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सड़क निर्माण से प्रभावित किसानों ने ली अदालत की शरण
Updated Tue, 28 Nov 2017 11:34 PM IST
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कैराना।
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ऊंचागांव से खेड़ा कुरतान तक सड़क का चौड़ीकरण और विस्तारीकरण खटाई में पड़ गया है। इससे प्रभावित चार गांवों के किसानों ने न्यायालय की शरण ली है। इस पर कैराना स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय, अधिशासी अभियंता प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना तथा मैसर्स प्रीति बिल्डकोन को समन जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा। अब मामले में पक्ष रखने के लिए 21 दिसंबर की तारीख लगाई गई है। इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता संजय भटनागर ने आपत्ति व जवाब दावे के लिए समय मांगा। अदालत ने 21 दिसंबर की तारीख नियत की है, जबकि मैसर्स प्रीति बिल्ड कोन मेरठ की ओर से अदालत में कोई हाजिर नहीं हुआ है।
किसानों की तरफ से वाद दायर करने वाले अधिवक्ता खड़क सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत ऊंचा गांव से डुढ़ार- गंगेरू होते हुए खेड़ा कुरतान तक सड़क का चौड़ीकरण व विस्तारीकरण ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित था, जिसके चलते सरकार मैसर्स प्रीति बिल्ड कोन मेरठ के माध्यम से बिना अधिग्रहण किए ऊंचा गांव के किसानों की जमीन सड़क निर्माण में लेना चाहती थी। साथ ही किसानों के खेतों से बिना रॉयल्टी दिए मिट्टी का खदान कराना चाहती थी। इससे प्रभावित किसानों ने ठेकेदार व सरकार से मिट्टी खदान की रॉयल्टी व नियमानुसार भूमि अधिग्रहण कराए जाने की मांग की थी। इसके बावजूद किसानों की कोई सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बाद किसान अनिल कुमार निवासी ऊंचागांव सहित 11 अन्य किसान न्यायालय की शरण में पहुंच गए। अधिवक्ता के माध्यम से सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया।
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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ऊंचागांव से खेड़ा कुरतान तक सड़क का चौड़ीकरण और विस्तारीकरण खटाई में पड़ गया है। इससे प्रभावित चार गांवों के किसानों ने न्यायालय की शरण ली है। इस पर कैराना स्थित सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने सचिव ग्रामीण विकास मंत्रालय, अधिशासी अभियंता प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना तथा मैसर्स प्रीति बिल्डकोन को समन जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा। अब मामले में पक्ष रखने के लिए 21 दिसंबर की तारीख लगाई गई है। इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता संजय भटनागर ने आपत्ति व जवाब दावे के लिए समय मांगा। अदालत ने 21 दिसंबर की तारीख नियत की है, जबकि मैसर्स प्रीति बिल्ड कोन मेरठ की ओर से अदालत में कोई हाजिर नहीं हुआ है।
किसानों की तरफ से वाद दायर करने वाले अधिवक्ता खड़क सिंह चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत ऊंचा गांव से डुढ़ार- गंगेरू होते हुए खेड़ा कुरतान तक सड़क का चौड़ीकरण व विस्तारीकरण ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित था, जिसके चलते सरकार मैसर्स प्रीति बिल्ड कोन मेरठ के माध्यम से बिना अधिग्रहण किए ऊंचा गांव के किसानों की जमीन सड़क निर्माण में लेना चाहती थी। साथ ही किसानों के खेतों से बिना रॉयल्टी दिए मिट्टी का खदान कराना चाहती थी। इससे प्रभावित किसानों ने ठेकेदार व सरकार से मिट्टी खदान की रॉयल्टी व नियमानुसार भूमि अधिग्रहण कराए जाने की मांग की थी। इसके बावजूद किसानों की कोई सुनवाई नहीं हुई थी। इसके बाद किसान अनिल कुमार निवासी ऊंचागांव सहित 11 अन्य किसान न्यायालय की शरण में पहुंच गए। अधिवक्ता के माध्यम से सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया।
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