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Shahjahanpur News: मंदिर कब्जाने के लिए रॉड से पीटकर दो साधुओं की हत्या, शव जलाए
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खुदागंज के सूथा गांव में घटना की जानकारी देते शिवकुमार सिंह। संवाद
खुदागंज (शाहजहांपुर)। सूथा गांव स्थित पुराने शिव मंदिर परिसर में बुधवार रात दो साधुओं की लोहे की रॉड से पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद उनके शव जला दिए। पुलिस ने गांव निवासी आरोपी सुमित सिंह को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की राॅड को बरामद कर लिया है। पूछताछ में पता चला कि आरोपी मंदिर पर कब्जा करना चाहता था। वह कई दिनों से दोनों साधुओं को मंदिर छोड़कर जाने के लिए कह रहा था।
एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि शहर के अजीजगंज मोहल्ला निवासी गोपालदास (75) करीब 40 वर्षों से मंदिर में रहकर सेवा कर रहे थे। उनके शिष्य सूथा गांव निवासी बिहारी दास (60) भी सेवा करते थे। गांव का सुमित सिंह कई दिनों से दोनों साधुओं के पास जाकर बैठता था और उन्हें मंदिर छोड़कर जाने के लिए कहता था। साधुओं ने उसकी बात नहीं मानी तो बुधवार रात दस बजे वह घर से लोहे की रॉड लेकर निकल गया।
एसपी के मुताबिक, रात 12 बजे वह मंदिर पहुंचा और तख्त पर सो रहे गोपालदास पर ताबड़तोड़ वार किए। उनकी मौत के बाद पास में सो रहे बिहारीदास की भी हत्या कर दी। मंदिर में रखे घी-तेल आदि को डालकर दोनों के शव जला दिए। इसके बाद सुमित घर जाकर सो गया। सुबह छह बजे वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से धुआं उठते देखा तो मंदिर के सर्वेसर्वा शिवकुमार सिंह को कॉल की।
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शिवकुमार सिंह ने अपने बेटे को मौके पर भेजा तो दोनों साधुओं के शव जले मिले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी सुमित को घर से ही गिरफ्तार कर लिया। एडीजी रमित शर्मा, एसपी सौरभ दीक्षित ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की। एसपी ने बताया कि परिजनों ने सुमित का बरेली से मानसिक इलाज चलने की बात बताई है। शिवकुमार की तहरीर पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
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मंदिर और तीन बीघा जमीन पर थी सुमित की नजर
शाहजहांपुर। दो साधुओं की हत्या के आरोपी सुमित की नजर मंदिर और उससे जुड़ी तीन बीघा जमीन पर थी। ग्रामीणों का कहना है कि वह आए दिन मंदिर पहुंचकर बिहारीदास को वहां से चले जाने के लिए धमकाता था। बुधवार शाम को भी उसके मंदिर पहुंचने और वहां मौजूद लोगों को धमकाने की बात सामने आई है। घर से निकलने से पहले उसने परिजनों से भी मारपीट की थी। इसके बाद वे घर छोड़कर गांव में ही परिचितों के यहां चले गए थे।
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि तोड़फोड़ और आगजनी करना सुमित की आदत है। आरोप है कि पिछले साल उसने शिक्षामित्र कौशलेंद्र की कार और एक बाइक में आग लगा दी थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। वह कई बार लोगों के दरवाजे और चौखट तोड़ चुका है। उस पर जानवरों के साथ क्रूरता के भी आरोप हैं। पिछले साल उसने एक बकरे के कई टुकड़े कर दिए थे। वर्ष 2020 में एक पड्डे को मारने और दूसरे की आंख फोड़ने का भी आरोप लगा था। पड्डे की मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने की बात सामने आई है।ग्रामीणों का कहना है कि सुमित अक्सर बुजुर्गों से मारपीट करता और उन्हें धमकाता था। उसके व्यवहार से लोग भयभीत रहते थे, इसलिए कई घटनाओं में शिकायत नहीं की गई। पुलिस की जांच में आरोपी के जेल में भी अन्य बंदियों से विवाद करने की बात सामने आई है। तब बंदियों ने उसे पीटा भी था।
