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Shamli News: 11 फर्में बोगस मिलीं, पंजीयन निरस्त
Sat, 19 Sep 2026 01:04 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 19 Sep 2026 01:04 AM IST
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शामली। जिले में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पासऑन करने का मामला सामने आया है। राज्य कर विभाग की जांच में शामली सेक्टर-1 और एसी-1 सर्किल में 11 फर्में बोगस मिली हैं। तीन फर्मों के मामलों में ही 11 करोड़ 80 लाख 45 हजार 372 रुपये की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, आठ अन्य फर्मों पर 15 करोड़ 19 लाख 59 हजार 298 रुपये समेत कुल 27 करोड़ रुपये का खेल सामने आया है। जीएसटी उपायुक्त की रिपोर्ट पर सहायक आयुक्त जीएसटी ने बोगस फर्मों के पंजीयन निरस्त किए हैं, जबकि 50 से अधिक संदिग्ध फर्में अभी जांच के घेरे में हैं।
जांच के दौरान कई फर्म मौके पर संचालित नहीं मिलीं। कहीं कारोबारी पंजीकृत पते पर नहीं मिला तो कहीं कार्यालय ही नहीं था। कुछ स्थानों पर फर्म का बोर्ड तक नहीं लगा मिला। जीएसटी रिटर्न और आईटीसी में अंतर मिलने के बाद विभाग ने संदिग्ध फर्मों की सूची तैयार कर उनका भौतिक सत्यापन कराया।
फर्मों का चल रहा सत्यापन
शामली में 12 हजार से अधिक व्यापारियों का जीएसटी पंजीयन है। चारों खंडों में पंजीकृत व्यापारियों के मासिक और त्रैमासिक रिटर्न की जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर फर्मों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में कुछ फर्मों ने पंजीयन कराने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया, जबकि कुछ के पते पर व्यापारिक गतिविधियां नहीं मिलीं।
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तीन फर्मों में 11.80 करोड़ की फर्जी आईटीसी
जांच में तीन फर्मों के जरिए 11 करोड़ 80 लाख 45 हजार 372 रुपये की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने का मामला सामने आया। एमएस राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 613 रुपये, एमएस क्रिस्टल एजेंसीज में वर्ष 2020-21 में 5 करोड़ 17 लाख 33 हजार 718 रुपये और एमएस आरएस एंटरप्राइजेज में वर्ष 2022-23 और 2023-24 में 5 करोड़ 42 लाख 29 हजार 41 रुपये की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने की बात सामने आई।
आठ फर्मों पर 15.19 करोड़
एसी-1 शामली की जांच में सात अन्य फर्में भी बोगस मिली हैं। इन पर कुल 12 करोड़ एक लाख 59 हजार 298 रुपये की मांग निर्धारित की गई है। इनमें सिंह एंटरप्राइजेज पर 2.27 करोड़, श्री बालाजी ट्रेडर्स पर 3.40 करोड़, वर्णित एंटरप्राइजेज पर 1.22 करोड़, हरि ओम एंटरप्राइजेज पर 1.07 करोड़, एसके कॉन्ट्रैक्टर जेवी पर 92.85 लाख, स्टार एंटरप्राइजेज पर 1.28 करोड़ और वीआर ट्रेडर्स पर 1.82 करोड़ और आर ट्रेडर्स पर 3.18 करोड़ की मांग शामिल है।
इसके अलावा डीसी-1 और एसी-1 की चार फर्मों—ग्रीन टाइमिंग कंपनी, वीआर ट्रेडर्स, हरि ओम एंटरप्राइजेज और जय दुर्गा ट्रेडर्स—के मामलों में भी फर्जीवाड़े की जांच की गई है। सभी 11 फर्मों द्वारा कुल 27 करोड़ रुपये का खेल सामने आया है। इनके खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है और पंजीयन निरस्त किए गए हैं।
पैन-आधार की जानकारी लेकर बनाते थे फर्म
जीएसटी के उपायुक्त डॉ. लोमेश के अनुसार जांच में फर्जी फर्म बनाने का तरीका भी सामने आया है। लोगों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी हासिल कर उनके नाम पर फर्म पंजीकृत कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद बैंक खाते खुलवाकर उनमें कारोबार और फर्जी बिलिंग के जरिये लेनदेन दिखाया गया। विभाग और पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
कई राज्यों तक लेनदेन की जांच
जांच में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और बिहार तक लेनदेन दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है। कन्फेक्शनरी, फल और अन्य कारोबार के नाम पर बिलिंग किए जाने की भी जांच की जा रही है।
