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Shahjahanpur News: रंगकर्म के जुनून से मुंबई में बजाया डंका, विदेशों तक लहराया परचम
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आलोक सक्सेना
- फोटो : Samvad
शाहजहांपुर। विश्व रंगमंच दिवस शुक्रवार को होगा। बरेली और लखनऊ के बीच बसा शाहजहांपुर रंगकर्म का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु हैं। यहां से रंगकर्म की बारीकियों को सीखकर कलाकाराें ने मुंबई तक का सफर पूरा किया। हास्य कलाकार राजपाल यादव इसके सशक्त हस्ताक्षर हैं। जिले के कई युवा फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ चुके हैं। वहीं कुछ रंगकर्मियों ने फिल्मों को छोड़कर नाटकों से अपनी छाप छोड़ी है। ऐसे कलाकार नाटकों के जरिये देश के साथ ही विदेश तक में जिले के रंगकर्म को पहुंचा रहे हैं।
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पिंडी के गुरचरन में नजर आएगी गुलिस्ता
शहर के मोहल्ला अंटा निवासी गुलिस्ता ने जिले से रंगकर्म सीखकर मुंबई तक का सफर पूरा किया। नेशनल अवाॅर्ड लेखक अब्बास खान लिखित मूवी पिंडी के गुरुचरन जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसमें गुलिस्ता मुख्य किरदार जुबैदा के रोल में नजर आएंगी। इससे पहले गुलिस्ता कई फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। वह बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहीं हैं।
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कुक्कू की कुंडली और संदीप भइया सीजन टू में नजर आएंगे रवि
रवि चौहान ने वर्ष 2006 से रंगकर्म की शुरुआत संस्कृति नाट्य मंच से की थी। उसके बाद दिनेश खन्ना व रॉबिन दास से प्रशिक्षण प्राप्त किया। तुषार कपूर के साथ दस जून की रात सीरीज में काम करने का मौका मिला। कहां शुरू, कहां खत्म हो, इत्तू सी बात समेत सात फिल्मों में काम कर चुके हैं। इस वर्ष कुक्कू की कुंडली और संदीप भइया सीजन टू में काम कर रहे हैं। मुंबई में फिल्मों के साथ ही नाटक में काम भी करते हैं।
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आलोक ने कहा-जीवंत कला है रंगमंच
वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना ने बताया कि रंगकर्म रगों में रचा और बसा है। अनगिनत नाटकों में अभिनय किया है। रंगमंच एक जीवंत कला है, जिसकी सबसे बड़ी शक्ति है दर्शकों से सीधा और सजीव संवाद। विश्व रंगमंच दिवस की सार्थकता तभी है, जब यह माध्यम केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त औजार बने।
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कठपुतली बनीं आवाज, छा गए कप्तान
कप्तान सिंह कर्णधार रंगमंच, बाल रंगमंच और कठपुतली कला के माध्यम से वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 1999 से रंगमंच की यात्रा शुरू करने वाले पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। देश के विभिन्न मंचों और संस्थानों में बाल रंगमंच के माध्यम से नाट्य प्रस्तुतियां और नाट्य कार्यशालाएं आयोजित की हैं। साथ ही लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भी नाट्य प्रशिक्षण प्रदान किया है।
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बिंदिया के बाहुबली से छाए आलोक
फिल्म अभिनेता आलोक पांडेय अब तक कई फिल्मों में काम कर चुके हैं। हाल में आई वेब सीरीज बिंदिया के बाहुबली सीजन एक और दो में बब्बल बन्ना की भूमिका अदा की है। जिले से रंगकर्म सीखने के बाद मुंबई में कई ब्रेक मिले। लखनऊ सेंट्रल, हुड़दंग, प्रेम रतन धन पायो, बाटला हाउस, स्पेशल ऑप्स, बंबई मेरी जान फिल्म में काम किया। वह कहते हैं कि रंगमंच ने न केवल उन्हें अभिनय सिखाया, बल्कि धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास का पाठ भी पढ़ाया।
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पिंडी के गुरचरन में नजर आएगी गुलिस्ता
शहर के मोहल्ला अंटा निवासी गुलिस्ता ने जिले से रंगकर्म सीखकर मुंबई तक का सफर पूरा किया। नेशनल अवाॅर्ड लेखक अब्बास खान लिखित मूवी पिंडी के गुरुचरन जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसमें गुलिस्ता मुख्य किरदार जुबैदा के रोल में नजर आएंगी। इससे पहले गुलिस्ता कई फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। वह बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहीं हैं।
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कुक्कू की कुंडली और संदीप भइया सीजन टू में नजर आएंगे रवि
रवि चौहान ने वर्ष 2006 से रंगकर्म की शुरुआत संस्कृति नाट्य मंच से की थी। उसके बाद दिनेश खन्ना व रॉबिन दास से प्रशिक्षण प्राप्त किया। तुषार कपूर के साथ दस जून की रात सीरीज में काम करने का मौका मिला। कहां शुरू, कहां खत्म हो, इत्तू सी बात समेत सात फिल्मों में काम कर चुके हैं। इस वर्ष कुक्कू की कुंडली और संदीप भइया सीजन टू में काम कर रहे हैं। मुंबई में फिल्मों के साथ ही नाटक में काम भी करते हैं।
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आलोक ने कहा-जीवंत कला है रंगमंच
वरिष्ठ रंगकर्मी आलोक सक्सेना ने बताया कि रंगकर्म रगों में रचा और बसा है। अनगिनत नाटकों में अभिनय किया है। रंगमंच एक जीवंत कला है, जिसकी सबसे बड़ी शक्ति है दर्शकों से सीधा और सजीव संवाद। विश्व रंगमंच दिवस की सार्थकता तभी है, जब यह माध्यम केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक बदलाव का सशक्त औजार बने।
कठपुतली बनीं आवाज, छा गए कप्तान
कप्तान सिंह कर्णधार रंगमंच, बाल रंगमंच और कठपुतली कला के माध्यम से वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे हैं। वर्ष 1999 से रंगमंच की यात्रा शुरू करने वाले पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। देश के विभिन्न मंचों और संस्थानों में बाल रंगमंच के माध्यम से नाट्य प्रस्तुतियां और नाट्य कार्यशालाएं आयोजित की हैं। साथ ही लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भी नाट्य प्रशिक्षण प्रदान किया है।
बिंदिया के बाहुबली से छाए आलोक
फिल्म अभिनेता आलोक पांडेय अब तक कई फिल्मों में काम कर चुके हैं। हाल में आई वेब सीरीज बिंदिया के बाहुबली सीजन एक और दो में बब्बल बन्ना की भूमिका अदा की है। जिले से रंगकर्म सीखने के बाद मुंबई में कई ब्रेक मिले। लखनऊ सेंट्रल, हुड़दंग, प्रेम रतन धन पायो, बाटला हाउस, स्पेशल ऑप्स, बंबई मेरी जान फिल्म में काम किया। वह कहते हैं कि रंगमंच ने न केवल उन्हें अभिनय सिखाया, बल्कि धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास का पाठ भी पढ़ाया।

आलोक सक्सेना- फोटो : Samvad

आलोक सक्सेना- फोटो : Samvad

आलोक सक्सेना- फोटो : Samvad

आलोक सक्सेना- फोटो : Samvad

आलोक सक्सेना- फोटो : Samvad