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जमीन पर अपना हक मानता था सुमित
गांव सूथा में रहने वाले शिवकुमार के दो भाई विष्णु और ओमवीर हैं। आरोपी सुमित विष्णु सिंह का बेटा है। शिवकुमार ने बताया कि उनके नाम पर चार बीघा जमीन है। इसमें ढाई-तीन बीघा जमीन पर मंदिर बना हुआ है। कुछ जमीन खाली पड़ी है। विष्णु और ओमवीर के नाम अलग खेत हैं। सुमित भतीजा होने के कारण मंदिर की जमीन पर भी अपना हक मानता था। इसको लेकर विवाद की स्थिति रहती थी।
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आरोपी पर दर्ज हैं सात मामले, पिता पर भी कर चुका है हमला
35 वर्षीय सुमित पर मारपीट, वाहन में आग लगाने और पशुओं की हत्या समेत सात मामले दर्ज हैं। इनमें तीन मामले आर्म्स एक्ट के हैं। दिसंबर 2025 में आर्म्स एक्ट के मामले में जेल गया था और अगस्त में हरियाली तीज के दौरान पिता उसकी जमानत कराकर घर लाए थे। कुछ समय पहले उसने गांव के रोहित सिंह की कार में आग लगा दी थी। ओमवीर सिंह के खोखे में आग लगाने का भी आरोप है। पशु हत्या के मामले में भी वह जेल जा चुका है। सुमित पर अपने पिता विष्णु सिंह पर चाकू से हमला करने का भी आरोप है। इस घटना में विष्णु बाल-बाल बच गए थे।
ग्रामीणों के अनुसार, 15-20 दिन पहले वह विक्रमपुर चकौरा से एक बकरा चुरा लाया था। बकरे को काटकर उसके टुकड़े गांव में कई लोगों के घरों के सामने फेंक दिए। उसकी हरकतों से परेशान राजेश, शिवदास और मुरारी समेत कुछ लोग गांव छोड़कर चले गए।
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आरोपी के डर से कमरे का दरवाजा बंद कर सोते थे परिजन
खुदागंज (शाहजहांपुर)। सुमित सिंह की दबंगई और आपराधिक हरकतों से गांव के लोग ही नहीं, उसके परिवार वाले भी परेशान थे। ग्रामीणों के मुताबिक नशे की हालत में वह अक्सर लोगों से विवाद करता था। उसके डर से परिवार के लोग रात में कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके सोते थे। सुमित शादीशुदा है और उसके दो बच्चे आरुषी और आर्यन हैं। पत्नी का नाम नीलम है। परिवार के लोग मजदूरी करते हैं और सुमित भी दिल्ली व रुद्रपुर में मजदूरी करता था।
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बीडीसी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था सुमित
ग्रामीणों के मुताबिक, सुमित सिंह बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वह चाहता था कि उसके खिलाफ कोई चुनाव न लड़े। आरोप है कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों को भी वह धमकाता था। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से वह गांव में अपना दबदबा कायम करने और लोगों में भय पैदा करने का प्रयास करता था।
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22 साल तक संवारा शिव मंदिर, अब हत्याकांड ने झकझोर दिया
