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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Wife selling pots and beds, hospital payment

बर्तन और बेड बेचकर किया पत्नी के इलाज का भुगतान

Mon, 05 Dec 2016 11:21 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर Updated Mon, 05 Dec 2016 11:21 PM IST
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गांव जेबा स्थित बड़ौदा पश्चिमी ग्रामीण बैंक से उपभोक्ताओं को कैश नहीं मिलने से भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कहीं शादी में अड़चन आ रही है तो कहीं इलाज करने के लाले पड़े हैं। एक युवक को तो घर के बर्तन और बेड आदि बेचकर पत्नी के इलाज की फीस भरनी पड़ी, तब अस्पताल वालों ने उसकी पत्नी को अस्पताल से छुट्टी दी। 
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घर के बर्तन और बेड बेचकर भरे इलाज के रुपये
जेबा। गांव जेबा निवासी विपिन कुमार के पुत्र अशोक की पत्नी कुछ दिन पहले बीमार पड़ गई। स्थानीय स्तर पर इलाज में लाभ नहीं हुआ तो परिवार के लोगों ने उसे शाहजहांपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। कई दिन इलाज के बाद लाभ हुआ तो अस्पताल वालों ने बिल थमा दिया। बहू की अस्पताल से छुट्टी कराने के लिए विपिन कुमार कई दिन से बैंक के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन रुपये नहीं निकल सके। परेशान होकर अशोक ने घर के बर्तन और बेड को गांव के ही एक व्यक्ति को बेच दिया और पत्नी को घर लाया।
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बहू को देखने जाना है लेकिन नहीं मिल रहे रुपये
जेबा। गांव खितौआ के सुच्चा सिंह का भी जेबा की बैंक में खाता है। उनके पुत्र हरविंदर की पत्नी रंजीत कौर सिपाही है और लखनऊ में पोस्टेड है। कुछ दिन पूर्व रंजीत कौर मार्ग दुर्घटना में घायल हो गईं। जानकारी मिली तो सुच्चा सिंह ने बहू को देखने लखनऊ जाने का विचार किया। इलाज के लिए कुछ रुपयों की भी दरकार थी। तब से वह रुपये के लिए बैंक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कैश नहीं होने के कारण भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से सुच्चा सिंह बहू को देखने लखनऊ नहीं पहुंच पा रहे हैं। 
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पौत्री की शादी में तीन दिन बाकी, नहीं मिल रहे रुपये
जेबा। गांव जेबा निवासी रामगुनी की पौत्री ज्योति की आठ दिसंबर को शादी है। शादी में मात्र तीन दिन का समय बचा है और तमाम व्यवस्थाएं करने के लिए रुपयों की जरूरत है। रामगुनी कई दिन से बैंक के चक्कर लगाकर थक चुकी हैं, लेकिन रोजाना कैश नहीं है का रटा रटाया जवाब मिलने पर वह परेशान होकर घर लौट आती हैं। इसी गांव की वृद्धा रन्नो देवी भी बैंक से रुपये निकालने के लिए कई दिन से चक्कर लगा रही हैं, लेकिन निराशा ही हाथ लग रही है। रन्नो देवी के पति की पहले ही मौत हो चुकी है। गांव केे ही कृपाशंकर इलाज के लिए लखनऊ में भर्ती हैं। उनके परिवार के लोगों को इलाज के लिए रुपये की दरकार है, लेकिन बैंक के चक्कर लगाने के बाद भी रुपये नहीं मिलने से लोगों से उधार लेकर इलाज कराया जा रहा है। 

बैंक आने वाले सभी उपभोक्ताओं को भुगतान किया जा रहा है। कैश कम होने की स्थित में ग्राहकों को कम रुपये मिल पाते हैं। भुगतान नहीं करने का आरोप निराधार है। - कमला प्रसाद आजाद, प्रबंधक बड़ौदा पश्चिमी ग्रामीण बैंक शाखा जेबा, पुवायां
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