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खराब मौसम में श्रीराम वनवास की लीला का ह़ुआ मंचन
Updated Mon, 25 Sep 2017 12:12 AM IST
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शामली।
श्री हनुमान धाम की रामलीला रंगमंच पर श्रीराम वनवास की लीला का सुंदर मंचन किया गया। खराब मौसम में रामलीला देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
शनिवार रात्रि श्री हनुमान धाम की श्रीराम लीला रंगमंच की लीला का मंचन पर कलाकारों द्वारा श्रीगणेश की आरती के बाद शुभारंभ किया गया। राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ की सलाह पर श्रीराम के राजतिलक की घोषणा करते हैं। राजा दशरथ की मंझली रानी कैकेयी की दासी मंथरा श्रीराम के राजतिलक की घोषणा की सूचना उन्हें देती हैं। वह रानी कैकेयी को समझाती है कि यदि श्रीराम को राजतिलक हुआ तो तुम्हारा सम्मान कम होगा, वह भरत को राजा बनने, श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास के दो वर राजा दशरथ से मांगने को कहती है। राजा कैकेयी कोप भवन में चली जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर रानी कैकेयी से कोप भवन में जाने का कारण पूछ रहे है। रानी कैकेयी राजा दशरथ से पुराने दो वरदान मांगती है जिसमें पहले वरदान में भरत को राजतिलक, दूसरे वरदान में श्रीराम को राजतिलक मांगती है। रानी के वरदान सुनकर राजा दशरथ को सदमा लगता है। वह श्रीराम राम कहकर बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। पिता की दशा को देखकर श्रीराम उसका कारण पूछते है। रानी कैकेयी घटना के बारे में सब कुछ बता देती है। श्रीराम वन जाने के लिए कौशल्या माता से आज्ञा लेने जाते हैं। सीता भी पति के साथ वन जाने की इच्छा प्रकट करती हैं।
मंच निर्देशक उपेंद्र द्विवेदी, कैकेयी सोनू वर्मा, राम रविपाठक, लक्ष्मण निशांत पाठक, राजा दशरथ आदेश शर्मा ने शानदार किया। शृंगार निर्देशक रामेश्वर बच्छ, बालकिशन सैनी, विजय शर्मा व मंच निर्देशक उत्तम नामदेव, दिनेश पाठक, राकेश आचार्य रहे। मौके पर सलिल द्विवेदी, जोगेंद्रपाल सेठी, सुरेेशचंद शर्मा प्रमोद, संदीप, राजकुमार मलिक मौजूद रहे।
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श्री हनुमान धाम की रामलीला रंगमंच पर श्रीराम वनवास की लीला का सुंदर मंचन किया गया। खराब मौसम में रामलीला देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
शनिवार रात्रि श्री हनुमान धाम की श्रीराम लीला रंगमंच की लीला का मंचन पर कलाकारों द्वारा श्रीगणेश की आरती के बाद शुभारंभ किया गया। राजा दशरथ गुरू वशिष्ठ की सलाह पर श्रीराम के राजतिलक की घोषणा करते हैं। राजा दशरथ की मंझली रानी कैकेयी की दासी मंथरा श्रीराम के राजतिलक की घोषणा की सूचना उन्हें देती हैं। वह रानी कैकेयी को समझाती है कि यदि श्रीराम को राजतिलक हुआ तो तुम्हारा सम्मान कम होगा, वह भरत को राजा बनने, श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास के दो वर राजा दशरथ से मांगने को कहती है। राजा कैकेयी कोप भवन में चली जाती है। राजा दशरथ कोप भवन में जाकर रानी कैकेयी से कोप भवन में जाने का कारण पूछ रहे है। रानी कैकेयी राजा दशरथ से पुराने दो वरदान मांगती है जिसमें पहले वरदान में भरत को राजतिलक, दूसरे वरदान में श्रीराम को राजतिलक मांगती है। रानी के वरदान सुनकर राजा दशरथ को सदमा लगता है। वह श्रीराम राम कहकर बेहोश होकर गिर पड़ते हैं। पिता की दशा को देखकर श्रीराम उसका कारण पूछते है। रानी कैकेयी घटना के बारे में सब कुछ बता देती है। श्रीराम वन जाने के लिए कौशल्या माता से आज्ञा लेने जाते हैं। सीता भी पति के साथ वन जाने की इच्छा प्रकट करती हैं।
मंच निर्देशक उपेंद्र द्विवेदी, कैकेयी सोनू वर्मा, राम रविपाठक, लक्ष्मण निशांत पाठक, राजा दशरथ आदेश शर्मा ने शानदार किया। शृंगार निर्देशक रामेश्वर बच्छ, बालकिशन सैनी, विजय शर्मा व मंच निर्देशक उत्तम नामदेव, दिनेश पाठक, राकेश आचार्य रहे। मौके पर सलिल द्विवेदी, जोगेंद्रपाल सेठी, सुरेेशचंद शर्मा प्रमोद, संदीप, राजकुमार मलिक मौजूद रहे।
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