खुदागंज। सूथा गांव के प्राचीन शिव मंदिर में दो सेवादारों की हत्या ने मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े पूर्व सैनिक शिवकुमार सिंह को भी झकझोर दिया। वर्ष 2004 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एक हादसे में उनकी जान बची तो उन्होंने इसे भगवान की कृपा माना और मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। करीब दो दशक में उन्होंने मंदिर परिसर में धर्मशाला, रसोईघर और हाॅल समेत कई निर्माण कराए।
आरोपी सुमित के चाचा शिवकुमार सिंह ने बताया कि मंदिर काफी पुराना है। वर्ष 1960 में ठाकुर भगवन सिंह पहलवान ने यहां धर्मशाला बनवाई थी। इसमें साधु-संत ठहरते थे। उन्होंने मंदिर और धर्मशाला का जीर्णोद्धार कराया। श्रद्धालुओं के बैठने और धार्मिक आयोजनों के लिए भी व्यवस्थाएं कराईं। मंदिर परिसर ढाई से तीन बीघे में फैला है। शिवकुमार के अनुसार, यह जमीन उनकी और उनके परिवार की है।
उन्होंने बताया कि बाबा बिहारीदास पहले मंदिर के पास स्थित यज्ञशाला में रहते थे। वहां उनके साथ मारपीट की घटना हुई तो वह मंदिर परिसर में रहने लगे। फिलहाल, स्वास्थ्य कारणों से शिवकुमार स्वयं अधिक सक्रिय नहीं रह पाते थे। वह अपने बेटे के जरिये मंदिर में जरूरत का सामान भिजवाते और व्यवस्थाओं की निगरानी कराते थे।
बृहस्पतिवार सुबह गांव के लोगों ने कॉल करके मंदिर से धुआं उठने की सूचना दी तो उन्होंने तत्काल बेटे को मौके पर भेजा। बेटे ने उन्हें मंदिर में दोनों सेवादारों की हत्या की जानकारी दी। शिवकुमार ने कहा कि मंदिर परिसर में इस तरह की घटना बेहद दुखद है। उन्होंने हत्याकांड के दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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बुधवार को ही बेटी के पास से लौटे थे गोपालदास
खुदागंज। गाेपालदास कुछ समय पहले खुटार में ब्याही अपनी बेटी सरस्वती के पास गए थे। वहां से वह बुधवार को ही लौटे थे। उनकी हत्या की सूचना पर बृहस्पतिवार दोपहर पहुंची बेटी पिता को याद कर बिलख पड़ी। साथ में आए लोगों ने उन्हें संभाला।
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मौत की वजह स्पष्ट नहीं, जांच के लिए विसरा सुरक्षित
दोनों साधुओं का शव पूरी तरह से जल गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हुआ तो जांच के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
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ग्रामीणों के शक पर पुलिस ने सुमित को हिरासत में लिया
शाहजहांपुर। मंदिर में दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से पूछताछ की। ग्रामीणों ने सुमित पर शक जाहिर करते हुए बताया कि बुधवार शाम वह मंदिर में साधुओं के साथ बैठा था। मंदिर में आने जाने वाले कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को यह भी बताया कि सुमित अक्सर साधुओं को रास्ते से हटाने की बात करता था। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस तत्काल सुमित के घर पहुंची। वह घर में ही मिल गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। एसपी सौरभ दीक्षित के अनुसार, पूछताछ में सुमित ने हत्या की बात स्वीकार की। उसने बताया कि वह रात करीब दस बजे मंदिर पहुंचा था और इसके बाद उसने हत्याकांड को अंजाम दिया।
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शाम से ही बिछानी शुरू कर दी थी बिसात
- बुधवार शाम सात बजे सुमित मंदिर पहुंचा और आधे घंटे तक दोनों साधुओं के पास बैठा।
