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सड़क खराब, पेयजल का अभाव, सिर्फ नाम का आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस
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आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचने के लिए मुश्किल भरा कच्चा रास्ता । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुुर। सवा करोड़ रुपये से आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण तो करा दिया, लेकिन शोकाकुल परिजन के लिए पेयजल तक की व्यवस्था यहां नहीं है। आबादी से दूर बने पोस्टमार्टम हाउस तक आने वाली सड़क भी बदहाल है। बरसाती पानी भरने से सड़क दलदल की तरह हो गई है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने अजीजगंज मोहल्ले में सवा करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चीरघर बनाया गया है। पांच जून को वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना और सांसद अरुण सागर ने लोकार्पण किया। आसपास कहीं पर भी नल नहीं लगवाया है। रोजाना तीन से चार शव यहां अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए लाए जाते हैं, जिनके साथ कई परिजन पहुंचते हैं। दोपहर दो बजे तक डॉक्टर व अन्य स्टाफ पहुंचता है। पानी लेने के लिए उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।
चीरघर के कच्चे रास्ते में चलना मुश्किल
आधुनिक चीरघर आने के लिए दो रास्ते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने से कच्चे रास्ते से होकर आना होता है दूसरा रास्ता गर्रा पुल के पास डैम की तरफ से होते हुए जाता है। अक्सर लोग और एंबुलेंस राजकीय मेडिकल कॉलेज की तरफ से कच्चे रास्ते से आते हैं, लेकिन कुछ देर की बारिश से कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। कच्चे रास्ते पर कई बार एंबुलेंस फंस जाती हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने अजीजगंज मोहल्ले में सवा करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चीरघर बनाया गया है। पांच जून को वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना और सांसद अरुण सागर ने लोकार्पण किया। आसपास कहीं पर भी नल नहीं लगवाया है। रोजाना तीन से चार शव यहां अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए लाए जाते हैं, जिनके साथ कई परिजन पहुंचते हैं। दोपहर दो बजे तक डॉक्टर व अन्य स्टाफ पहुंचता है। पानी लेने के लिए उन्हें राजकीय मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है।
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चीरघर के कच्चे रास्ते में चलना मुश्किल
आधुनिक चीरघर आने के लिए दो रास्ते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज के सामने से कच्चे रास्ते से होकर आना होता है दूसरा रास्ता गर्रा पुल के पास डैम की तरफ से होते हुए जाता है। अक्सर लोग और एंबुलेंस राजकीय मेडिकल कॉलेज की तरफ से कच्चे रास्ते से आते हैं, लेकिन कुछ देर की बारिश से कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है। कच्चे रास्ते पर कई बार एंबुलेंस फंस जाती हैं।
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