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आखिरकार वन विभाग को मिली गयी उनकी जमीन
Updated Sat, 30 Sep 2017 01:27 AM IST
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शामली।
सुन्हेटी में वन विभाग की जमीन को धोखाधड़ी कर बदलने के पूर्व आदेश को जिला वन बंदोबस्त अधिकारी के न्यायालय ने निरस्त कर दिया है, जिसके बाद करीब सवा करोड़ की जमीन पर वन विभाग का कब्जा हो गया। यह निर्णय डीएम और वन विभाग द्वारा रखे गए पक्ष के बाद हुआ।
दरअसल, बल्हेड़ा में मौजूद करीब 45 बीघा जमीन को कैराना क्षेत्र के गांव अकरबर सुन्हेटी के लोगों ने जनहित में बदलने की मांग की थी। बिजनौर में जिला वन बंदोबस्त अधिकारी के यहां वाद दायर किया था। इसमें 20 अगस्त 2016 को तत्कालीन जिला वन बंदोबस्त अधिकारी द्वारा काश्तकारों की बल्हेड़ा स्थित जमीन का हस्तांतरण अकबरपुर सुन्हेटी में वन विभाग की भूमि से कर दिया गया था। मामला संज्ञान में आने पर डीएम और डीएफओ शामली द्वारा आपत्ति लगाते हुए इसे नियम विरुद्घ बताते हुए 23 जून 2017 को वन बंदोबस्त अधिकारी को पत्र लिखा गया था। इस मामले में प्रशासन और जिला वन अधिकारी द्वारा पैरवी करने पर बीस अगस्त के उस आदेश को निरस्त करा दिया गया। इसके बाद अकबरपुर सुन्हेटी में स्थित 45 बीघा जमीन वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आ गई।
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सुन्हेटी में वन विभाग की जमीन को धोखाधड़ी कर बदलने के पूर्व आदेश को जिला वन बंदोबस्त अधिकारी के न्यायालय ने निरस्त कर दिया है, जिसके बाद करीब सवा करोड़ की जमीन पर वन विभाग का कब्जा हो गया। यह निर्णय डीएम और वन विभाग द्वारा रखे गए पक्ष के बाद हुआ।
दरअसल, बल्हेड़ा में मौजूद करीब 45 बीघा जमीन को कैराना क्षेत्र के गांव अकरबर सुन्हेटी के लोगों ने जनहित में बदलने की मांग की थी। बिजनौर में जिला वन बंदोबस्त अधिकारी के यहां वाद दायर किया था। इसमें 20 अगस्त 2016 को तत्कालीन जिला वन बंदोबस्त अधिकारी द्वारा काश्तकारों की बल्हेड़ा स्थित जमीन का हस्तांतरण अकबरपुर सुन्हेटी में वन विभाग की भूमि से कर दिया गया था। मामला संज्ञान में आने पर डीएम और डीएफओ शामली द्वारा आपत्ति लगाते हुए इसे नियम विरुद्घ बताते हुए 23 जून 2017 को वन बंदोबस्त अधिकारी को पत्र लिखा गया था। इस मामले में प्रशासन और जिला वन अधिकारी द्वारा पैरवी करने पर बीस अगस्त के उस आदेश को निरस्त करा दिया गया। इसके बाद अकबरपुर सुन्हेटी में स्थित 45 बीघा जमीन वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आ गई।
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