- रात आठ बजे वह घर पहुंचा और परिजनों से मारपीट की।
- रात दस बजे वह लोहे की रॉड लेकर घर से निकला।
- रात 10 से 12 बजे के बीच हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
- रात 12:30 बजे वह घर आकर नहाने-धोने के बाद सो गया।
- बृहस्पतिवार सुबह छह बजे ग्रामीणों की घटना की जानकारी हुई।
- सुबह सात बजे पुलिस मौके पर पहुंची।
- सुबह आठ बजे आरोपी सुमित को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।
- सुबह नौ बजे एसपी सौरभ दीक्षित और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
- दोपहर एक बजे एडीजी बरेली रमित शर्मा, डीआईजी बरेली रेंज अजय साहनी मौके पर पहुंचे।
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एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि शहर के अजीजगंज मोहल्ला निवासी गोपालदास (75) करीब 40 वर्षों से मंदिर में रहकर सेवा कर रहे थे। उनके शिष्य सूथा गांव निवासी बिहारी दास (60) भी सेवा करते थे। गांव का सुमित सिंह कई दिनों से दोनों साधुओं के पास जाकर बैठता था और उन्हें मंदिर छोड़कर जाने के लिए कहता था। साधुओं ने उसकी बात नहीं मानी तो बुधवार रात दस बजे वह घर से लोहे की रॉड लेकर निकल गया।
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एसपी के मुताबिक, रात 12 बजे वह मंदिर पहुंचा और तख्त पर सो रहे गोपालदास पर ताबड़तोड़ वार किए। उनकी मौत के बाद पास में सो रहे बिहारीदास की भी हत्या कर दी। मंदिर में रखे घी-तेल आदि को डालकर दोनों के शव जला दिए। इसके बाद सुमित घर जाकर सो गया। सुबह छह बजे वहां से गुजर रहे ग्रामीणों ने अंदर से धुआं उठते देखा तो मंदिर के सर्वेसर्वा शिवकुमार सिंह को कॉल की।
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शिवकुमार सिंह ने अपने बेटे को मौके पर भेजा तो दोनों साधुओं के शव जले मिले। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी सुमित को घर से ही गिरफ्तार कर लिया। एडीजी रमित शर्मा, एसपी सौरभ दीक्षित ने भी मौके पर पहुंचकर जांच की। एसपी ने बताया कि परिजनों ने सुमित का बरेली से मानसिक इलाज चलने की बात बताई है। शिवकुमार की तहरीर पर उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
मंदिर और तीन बीघा जमीन पर थी सुमित की नजर
शाहजहांपुर। दो साधुओं की हत्या के आरोपी सुमित की नजर मंदिर और उससे जुड़ी तीन बीघा जमीन पर थी। ग्रामीणों का कहना है कि वह आए दिन मंदिर पहुंचकर बिहारीदास को वहां से चले जाने के लिए धमकाता था। बुधवार शाम को भी उसके मंदिर पहुंचने और वहां मौजूद लोगों को धमकाने की बात सामने आई है। घर से निकलने से पहले उसने परिजनों से भी मारपीट की थी। इसके बाद वे घर छोड़कर गांव में ही परिचितों के यहां चले गए थे।
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि तोड़फोड़ और आगजनी करना सुमित की आदत है। आरोप है कि पिछले साल उसने शिक्षामित्र कौशलेंद्र की कार और एक बाइक में आग लगा दी थी, लेकिन इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। वह कई बार लोगों के दरवाजे और चौखट तोड़ चुका है। उस पर जानवरों के साथ क्रूरता के भी आरोप हैं। पिछले साल उसने एक बकरे के कई टुकड़े कर दिए थे। वर्ष 2020 में एक पड्डे को मारने और दूसरे की आंख फोड़ने का भी आरोप लगा था। पड्डे की मौत के मामले में रिपोर्ट दर्ज होने की बात सामने आई है।ग्रामीणों का कहना है कि सुमित अक्सर बुजुर्गों से मारपीट करता और उन्हें धमकाता था। उसके व्यवहार से लोग भयभीत रहते थे, इसलिए कई घटनाओं में शिकायत नहीं की गई। पुलिस की जांच में आरोपी के जेल में भी अन्य बंदियों से विवाद करने की बात सामने आई है। तब बंदियों ने उसे पीटा भी था।
