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सीएचसी से नदारद मिले नसबंदी के खेवनहार
Updated Sat, 15 Jul 2017 12:59 AM IST
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शामली।
जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े के मद्देनजर सरकार अरबों रुपये खर्च करके परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रही है, लेकिन इस अभियान से जुड़े डॉक्टर गंभीर नहीं हैं। शुक्रवार को कुछ महिलाएं नसबंदी कराने अस्पताल पहुंचीं तो फिजीशियन और सर्जन चिकित्सक नदारद मिले। सीएमओ ने कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके बाद महिला सर्जन ने 12 नसबंदी के आपरेशन कराए।
शुक्रवार को थानाभवन सीएचसी पर नसबंदी के लिए विशेष कैंप लगना था, लेकिन किन्हीं कारणों से कैंप को रद्द कर दिया गया। नसबंदी कराने पहुंचीं महिलाओं को शामली अस्पताल में बुलवा लिया गया। कुड़ाना सीएचसी से भी करीब 14 महिलाएं नसबंदी के लिए पहुंचीं, लेकिन वहां न तो सर्जन मिले और न ही फिजीशियन। अस्पताल से काउंसलर भी लापता मिली। इससे गुस्साई महिलाओं ने हंगामा शुरू किया तो मामला सीएमओ ऑफिस तक पहुंच गया। परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉक्टर सुशील कुमार सीएचसी पर पहुंचे और चिकित्साधीक्षक डाक्टर जगमोहन से बात की। सीएमओ ऑफिस से चेतावनी मिलने के बाद डॉक्टरों में भगदड़ मच गई। जिसके बाद बाद संविदा पर तैनात महिला सर्जन डाक्टर मंजीत कौर मौके पर पहुंचीं और महिलाओं की नसबंदी की, लेकिन तब तक कई महिलाएं परेशान होकर लौट चुकी थीं।
चिकित्सकों का वेतन काटने के निर्देश
सीएचसी में डाक्टर सौरभ अग्रवाल और मंजीत कौर सर्जन के पद पर तैनात हैं। परामर्शदाता तौर पर शिप्रा की तैनाती है। महिला डॉक्टर अनीता बत्रा और डॉक्टर मनोरमा गोपाल की तैनाती है। शुक्रवार को जब महिलाएं नसबंदी कराने के लिए आईं तो डॉक्टर सौरभ अग्रवाल, डॉक्टर मनोरमा और अनीता बत्रा नहीं मिलीं। परामर्शदाता शिप्रा भी ड्यूटी पर नहीं थीं। डॉक्टर सौरभ अग्रवाल का 14, 15 जुुलाई की छुट्टी के लिए एक प्रार्थना पत्र रखा मिला। नोडल अधिकारी ने डॉक्टर सौरभ अग्रवाल का दो दिन का वेतन, डॉक्टर अनीता बत्रा और डॉक्टर मनोरमा गोपाल तथा काउंसलर शिप्रा का एक-एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
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जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े के मद्देनजर सरकार अरबों रुपये खर्च करके परिवार नियोजन कार्यक्रम चला रही है, लेकिन इस अभियान से जुड़े डॉक्टर गंभीर नहीं हैं। शुक्रवार को कुछ महिलाएं नसबंदी कराने अस्पताल पहुंचीं तो फिजीशियन और सर्जन चिकित्सक नदारद मिले। सीएमओ ने कार्रवाई की चेतावनी दी, जिसके बाद महिला सर्जन ने 12 नसबंदी के आपरेशन कराए।
शुक्रवार को थानाभवन सीएचसी पर नसबंदी के लिए विशेष कैंप लगना था, लेकिन किन्हीं कारणों से कैंप को रद्द कर दिया गया। नसबंदी कराने पहुंचीं महिलाओं को शामली अस्पताल में बुलवा लिया गया। कुड़ाना सीएचसी से भी करीब 14 महिलाएं नसबंदी के लिए पहुंचीं, लेकिन वहां न तो सर्जन मिले और न ही फिजीशियन। अस्पताल से काउंसलर भी लापता मिली। इससे गुस्साई महिलाओं ने हंगामा शुरू किया तो मामला सीएमओ ऑफिस तक पहुंच गया। परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉक्टर सुशील कुमार सीएचसी पर पहुंचे और चिकित्साधीक्षक डाक्टर जगमोहन से बात की। सीएमओ ऑफिस से चेतावनी मिलने के बाद डॉक्टरों में भगदड़ मच गई। जिसके बाद बाद संविदा पर तैनात महिला सर्जन डाक्टर मंजीत कौर मौके पर पहुंचीं और महिलाओं की नसबंदी की, लेकिन तब तक कई महिलाएं परेशान होकर लौट चुकी थीं।
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चिकित्सकों का वेतन काटने के निर्देश
सीएचसी में डाक्टर सौरभ अग्रवाल और मंजीत कौर सर्जन के पद पर तैनात हैं। परामर्शदाता तौर पर शिप्रा की तैनाती है। महिला डॉक्टर अनीता बत्रा और डॉक्टर मनोरमा गोपाल की तैनाती है। शुक्रवार को जब महिलाएं नसबंदी कराने के लिए आईं तो डॉक्टर सौरभ अग्रवाल, डॉक्टर मनोरमा और अनीता बत्रा नहीं मिलीं। परामर्शदाता शिप्रा भी ड्यूटी पर नहीं थीं। डॉक्टर सौरभ अग्रवाल का 14, 15 जुुलाई की छुट्टी के लिए एक प्रार्थना पत्र रखा मिला। नोडल अधिकारी ने डॉक्टर सौरभ अग्रवाल का दो दिन का वेतन, डॉक्टर अनीता बत्रा और डॉक्टर मनोरमा गोपाल तथा काउंसलर शिप्रा का एक-एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
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