जीएसटी रिटर्न और आईटीसी में अंतर मिलने पर संदिग्ध फर्मों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है। मौके पर फर्म नहीं मिलने या दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। जांच के बाद 11 फर्मों का पंजीयन निरस्त कर 50 से अधिक की जांच की जा रही है। - डॉ. लोमेश, उपायुक्त, जीएसटी
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जांच के दौरान कई फर्म मौके पर संचालित नहीं मिलीं। कहीं कारोबारी पंजीकृत पते पर नहीं मिला तो कहीं कार्यालय ही नहीं था। कुछ स्थानों पर फर्म का बोर्ड तक नहीं लगा मिला। जीएसटी रिटर्न और आईटीसी में अंतर मिलने के बाद विभाग ने संदिग्ध फर्मों की सूची तैयार कर उनका भौतिक सत्यापन कराया।
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फर्मों का चल रहा सत्यापन
शामली में 12 हजार से अधिक व्यापारियों का जीएसटी पंजीयन है। चारों खंडों में पंजीकृत व्यापारियों के मासिक और त्रैमासिक रिटर्न की जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर फर्मों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में कुछ फर्मों ने पंजीयन कराने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया, जबकि कुछ के पते पर व्यापारिक गतिविधियां नहीं मिलीं।
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तीन फर्मों में 11.80 करोड़ की फर्जी आईटीसी
जांच में तीन फर्मों के जरिए 11 करोड़ 80 लाख 45 हजार 372 रुपये की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने का मामला सामने आया। एमएस राधे कृष्णा एंटरप्राइजेज में वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 20 लाख 82 हजार 613 रुपये, एमएस क्रिस्टल एजेंसीज में वर्ष 2020-21 में 5 करोड़ 17 लाख 33 हजार 718 रुपये और एमएस आरएस एंटरप्राइजेज में वर्ष 2022-23 और 2023-24 में 5 करोड़ 42 लाख 29 हजार 41 रुपये की फर्जी आईटीसी पासऑन किए जाने की बात सामने आई।
आठ फर्मों पर 15.19 करोड़
एसी-1 शामली की जांच में सात अन्य फर्में भी बोगस मिली हैं। इन पर कुल 12 करोड़ एक लाख 59 हजार 298 रुपये की मांग निर्धारित की गई है। इनमें सिंह एंटरप्राइजेज पर 2.27 करोड़, श्री बालाजी ट्रेडर्स पर 3.40 करोड़, वर्णित एंटरप्राइजेज पर 1.22 करोड़, हरि ओम एंटरप्राइजेज पर 1.07 करोड़, एसके कॉन्ट्रैक्टर जेवी पर 92.85 लाख, स्टार एंटरप्राइजेज पर 1.28 करोड़ और वीआर ट्रेडर्स पर 1.82 करोड़ और आर ट्रेडर्स पर 3.18 करोड़ की मांग शामिल है।
इसके अलावा डीसी-1 और एसी-1 की चार फर्मों—ग्रीन टाइमिंग कंपनी, वीआर ट्रेडर्स, हरि ओम एंटरप्राइजेज और जय दुर्गा ट्रेडर्स—के मामलों में भी फर्जीवाड़े की जांच की गई है। सभी 11 फर्मों द्वारा कुल 27 करोड़ रुपये का खेल सामने आया है। इनके खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई की गई है और पंजीयन निरस्त किए गए हैं।
पैन-आधार की जानकारी लेकर बनाते थे फर्म
जीएसटी के उपायुक्त डॉ. लोमेश के अनुसार जांच में फर्जी फर्म बनाने का तरीका भी सामने आया है। लोगों के पैन कार्ड, आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जानकारी हासिल कर उनके नाम पर फर्म पंजीकृत कराए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद बैंक खाते खुलवाकर उनमें कारोबार और फर्जी बिलिंग के जरिये लेनदेन दिखाया गया। विभाग और पुलिस की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
कई राज्यों तक लेनदेन की जांच
जांच में हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और बिहार तक लेनदेन दिखाए जाने की जानकारी सामने आई है। कन्फेक्शनरी, फल और अन्य कारोबार के नाम पर बिलिंग किए जाने की भी जांच की जा रही है।
जीएसटी रिटर्न और आईटीसी में अंतर मिलने पर संदिग्ध फर्मों का भौतिक सत्यापन कराया जाता है। मौके पर फर्म नहीं मिलने या दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। जांच के बाद 11 फर्मों का पंजीयन निरस्त कर 50 से अधिक की जांच की जा रही है। - डॉ. लोमेश, उपायुक्त, जीएसटी