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उर्दू जबान एक मुकम्मल तहजीब : तारिक
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शाहजहांपुर के जीएफ कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षक व छात्र-छात्राएं
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। जीएफ कॉलेज में बृहस्पतिवार को यौमे उर्दू और शिक्षा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने उर्दू जबान की खासियत से रूबरू कराया। प्राचार्य डॉ. मोहम्मद तारिक ने कहा कि उर्दू जबान एक मुकम्मल तहजीब है। इसलिए हमें इस जबान के फरोग में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। अल्लामा इकबाल और मौलाना अबुल कलाम आजाद के हवाले से उन्होंने कहा कि ये उर्दू दुनिया के ऐसे सितारे हैं, जिनकी तहरीरें मुल्क में अमन और इंसानियत का पैगाम देती हैं।
उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. तजम्मुल हुसैन ने कहा कि उर्दू जबान हिंदुस्तान में लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली और दिलचस्पी के साथ सुनने वाली जबान है। फारसी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुलाम अशरफ कादरी ने कहा कि अबुल कलाम आजाद और अल्लामा इकबाल का साहित्य भारत की साझी संस्कृति की विरासत हैं। डॉ. इरम जहां ने कहा कि हमें उर्दू जबान सीखना चाहिए।
यह मुहब्बत की जबान है। यह दिलों को जोड़ने में मदद करती है। डॉ. कौसर जमाल ने कहा कि अल्लामा इकबाल की शायरी लोगों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा पैदा करती रहेगी। मसीउल्लाह ने कहा कि इकबाल का साहित्य इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देता है। छात्र-छात्राओं में ललित हरि मिश्रा, अरबाज खान, प्रतीक उपाध्याय, फाहिना उमरा, रीना परवीन, आमिना, गोविंद मिश्रा, फलक, तैयबा आदि ने विचार रखे। उर्दू विभाग द्वारा संचालित उर्दू प्रशिक्षण के सार्टिफिकेट कोर्स ‘आमोजिश’ के प्रमाण पत्र भी बांटे। अरबी विभागाध्यक्ष वकील अहमद, डॉ. नसीम अहमद, डॉ. मो. अरशद ख़ान, डॉ. आनंद मोहन पांडे, अर्चना सक्सेना, आशुतोष अग्निहोत्री, जाबिर अली, करुण कुमार पांडे, चांद मियां मौजूद रहे।
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उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. तजम्मुल हुसैन ने कहा कि उर्दू जबान हिंदुस्तान में लोगों को सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली और दिलचस्पी के साथ सुनने वाली जबान है। फारसी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुलाम अशरफ कादरी ने कहा कि अबुल कलाम आजाद और अल्लामा इकबाल का साहित्य भारत की साझी संस्कृति की विरासत हैं। डॉ. इरम जहां ने कहा कि हमें उर्दू जबान सीखना चाहिए।
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यह मुहब्बत की जबान है। यह दिलों को जोड़ने में मदद करती है। डॉ. कौसर जमाल ने कहा कि अल्लामा इकबाल की शायरी लोगों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा पैदा करती रहेगी। मसीउल्लाह ने कहा कि इकबाल का साहित्य इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देता है। छात्र-छात्राओं में ललित हरि मिश्रा, अरबाज खान, प्रतीक उपाध्याय, फाहिना उमरा, रीना परवीन, आमिना, गोविंद मिश्रा, फलक, तैयबा आदि ने विचार रखे। उर्दू विभाग द्वारा संचालित उर्दू प्रशिक्षण के सार्टिफिकेट कोर्स ‘आमोजिश’ के प्रमाण पत्र भी बांटे। अरबी विभागाध्यक्ष वकील अहमद, डॉ. नसीम अहमद, डॉ. मो. अरशद ख़ान, डॉ. आनंद मोहन पांडे, अर्चना सक्सेना, आशुतोष अग्निहोत्री, जाबिर अली, करुण कुमार पांडे, चांद मियां मौजूद रहे।
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