जमीन पर अपना हक मानता था सुमित
गांव सूथा में रहने वाले शिवकुमार के दो भाई विष्णु और ओमवीर हैं। आरोपी सुमित विष्णु सिंह का बेटा है। शिवकुमार ने बताया कि उनके नाम पर चार बीघा जमीन है। इसमें ढाई-तीन बीघा जमीन पर मंदिर बना हुआ है। कुछ जमीन खाली पड़ी है। विष्णु और ओमवीर के नाम अलग खेत हैं। सुमित भतीजा होने के कारण मंदिर की जमीन पर भी अपना हक मानता था। इसको लेकर विवाद की स्थिति रहती थी।
आरोपी पर दर्ज हैं सात मामले, पिता पर भी कर चुका है हमला
35 वर्षीय सुमित पर मारपीट, वाहन में आग लगाने और पशुओं की हत्या समेत सात मामले दर्ज हैं। इनमें तीन मामले आर्म्स एक्ट के हैं। दिसंबर 2025 में आर्म्स एक्ट के मामले में जेल गया था और अगस्त में हरियाली तीज के दौरान पिता उसकी जमानत कराकर घर लाए थे। कुछ समय पहले उसने गांव के रोहित सिंह की कार में आग लगा दी थी। ओमवीर सिंह के खोखे में आग लगाने का भी आरोप है। पशु हत्या के मामले में भी वह जेल जा चुका है। सुमित पर अपने पिता विष्णु सिंह पर चाकू से हमला करने का भी आरोप है। इस घटना में विष्णु बाल-बाल बच गए थे।
ग्रामीणों के अनुसार, 15-20 दिन पहले वह विक्रमपुर चकौरा से एक बकरा चुरा लाया था। बकरे को काटकर उसके टुकड़े गांव में कई लोगों के घरों के सामने फेंक दिए। उसकी हरकतों से परेशान राजेश, शिवदास और मुरारी समेत कुछ लोग गांव छोड़कर चले गए।
आरोपी के डर से कमरे का दरवाजा बंद कर सोते थे परिजन
खुदागंज (शाहजहांपुर)। सुमित सिंह की दबंगई और आपराधिक हरकतों से गांव के लोग ही नहीं, उसके परिवार वाले भी परेशान थे। ग्रामीणों के मुताबिक नशे की हालत में वह अक्सर लोगों से विवाद करता था। उसके डर से परिवार के लोग रात में कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके सोते थे। सुमित शादीशुदा है और उसके दो बच्चे आरुषी और आर्यन हैं। पत्नी का नाम नीलम है। परिवार के लोग मजदूरी करते हैं और सुमित भी दिल्ली व रुद्रपुर में मजदूरी करता था।
बीडीसी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था सुमित
ग्रामीणों के मुताबिक, सुमित सिंह बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। वह चाहता था कि उसके खिलाफ कोई चुनाव न लड़े। आरोप है कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले लोगों को भी वह धमकाता था। ग्रामीणों का कहना है कि इसी वजह से वह गांव में अपना दबदबा कायम करने और लोगों में भय पैदा करने का प्रयास करता था।
22 साल तक संवारा शिव मंदिर, अब हत्याकांड ने झकझोर दिया
खुदागंज। सूथा गांव के प्राचीन शिव मंदिर में दो सेवादारों की हत्या ने मंदिर के जीर्णोद्धार से जुड़े पूर्व सैनिक शिवकुमार सिंह को भी झकझोर दिया। वर्ष 2004 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एक हादसे में उनकी जान बची तो उन्होंने इसे भगवान की कृपा माना और मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। करीब दो दशक में उन्होंने मंदिर परिसर में धर्मशाला, रसोईघर और हाॅल समेत कई निर्माण कराए।
