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गेहूं का नहीं मिल रहा वाजिब दाम

Sun, 19 Apr 2015 11:29 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Sun, 19 Apr 2015 11:29 PM IST
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Wheat can not find an affordable price
बेमौसम बारिश से हुई फसल की बर्बादी का दंश झेल रहे किसानों को बची-खुची फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। सरकारी तंत्र की मनमानी से किसानों को समर्थन मूल्य योजना के तहत गेहूं खरीद के मानकों में केंद्र सरकार द्वारा दी गई शिथिलता का लाभ भी नहीं मिल रहा है। शासन ने नुकसान से प्रभावित गेहूं खरीद के मानकों में छूट के बदले प्रति क्विंटल लगभग 33 रुपये की कटौती करके किसानों का सरकारी खरीद से मोहभंग कर दिया है। दूसरी ओर गल्ला आढ़ती गेहूं के औने पौने दाम देकर किसानों से लूट जैसा सुलूक कर रहे हैं।
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प्रशासन ने 1.55 लाख मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए विभिन्न क्रय एजेंसियों के 150 केंद्रों को मंजूरी दी। बारिश और आंधी की मार से गेहूं उत्पादन में गिरावट आने से शुरुआती एक सप्ताह तक क्रय केंद्र सूने पड़े रहे तो सहकारी समितियों को भी गेहूं खरीद में जुटा दिया गया। सोसाइटी के 47 सेंटर अनुमोदित होने से क्रय केंद्रों की संख्या बढ़कर 197 हो गई, लेकिन गेहूं की सरकारी खरीद अभी तक लक्ष्य से काफी पीछे है।
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खरीद मानकों मेें छूट पर इस तरह होगी कटौती
फरवरी से लेकर मार्च तक कई बार फसल भीगने के बावजूद शासन ने 12 प्रतिशत नमी के पूर्व निर्धारित मानक में कोई ढील नहीं है। उल्टे, रियायतों की कीमत वसूलने की तैयारी कर ली है। मसलन, बारिश से छह से दस प्रतिशत तक सिकुड़े और खराब हुए गेहूं के समर्थन मूल्य में कोई कटौती नहीं होगी, लेकिन गेहूं में इससे अधिक सिकुड़न पाए जाने पर 29 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कटौती होगी। यही नहीं, 10 से 50 प्रतिशत तक भीगे गेहूं के एवज में प्रति क्विंटल 3.63 रुपये चुकाने होंगे। चूंकि, बारिश से गेहूं काफी मात्रा में खराब हुआ। इसलिए उसका समर्थन मूल्य पाने के लिए किसानों को प्रति क्विंटल 33 रुपये अपनी जेब से देने होंगे।
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घरेलू जरूरत को प्राथमिकता दे रहे किसान
अधिकारियों की मानें तो बर्बाद होने से बचा गेहूं सेंटरोें और मंडियों में लाने के बजाय किसान घरेलू भरण पोषण को प्राथमिकता देते हुए बुखारियों में भर रहे हैं। किसानों की मंशा है कि साल भर उन्हें गेहूं बाजार से खरीदना न पड़े। डिप्टी आरएमओ कौशल देव के अनुसार रोजा मंडी में शनिवार तक केवल तीन लाख क्विंटल गेहूं की आवक हुई, जबकि बीते साल इसी अवधि में पांच लाख क्विंटल गेहूं मंडी में बिक चुका था। उन्होंने कहा कि अच्छी क्वालिटी का गेहूं मंडी में 1461 रुपये के भाव तक बिका जो कि समर्थन मूल्य से भी ज्यादा है। क्रय केंद्रों पर पर्याप्त गेहूं न पहुंचने की एक वजह यह भी है कि आढ़त पर बेहतर मूल्य मिल रहा है।
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