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मौसम की मार से बच्चे हो रहे बीमार
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मौसम की मार से बच्चे फिर हुए बीमार
शामली। मौसम में उतार चढ़ाव सेहत के लिए भारी पड़ रहा है। खासतौर से मासूम बच्चों पर इसका ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। तीन दिन पहले हुई बारिश के बाद लगातार तापमान बढ़ने से गरम हो रहे मौसम की मार बच्चों पर पड़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में डायरिया, हीट स्ट्रोक और बुखार के मरीजों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है।
मई के महीने की तरह ही जून माह के महीने में भी मौसम उतार-चढ़ाव के रंग दिखा रहा है। कभी लू तो कभी तेज गर्मी की तपन तो कभी हवाओं का बदला रुख वैसे तो हर उम्र के लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। जून माह के पहले ही दिन से भीषण गर्मी चल रही थी। तीन दिन पहले बृहस्पतिवार शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदला और आसमान में छाये काले बादलों ने बारिश कर लोगों को गर्मी से राहत दी। बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से तापमान में अचानक गिरावट आई। लोगों को गर्मी से सुकून मिला, लेकिन यह राहत एक दिन भी नहीं ठहर सकी। अगले ही दिन से तापमान फिर बढ़ना शुरू हो गया। तीन दिन से लगातार तापमान बढ़ने से भीषण गर्मी पड़ने से लोग बीमार हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के बाद उमस बढ़ने से बुखार, उल्टी, डायरिया, हीट स्ट्रोक आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डाक्टर अनुपम सक्सेना ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर अधिक पड़ता है। बारिश के बाद तेजी से गर्मी बढ़ने के कारण बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर वेदभानू मलिक का कहना है कि तेज गर्मी और लू में 14 साल तक के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते है। बारिश के बाद तेजी से तापमान बढ़ने से बीमार बच्चों की करीब 10 प्रतिशत संख्या अधिक बढ़ी है। बच्चे के बीमार होने पर चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
अस्पताल में भर्ती बच्चों के नाम
तीन दिन के अंदर अस्पताल में भर्ती बच्चों में आर्या वेदखेड़ी, उमर कैराना, रितिका काबड़ौत, शिवांश सिकंदरपुर, लक्ष्य झिंझाना और समद असारा आदि शामिल है। चिकित्सक के मुताबिक ये बच्चे उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित होने के कारण भर्ती किया गया है।
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सावधानियां
तेज धूप और लू में बाहर न निकलें
धूप में सूती कपड़े से सिर ढककर बाहर निकलें
तरल पदार्थों का सेवन करें, घर की बनी शिकंजी, छाछ आदि का सेवन करें
ठंडी चीजें आइस्क्रीम, कुल्फी, अधिक ठंडा पानी पीने से बचें
रखा हुआ बासी भोजन न करें, कटे हुए फलों का सेवन न करें
बाजार की बनी हुई खाने पीने की चीजों का सेवन करने से बचें
लू और गर्मी जनित बीमारी के लक्षण
सिर और पेट में दर्द, चक्कर आना
उल्टी लगना, तेज बुखार, दस्त आना
पानी की कमी होने के कारण बेहोशी छा जाना
पसीना आना कम हो जाता है।
कोट
बारिश के बाद गर्मी अधिक होने से उल्टी, दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 28 मई से 9 जून तक चलने वाला सघन दस्त नियंत्रण अभियान कार्यक्रम अब 30 जून तक चलाया जाएगा।
-डाक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।
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शामली। मौसम में उतार चढ़ाव सेहत के लिए भारी पड़ रहा है। खासतौर से मासूम बच्चों पर इसका ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। तीन दिन पहले हुई बारिश के बाद लगातार तापमान बढ़ने से गरम हो रहे मौसम की मार बच्चों पर पड़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों में डायरिया, हीट स्ट्रोक और बुखार के मरीजों की संख्या फिर से बढ़ने लगी है।
मई के महीने की तरह ही जून माह के महीने में भी मौसम उतार-चढ़ाव के रंग दिखा रहा है। कभी लू तो कभी तेज गर्मी की तपन तो कभी हवाओं का बदला रुख वैसे तो हर उम्र के लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। जून माह के पहले ही दिन से भीषण गर्मी चल रही थी। तीन दिन पहले बृहस्पतिवार शाम को अचानक मौसम का मिजाज बदला और आसमान में छाये काले बादलों ने बारिश कर लोगों को गर्मी से राहत दी। बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से तापमान में अचानक गिरावट आई। लोगों को गर्मी से सुकून मिला, लेकिन यह राहत एक दिन भी नहीं ठहर सकी। अगले ही दिन से तापमान फिर बढ़ना शुरू हो गया। तीन दिन से लगातार तापमान बढ़ने से भीषण गर्मी पड़ने से लोग बीमार हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बारिश के बाद उमस बढ़ने से बुखार, उल्टी, डायरिया, हीट स्ट्रोक आदि के मरीजों की संख्या बढ़ी है। मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक है। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक डाक्टर अनुपम सक्सेना ने बताया कि मौसम में बदलाव का असर बच्चों पर अधिक पड़ता है। बारिश के बाद तेजी से गर्मी बढ़ने के कारण बीमार बच्चों की संख्या बढ़ी है। बाल रोग विशेषज्ञ डाक्टर वेदभानू मलिक का कहना है कि तेज गर्मी और लू में 14 साल तक के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते है। बारिश के बाद तेजी से तापमान बढ़ने से बीमार बच्चों की करीब 10 प्रतिशत संख्या अधिक बढ़ी है। बच्चे के बीमार होने पर चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
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अस्पताल में भर्ती बच्चों के नाम
तीन दिन के अंदर अस्पताल में भर्ती बच्चों में आर्या वेदखेड़ी, उमर कैराना, रितिका काबड़ौत, शिवांश सिकंदरपुर, लक्ष्य झिंझाना और समद असारा आदि शामिल है। चिकित्सक के मुताबिक ये बच्चे उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित होने के कारण भर्ती किया गया है।
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सावधानियां
तेज धूप और लू में बाहर न निकलें
धूप में सूती कपड़े से सिर ढककर बाहर निकलें
तरल पदार्थों का सेवन करें, घर की बनी शिकंजी, छाछ आदि का सेवन करें
ठंडी चीजें आइस्क्रीम, कुल्फी, अधिक ठंडा पानी पीने से बचें
रखा हुआ बासी भोजन न करें, कटे हुए फलों का सेवन न करें
बाजार की बनी हुई खाने पीने की चीजों का सेवन करने से बचें
लू और गर्मी जनित बीमारी के लक्षण
सिर और पेट में दर्द, चक्कर आना
उल्टी लगना, तेज बुखार, दस्त आना
पानी की कमी होने के कारण बेहोशी छा जाना
पसीना आना कम हो जाता है।
कोट
बारिश के बाद गर्मी अधिक होने से उल्टी, दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके लिए सभी सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। इसके साथ ही 28 मई से 9 जून तक चलने वाला सघन दस्त नियंत्रण अभियान कार्यक्रम अब 30 जून तक चलाया जाएगा।
-डाक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।