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ज्ञान बढ़ाने में निजी पुस्तकालय बने ठिकाना, सरकारी की हालत खस्ता
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शाहजहांपुर के खिरनी बाग स्थित राजकीय जिला पुस्तकालय । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। पढ़ने और पढ़ाने का शौक रखने वालों के लिए सरकारी लाइब्रेरी में किताबें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। बेहतर पुस्तकें और बैठने तक का इंतजाम सही नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के अभाव के चलते युवाओं ने भी दूरी बना ली है। वहीं निजी लाइब्रेरी काफी बेहतर हैं। हनुमत धाम स्थित लाइब्रेरी में सबसे ज्यादा पुस्तक प्रेमियों का आना-जाना रहता है। वहां किताबों का भंडार है। दूसरी तरफ जीएफ कॉलेज और एसएस कॉलेज की लाइब्रेरी छात्र-छात्राओं के लिए लाभकारी साबित हो रही है।
राजकीय पुस्तकालय में प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स बंद पड़ी
जीआईसी खेल मैदान के सामने टीचर्स कॉलोनी में राजकीय पुस्तकालय है। दो मंजिला भवन के प्रथम तल पर एक हाल में इस पुस्तकालय का संचालन होता है। यहां लाइब्रेरियन तक कार्यरत नहीं है। डीआईओएस कार्यालय के बाबू को पुस्तकालय की देखरेख का अतिरिक्त चार्ज दिया है। कुछ युवा अखबार और शैक्षिक पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें पढ़ते मिले। पुस्तकालय की अलमारियों में कुछ पुरानी किताबें रखी मिलीं, जिनमें से जरूरत की पुस्तक को ढूंढना भी मुश्किल है। कॉलेजों में छात्रों के लिए उपलब्ध कराने के लिए आने वाली प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स गत्ते के डिब्बों में बंद मिली। राजकीय पुस्तकालय में आने वालों के लिए बैठने, पीने के पानी और लाइट जाने पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। एसी खराब पड़ा मिला। अग्निशमन यंत्र धूल फांक रहा है।
विवेकानंद लाइब्रेरी में 20 हजार किताबों का संग्रह
हनुमत धाम पर विवेकानंद लाइब्रेरी का निर्माण वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से करवाया गया था। फिलहाल यहां 20 हजार से अधिक किताबें हैं। धार्मिक, उपन्यास, कहानी, काव्य, साहित्य, इतिहास से जुड़ी पुस्तकों के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आने वाली किताबें, करंट अफेयर्स आसानी से उपलब्ध हो जाती है। लाइब्रेरियन शिवानी अरोड़ा बताती हैं कि पुस्तकालय में करीब 150 लोग रोजाना आते हैं। सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। तमाम रंगकर्मी अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए किताबों को पढ़ने पहुंचते हैं। पुस्तकालय के 88 आजीवन सदस्य हैं। एक माह, छह माह, एक साल, दस साल के लिए सदस्यता प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए 200 से लेकर 10 हजार रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
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जीएफ व एसएस कॉलेज में पुस्तकालयों का संचालन
शहर में राजकीय और निजी पुस्तकालयों के साथ ही कॉलेज स्तर पर भी लाइब्रेरी बनाई गई हैं। जीएफ कॉलेज और एसएस कॉलेज की लाइब्रेरी में छात्र-छात्राओं की जरूरत को पूरा करने का हरसंभव प्रयास होता है। एसएस कॉलेज के प्राचार्य अनुराग अग्रवाल व जीएफ कालेज प्राचार्य डॉ. मोहम्मद तारिक ने बताया कि लाइब्रेरी को मेंटेन रखने के लिए लाइब्रेरियन की नियुक्ति की गई। छात्र-छात्राओं के लिए शैगक्षिक पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों के साथ ही करंट अफेयर्स, अखबार आदि की उपलब्ध भी रहती है। लाइब्रेरी से पुस्तकें घर ले जाकर पढ़ने के लिए मेंबरशिप लेना जरूरी होता है।
सभी किताबें नहीं
हायर एकेडमी से जुड़ी किताबें राजकीय पुस्तकालय में उपलब्ध नहीं हैं। इनमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ की किताबें शामिल हैं। राजकीय पुस्तकालय में सभी तरह की पुस्तकों की उपलब्धता होनी चाहिए। - सिद्धार्थ पांडेय, छात्र
यहां कोई सुविधा नहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें राजकीय पुस्तकालय में होनी चाहिए, लेकिन यहां पर एक भी ऐसी किताब नहीं मिलती है। प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स भी गत्ते में बंद रखी हैं। कोई सुविधा नहीं है। - आदेश यादव, छात्र
संसाधनों का अभाव