आरोपी सुमित के चाचा शिवकुमार सिंह ने बताया कि मंदिर काफी पुराना है। वर्ष 1960 में ठाकुर भगवन सिंह पहलवान ने यहां धर्मशाला बनवाई थी। इसमें साधु-संत ठहरते थे। उन्होंने मंदिर और धर्मशाला का जीर्णोद्धार कराया। श्रद्धालुओं के बैठने और धार्मिक आयोजनों के लिए भी व्यवस्थाएं कराईं। मंदिर परिसर ढाई से तीन बीघे में फैला है। शिवकुमार के अनुसार, यह जमीन उनकी और उनके परिवार की है।
उन्होंने बताया कि बाबा बिहारीदास पहले मंदिर के पास स्थित यज्ञशाला में रहते थे। वहां उनके साथ मारपीट की घटना हुई तो वह मंदिर परिसर में रहने लगे। फिलहाल, स्वास्थ्य कारणों से शिवकुमार स्वयं अधिक सक्रिय नहीं रह पाते थे। वह अपने बेटे के जरिये मंदिर में जरूरत का सामान भिजवाते और व्यवस्थाओं की निगरानी कराते थे।
बृहस्पतिवार सुबह गांव के लोगों ने कॉल करके मंदिर से धुआं उठने की सूचना दी तो उन्होंने तत्काल बेटे को मौके पर भेजा। बेटे ने उन्हें मंदिर में दोनों सेवादारों की हत्या की जानकारी दी। शिवकुमार ने कहा कि मंदिर परिसर में इस तरह की घटना बेहद दुखद है। उन्होंने हत्याकांड के दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बुधवार को ही बेटी के पास से लौटे थे गोपालदास
खुदागंज। गाेपालदास कुछ समय पहले खुटार में ब्याही अपनी बेटी सरस्वती के पास गए थे। वहां से वह बुधवार को ही लौटे थे। उनकी हत्या की सूचना पर बृहस्पतिवार दोपहर पहुंची बेटी पिता को याद कर बिलख पड़ी। साथ में आए लोगों ने उन्हें संभाला।
मौत की वजह स्पष्ट नहीं, जांच के लिए विसरा सुरक्षित
दोनों साधुओं का शव पूरी तरह से जल गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हुआ तो जांच के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
ग्रामीणों के शक पर पुलिस ने सुमित को हिरासत में लिया
शाहजहांपुर। मंदिर में दोहरे हत्याकांड की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से पूछताछ की। ग्रामीणों ने सुमित पर शक जाहिर करते हुए बताया कि बुधवार शाम वह मंदिर में साधुओं के साथ बैठा था। मंदिर में आने जाने वाले कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को यह भी बताया कि सुमित अक्सर साधुओं को रास्ते से हटाने की बात करता था। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस तत्काल सुमित के घर पहुंची। वह घर में ही मिल गया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। एसपी सौरभ दीक्षित के अनुसार, पूछताछ में सुमित ने हत्या की बात स्वीकार की। उसने बताया कि वह रात करीब दस बजे मंदिर पहुंचा था और इसके बाद उसने हत्याकांड को अंजाम दिया।
शाम से ही बिछानी शुरू कर दी थी बिसात
- बुधवार शाम सात बजे सुमित मंदिर पहुंचा और आधे घंटे तक दोनों साधुओं के पास बैठा।
- रात आठ बजे वह घर पहुंचा और परिजनों से मारपीट की।
- रात दस बजे वह लोहे की रॉड लेकर घर से निकला।
- रात 10 से 12 बजे के बीच हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
- रात 12:30 बजे वह घर आकर नहाने-धोने के बाद सो गया।
- बृहस्पतिवार सुबह छह बजे ग्रामीणों की घटना की जानकारी हुई।
- सुबह सात बजे पुलिस मौके पर पहुंची।
- सुबह आठ बजे आरोपी सुमित को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।
- सुबह नौ बजे एसपी सौरभ दीक्षित और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।
- दोपहर एक बजे एडीजी बरेली रमित शर्मा, डीआईजी बरेली रेंज अजय साहनी मौके पर पहुंचे।

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