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अधिशासी अभियंता विद्युत के खिलाफ वारंट जारी
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Sun, 28 May 2017 12:35 AM IST
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उपभोक्ता के बिजली बिल में गड़बड़ी का मामला
उपभोक्ता के बिजली बिल में गड़बड़ी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एसपी को आदेशित करते हुए कहा कि रंजीत सिंह बनाम पावर कारपोरेशन के दायर वाद में अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम ने 16 अप्रैल 2013 का अनुपालन नहीं किया है, इसलिए वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत पारित आदेश 26 मई 2017 में आरोपित हैं। लिहाजा अधिशासी अभियंता को गिरफ्तार करके फोरम समक्ष पेश करें। आदेशित पत्र में कहा गया है कि 12 जून को हाजिर होने पर उन्हें एक हजार राशि के व्यक्तिगत अनुबंध पत्र प्रस्तुत करने पर छोड़ा जा सकता है। टायर व्यापारी रंजीत सिंह ने बताया कि पुवायां में उनके नाम दुकान का बिजली कनेक्शन था। वर्ष 2009 में लगभग 54 हजार 619.80 रुपये बिल का पूरा भुगतान करने के बाद मामला फोरम में होने पर उन्होंने 24 हजार तीन सौ रुपये जमा कर दिए। इसके बाद भी उन पर एक लाख की आरसी जारी कर दी। जबकि 16 अप्रैल 2013 में फोरम ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि उपभोक्ता ने जो बिल जमा किए हैं, उनकी रसीद और समायोजन का खाका फोरम के समक्ष एक माह में दिया जाए। इसके बाद भी अधिशासी अभियंता फोरम में नहीं पहुंचे।
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उपभोक्ता के बिजली बिल में गड़बड़ी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एसपी को आदेशित करते हुए कहा कि रंजीत सिंह बनाम पावर कारपोरेशन के दायर वाद में अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम ने 16 अप्रैल 2013 का अनुपालन नहीं किया है, इसलिए वह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत पारित आदेश 26 मई 2017 में आरोपित हैं। लिहाजा अधिशासी अभियंता को गिरफ्तार करके फोरम समक्ष पेश करें। आदेशित पत्र में कहा गया है कि 12 जून को हाजिर होने पर उन्हें एक हजार राशि के व्यक्तिगत अनुबंध पत्र प्रस्तुत करने पर छोड़ा जा सकता है। टायर व्यापारी रंजीत सिंह ने बताया कि पुवायां में उनके नाम दुकान का बिजली कनेक्शन था। वर्ष 2009 में लगभग 54 हजार 619.80 रुपये बिल का पूरा भुगतान करने के बाद मामला फोरम में होने पर उन्होंने 24 हजार तीन सौ रुपये जमा कर दिए। इसके बाद भी उन पर एक लाख की आरसी जारी कर दी। जबकि 16 अप्रैल 2013 में फोरम ने फैसला सुनाते हुए कहा था कि उपभोक्ता ने जो बिल जमा किए हैं, उनकी रसीद और समायोजन का खाका फोरम के समक्ष एक माह में दिया जाए। इसके बाद भी अधिशासी अभियंता फोरम में नहीं पहुंचे।
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