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छह सौ रुपये नहीं मिले तो प्लास्टर करने से कर दिया मना
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:25 PM IST
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सुविधा शुल्क देने से इंकार करने पर बच्चे का उपचार नहीं किया
शामली। सरकारी अस्पताल में प्लास्टर कराने पहुंची एक महिला से छह सौ रुपये नहीं देने पर प्लास्टर करने से मना कर दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों की टीम गांव-गांव में आंगनबाड़ी सेंटर और प्राथमिक स्कूल में जाकर बच्चों को चुनती है और उनका इलाज कराती हैं। इसी कड़ी में शनिवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की कांधला टीम के डाक्टर विवेक एक छह माह के बच्चे सौरभ को लेकर सरकारी अस्पताल में पहुंचे थे। बच्चे के पैर पर प्लास्टर होना था। आरोप है कि सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने प्लास्टर का सामान नहीं होने पर बाहर से सामान लाने की बात कही। महिला ने बाहर से सामान लाने में असमर्थता जताई, तो डाक्टर ने प्लास्टर करने से मना कर दिया। आरोप है कि इस दौरान उससे छह सौ रुपये देने पर वहीं पर प्लास्टर कर देने की बात भी कही। आरबीएसके टीम के डॉक्टर विवेक ने मामले की शिकायत एसीएमओ डॉक्टर नेतराम को भी। इस पर उन्होंने संबंधित डाक्टर को प्लास्टर करने के निर्देश दिए, लेकिन उसके बाद भी प्लास्टर नहीं हो सका। उधर, इसके बादडॉक्टर विवेक ने इसकी शिकायत आरबीएसके के नोडल डाक्टर भानु प्रकाश को कर दी।
पूर्व में भी दो महिलाओं से की गई उगाही
छह माह के बच्चे सौरभ की मां सीमा ने बताया कि वह दो बार पूर्व सरकारी अस्पताल में सीधे आई थी। यहां पर एक बार उससे छह सौ रुपये लिए गए। बाद में बच्चे के पैर में आराम हुआ तो वह दोबारा आई। उस समय उसके पास मात्र चार सौ रुपये थे, तो प्लास्टर करने वाले सरकारी कर्मचारी ने उससे चार सौ रुपये ले लिए। अब वह तीसरी बार आरबीएसके टीम के माध्यम से अस्पताल में आई तो अबकी बार डाक्टरों ने प्लास्टर का सामान हीं बाहर से मंगवा लिया।
मामला बेहद गंभीर है, उनके संज्ञान में नहीं है, यदि संज्ञान में आता है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी
डॉक्टर रमेश चंद्रा, सीएचसी प्रभारी।
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शामली। सरकारी अस्पताल में प्लास्टर कराने पहुंची एक महिला से छह सौ रुपये नहीं देने पर प्लास्टर करने से मना कर दिया।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डॉक्टरों की टीम गांव-गांव में आंगनबाड़ी सेंटर और प्राथमिक स्कूल में जाकर बच्चों को चुनती है और उनका इलाज कराती हैं। इसी कड़ी में शनिवार को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की कांधला टीम के डाक्टर विवेक एक छह माह के बच्चे सौरभ को लेकर सरकारी अस्पताल में पहुंचे थे। बच्चे के पैर पर प्लास्टर होना था। आरोप है कि सरकारी अस्पताल के डाक्टरों ने प्लास्टर का सामान नहीं होने पर बाहर से सामान लाने की बात कही। महिला ने बाहर से सामान लाने में असमर्थता जताई, तो डाक्टर ने प्लास्टर करने से मना कर दिया। आरोप है कि इस दौरान उससे छह सौ रुपये देने पर वहीं पर प्लास्टर कर देने की बात भी कही। आरबीएसके टीम के डॉक्टर विवेक ने मामले की शिकायत एसीएमओ डॉक्टर नेतराम को भी। इस पर उन्होंने संबंधित डाक्टर को प्लास्टर करने के निर्देश दिए, लेकिन उसके बाद भी प्लास्टर नहीं हो सका। उधर, इसके बादडॉक्टर विवेक ने इसकी शिकायत आरबीएसके के नोडल डाक्टर भानु प्रकाश को कर दी।
पूर्व में भी दो महिलाओं से की गई उगाही
छह माह के बच्चे सौरभ की मां सीमा ने बताया कि वह दो बार पूर्व सरकारी अस्पताल में सीधे आई थी। यहां पर एक बार उससे छह सौ रुपये लिए गए। बाद में बच्चे के पैर में आराम हुआ तो वह दोबारा आई। उस समय उसके पास मात्र चार सौ रुपये थे, तो प्लास्टर करने वाले सरकारी कर्मचारी ने उससे चार सौ रुपये ले लिए। अब वह तीसरी बार आरबीएसके टीम के माध्यम से अस्पताल में आई तो अबकी बार डाक्टरों ने प्लास्टर का सामान हीं बाहर से मंगवा लिया।
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मामला बेहद गंभीर है, उनके संज्ञान में नहीं है, यदि संज्ञान में आता है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी
डॉक्टर रमेश चंद्रा, सीएचसी प्रभारी।