किया। मामौर झील के रकबे की पैमाइश कराने के साथ ही झील की जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे की जांच की। साथ ही झील के पानी की निकासी के बिंदुओं पर भी गहराई से जांच की गई।
डीएम ने मंगलवार को ही कलक्ट्रेट में बैठक कर मामौर झील के सुंदरीकरण और जल प्रबंधन पर रिपोर्ट तैयार कराने का निर्देश दिया था। इसके चलते बुधवार को तहसीलदार अभय राज पांडेय ने चार लेखपालों की टीम के साथ मामौर झील पर पहुंचकर निरीक्षण किया। टीम के पास मामौर झील का राजस्व रिकार्ड भी था। टीम ने मामौर झील की पैमाईश करने के साथ ही झील में पानी के ओवरफ्लो होने के समय प्रभावित होने वाले किसानों की जमीन भी देखी। तहसीलदार अभय राज पांडेय ने बताया कि मामौर झील की पैमाइश की गई। मामौर झील का राजस्व रिकार्ड में रकबा 40 हेक्टेयर है तथा बंजर जमीन का रकबा 10 हेक्टेयर दर्ज है। मौके पर जांच की गई कि झील व बंजर जमीन पर किसी ने अवैध कब्जा तो नहीं कर रखा है। झील के पानी को नाले द्वारा यमुना नदी में पहुंचाना, झील को नहर से जोड़ना, झील के पानी को सिंचाई के लिए प्रयोग करना आदि बिंदुओं पर जांच की जा रही है। इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। गौरतलब है कि कई वर्षों से मवी, मामौर व सहपत के किसानों की सैकड़ों बीघा फसल मामौर झील ओवरफ्लो होकर टूट जाने के कारण बर्बाद हो जाती है। जिस कारण किसानों को भारी नुकसान होता है।
विज्ञापन