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विंटर कलेक्शन से सजने लगे शोरूम
शसाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 15 Nov 2016 11:37 PM IST
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मौसम में तब्दीली के साथ ही अब रात में ठंडक का असर होने लगा है। ऐसे में विंटर गारमेंट्स की डिमांड शुरू हो गई है। दुकानदारों ने ब्रांडेड के अलावा चलताऊ माल का भी स्टाक कर रखा है। ग्राहकों को लुभाने के लिए छूट भी दी जा रही है, लेकिन एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से ग्राहकों की आमद दुकानों पर नहीं हो रही है, इससे दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
यह फैशन का दौर है। अब सीजन के हिसाब से कपड़े पहने और बेचे जाते हैं। पहले तीज-त्योहार, शादी-बारात में ही नए कपड़े खरीदने, सिलाने का रिवाज था। इस दौर में कपड़े सिलाने और खरीदने का कोई समय मुकर्रर नहीं है। अगर किसी को राह चलते ही शो केस में सजा कपड़ा अच्छा दिख जाए तो उसकी तुरंत खरीदारी हो जाती है।
जमाना यूथ का है तो मार्केट में भी युवाओं की रुचि को देखते हुए विंटर क्लॉथ की पूरी रेंज है। ब्रांडेड माल से तो बाजार पटा पड़ा है। ड्यूक, मोंटेकार्लो, लिविन, पार्क एवेन्यू, पर्क्स, न्यू पोर्ट, प्रिंगल, जॉन प्लेयर, पीटर इग्लैंड, किलर, पेन अमेरिका, रेमंड्स, लिवाइस, ली, चार्ली और कॉटंस जैसी कंपनियों ने जींस-टीशर्ट, ट्राउजर, वूलन टी शर्ट्स, स्वेटर और जैकेट की विस्तृत रेंज पेश करते हुए बाजार को माल से पाटना शुरू कर दिया है। वहीं मीडियम रेंज में र्स्पाके, फ्लू आदि कंपनियों का भी माल बाजार में दिख रहा है।
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दुकानदारों का कहना है कि एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से बिक्री पर खासा असर पड़ा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। दुकानदारी 80 से 85 प्रतिशत घट गई है। जो ग्राहक आ रहे हैं वह पुराने नोट लेकर पहुंच रहे हैं। सेल बढ़ाने को लोकल कंपनियों को छोड़ ब्रांडेड कंपनियां भी छूट की प्रतिस्पर्धा में उतर आई हैं। कुछ कंपनियों ने छूट को दुकानदारों के विवेक के ऊपर निर्भर कर दिया है। सो वह ग्राहक का मुंह देखकर 10 से 20 प्रतिशत की छूट दे देते हैं। इस छूट के बाद भी बाजार के रंग, अभी बदरंग हैं।
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यह फैशन का दौर है। अब सीजन के हिसाब से कपड़े पहने और बेचे जाते हैं। पहले तीज-त्योहार, शादी-बारात में ही नए कपड़े खरीदने, सिलाने का रिवाज था। इस दौर में कपड़े सिलाने और खरीदने का कोई समय मुकर्रर नहीं है। अगर किसी को राह चलते ही शो केस में सजा कपड़ा अच्छा दिख जाए तो उसकी तुरंत खरीदारी हो जाती है।
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जमाना यूथ का है तो मार्केट में भी युवाओं की रुचि को देखते हुए विंटर क्लॉथ की पूरी रेंज है। ब्रांडेड माल से तो बाजार पटा पड़ा है। ड्यूक, मोंटेकार्लो, लिविन, पार्क एवेन्यू, पर्क्स, न्यू पोर्ट, प्रिंगल, जॉन प्लेयर, पीटर इग्लैंड, किलर, पेन अमेरिका, रेमंड्स, लिवाइस, ली, चार्ली और कॉटंस जैसी कंपनियों ने जींस-टीशर्ट, ट्राउजर, वूलन टी शर्ट्स, स्वेटर और जैकेट की विस्तृत रेंज पेश करते हुए बाजार को माल से पाटना शुरू कर दिया है। वहीं मीडियम रेंज में र्स्पाके, फ्लू आदि कंपनियों का भी माल बाजार में दिख रहा है।
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दुकानदारों का कहना है कि एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से बिक्री पर खासा असर पड़ा है। ग्राहक नहीं आ रहे हैं। दुकानदारी 80 से 85 प्रतिशत घट गई है। जो ग्राहक आ रहे हैं वह पुराने नोट लेकर पहुंच रहे हैं। सेल बढ़ाने को लोकल कंपनियों को छोड़ ब्रांडेड कंपनियां भी छूट की प्रतिस्पर्धा में उतर आई हैं। कुछ कंपनियों ने छूट को दुकानदारों के विवेक के ऊपर निर्भर कर दिया है। सो वह ग्राहक का मुंह देखकर 10 से 20 प्रतिशत की छूट दे देते हैं। इस छूट के बाद भी बाजार के रंग, अभी बदरंग हैं।