किताबों के साथ ही लाइब्रेरी में बैठने के लिए जगह, पीने के पानी और लाइट जाने पर बिजली की व्यवस्था तक राजकीय पुस्तकालय में नहीं है। इस तरह की लाइब्रेरी से किसी को कोई लाभ नहीं मिल सकता है। - भूपेंद्र यादव, छात्र
घर से लाती हूं किताब
घर पर पढ़ाई करने में व्यवधान होता है, इसलिए राजकीय पुस्तकालय में आकर पढ़ाई करती हूं। सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। पढ़ने को किताब तक घर से लाती हूं। - रितू श्रीवास्तव, छात्रा
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राजकीय पुस्तकालय में प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स बंद पड़ी
जीआईसी खेल मैदान के सामने टीचर्स कॉलोनी में राजकीय पुस्तकालय है। दो मंजिला भवन के प्रथम तल पर एक हाल में इस पुस्तकालय का संचालन होता है। यहां लाइब्रेरियन तक कार्यरत नहीं है। डीआईओएस कार्यालय के बाबू को पुस्तकालय की देखरेख का अतिरिक्त चार्ज दिया है। कुछ युवा अखबार और शैक्षिक पाठ्यक्रम से जुड़ी किताबें पढ़ते मिले। पुस्तकालय की अलमारियों में कुछ पुरानी किताबें रखी मिलीं, जिनमें से जरूरत की पुस्तक को ढूंढना भी मुश्किल है। कॉलेजों में छात्रों के लिए उपलब्ध कराने के लिए आने वाली प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स गत्ते के डिब्बों में बंद मिली। राजकीय पुस्तकालय में आने वालों के लिए बैठने, पीने के पानी और लाइट जाने पर बिजली की व्यवस्था नहीं है। एसी खराब पड़ा मिला। अग्निशमन यंत्र धूल फांक रहा है।
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विवेकानंद लाइब्रेरी में 20 हजार किताबों का संग्रह
हनुमत धाम पर विवेकानंद लाइब्रेरी का निर्माण वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से करवाया गया था। फिलहाल यहां 20 हजार से अधिक किताबें हैं। धार्मिक, उपन्यास, कहानी, काव्य, साहित्य, इतिहास से जुड़ी पुस्तकों के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आने वाली किताबें, करंट अफेयर्स आसानी से उपलब्ध हो जाती है। लाइब्रेरियन शिवानी अरोड़ा बताती हैं कि पुस्तकालय में करीब 150 लोग रोजाना आते हैं। सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। तमाम रंगकर्मी अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए किताबों को पढ़ने पहुंचते हैं। पुस्तकालय के 88 आजीवन सदस्य हैं। एक माह, छह माह, एक साल, दस साल के लिए सदस्यता प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए 200 से लेकर 10 हजार रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
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जीएफ व एसएस कॉलेज में पुस्तकालयों का संचालन
शहर में राजकीय और निजी पुस्तकालयों के साथ ही कॉलेज स्तर पर भी लाइब्रेरी बनाई गई हैं। जीएफ कॉलेज और एसएस कॉलेज की लाइब्रेरी में छात्र-छात्राओं की जरूरत को पूरा करने का हरसंभव प्रयास होता है। एसएस कॉलेज के प्राचार्य अनुराग अग्रवाल व जीएफ कालेज प्राचार्य डॉ. मोहम्मद तारिक ने बताया कि लाइब्रेरी को मेंटेन रखने के लिए लाइब्रेरियन की नियुक्ति की गई। छात्र-छात्राओं के लिए शैगक्षिक पाठ्यक्रम से जुड़ी पुस्तकों के साथ ही करंट अफेयर्स, अखबार आदि की उपलब्ध भी रहती है। लाइब्रेरी से पुस्तकें घर ले जाकर पढ़ने के लिए मेंबरशिप लेना जरूरी होता है।
सभी किताबें नहीं
हायर एकेडमी से जुड़ी किताबें राजकीय पुस्तकालय में उपलब्ध नहीं हैं। इनमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ की किताबें शामिल हैं। राजकीय पुस्तकालय में सभी तरह की पुस्तकों की उपलब्धता होनी चाहिए। - सिद्धार्थ पांडेय, छात्र
यहां कोई सुविधा नहीं
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें राजकीय पुस्तकालय में होनी चाहिए, लेकिन यहां पर एक भी ऐसी किताब नहीं मिलती है। प्रधानमंत्री एग्जाम वारियर्स भी गत्ते में बंद रखी हैं। कोई सुविधा नहीं है। - आदेश यादव, छात्र
संसाधनों का अभाव
किताबों के साथ ही लाइब्रेरी में बैठने के लिए जगह, पीने के पानी और लाइट जाने पर बिजली की व्यवस्था तक राजकीय पुस्तकालय में नहीं है। इस तरह की लाइब्रेरी से किसी को कोई लाभ नहीं मिल सकता है। - भूपेंद्र यादव, छात्र
घर से लाती हूं किताब
घर पर पढ़ाई करने में व्यवधान होता है, इसलिए राजकीय पुस्तकालय में आकर पढ़ाई करती हूं। सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है। पढ़ने को किताब तक घर से लाती हूं। - रितू श्रीवास्तव, छात्रा

शाहजहांपुर के हनुमतधात स्थित स्वामी विवेकानंद लाइब्रेरी पढ़ाई करते लोग । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR